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Dumka Lok Sabha: चुनावी तपिश के बीच सीता सोरेन की अग्नि परीक्षा, विपक्षी के साथ सीधी लड़ाई तो अपनों को एक मंच पर लाने की है चुनौती

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 9:45:44 AM

दुमका(DUMKA): लोकसभा चुनाव 2024 का आगाज हो चुका है. झारखंड की उपराजधानी दुमका लोकसभा क्षेत्र में अंतिम चरण में यानी 1 जून को मतदान होना है. मौसम की तपिश से जनजीवन अस्त व्यस्त है. इसके बाबजूद धीरे धीरे चुनावी तपिश भी बढ़ने लगा है.यहाँ मुख्य मुकाबला एनडीए और इंडी गठबंधन के बीच है. 

एनडीए की तरफ से भाजपा ने सीता सोरेन को मैदान में उतारा गया है तो इंडी गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में नलीन सोरेन किस्मत आजमा रहे हैं. वर्ष 2019 में इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी के रूप में सुनील सोरेन झामुमो सुप्रीमो शीबू सोरेन को पराजित कर संसद भवन पहुचे थे. लेकिन इस वर्ष के चुनाव में सीता सोरेन के लिए राह आसान नहीं दिख रहा. इसके कई वजह है. सीता सोरेन को नलीन सोरेन के साथ साथ अपनों से भी लड़ाई लड़नी होगी. 

पार्टी में गुटबाजी के बीच सभी को एक साथ लाने की है चुनौती

वैसे तो भाजपा आला कमान यह कभी स्वीकार्य नहीं करता कि दुमका भाजपा में गुटबाजी है, इसके बाबजूद राजनीति की समझ रखने वाले कहते है कि यहां भाजपा कई गुटों में बंटा हुआ है. यह गुटबाजी कोई नई नहीं है. इसके बाबजूद 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने यहां जीत का परचम लहराया था. सुनील सोरेन सांसद बने. इस वर्ष पार्टी ने पहले तो सुनील सोरेन को प्रत्याशी बनाया लेकिन बाद में सुनील सोरेन का नाम काटकर सीता सोरेन को दंगल में उतार दिया. सीता सोरेन झामुमो सुप्रीमो शीबू सोरेन की बड़ी पुत्रबधू और दुर्गा सोरेन की पत्नी है जो जामा विधानसभा से 3 टर्म विधायक रह चुकी है.

सुनील सोरेन को दरकिनार करना पड़ सकता है भारी

सुनील सोरेन के टिकट कटने पर आम लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी है की अब इस चुनाव में सुनील सोरेन की क्या भूमिका होगी. भूमिका की बात करें तो पहले बताते है कि पार्टी स्तर से उन्हें इस चुनाव में क्या जिम्मेदारी मिली है. सुनील सोरेन को राजमहल विधानसभा का प्रभारी बनाया गया है. सवाल उठता है कि 5 वर्षो तक भाजपा सुनील सोरेन को संथाल समाज का एक बड़ा चेहरा मान रही थी. हो भी क्यों नहीं! आखिर सुनील सोरेन ने दिसोम गुरु शीबू सोरेन को पराजित किया था. लेकिन सीता सोरेन के भाजपा जॉइन करते ही सुनील सोरेन का पर कतर दिया गया. टिकट तो कटा ही प्रभारी भी वैसे विधानसभा का बनाया गया है जो सीट अनारक्षित है. राजमहल सीट से अनंत ओझा विधायक हैं. अब भला सामान्य मतदाता के बीच सुनील सोरेन अपना कितना प्रभाव छोड़ पाएंगे यह चुनाव परिणाम बताएगा.

2019 में शीबू सोरेन को पराजित करने पर सुनील सोरेन को माना जाता था भाजपा का चमकता सितारा, आज स्टार प्रचारकों की सूची में भी नहीं किया गया शामिल

भाजपा द्वारा झारखंड के लिए स्टार प्रचारकों की जो सूची जारी किया गया है उसमें भी सुनील सोरेन का नाम शामिल नहीं है. जबकि संथाल परगना प्रमंडल से पूर्व मंत्री डॉ लुइस मरांडी, पूर्व मंत्री सह सारठ विधायक रणधीर सिंह, विधायक अनंत ओझा के साथ भाजपा प्रत्याशी सीता सोरेन का नाम स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल है. सुनील सोरेन की अनदेखी कहीं भाजपा को भारी ना पड़ जाए क्योंकि सुनील सोरेन सांसद बनने से पहले उसी जामा विधानसभा से एक टर्म विधायक रह चुके है जिस जामा से सीता सोरेन 3 बार विधायक चुनी गई. टिकट कटने के बाद सुनील सोरेन पार्टी के कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए हैं.

सीता सोरेन के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही पूर्व मंत्री लुइस मरांडी कब तक करेंगी कदम चाल

देखा जाए तो फिलहाल सीता सोरेन के साथ मंच से लेकर गली मोहल्ले तक पूर्व मंत्री डॉ सह पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष लुइस मरांडी सीता सोरेन के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है लेकिन यह कदम चाल कितना लंबा चलेगा बहुत कुछ यह चुनाव परिणाम पर निर्भर करेगा. देखा जाए तो डॉ लुइस मरांडी भी दुमका लोकसभा सीट से एक संभावित प्रत्याशी के रूप में विगत कई वर्षों से पूरे लोकसभा क्षेत्र में सक्रिय रही इसके बाबजूद उन्हें टिकट नहीं मिला. कल तक संथाल परगना में भाजपा नेत्री के रूप में संथाल परगना से एकलौता चेहरा लुइस मरांडी का था.

भाजपा के साथ है नरेंद्र मोदी का चेहरा और कमल निशान तो झामुमो के लिए दिसोम गुरु का चेहरा और धनुष बाण है वरदान

सीता सोरेन को झामुमो प्रत्याशी नलीन सोरेन से भी कड़ी टक्कर मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. क्योंकि जिस प्रकार भाजपा नेता यह कहते है कि देश के सभी लोक सभा सीट पर पीएम नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ते हैं. नरेंद्र मोदी का चेहरा और कमल निशान के बदौलत भाजपा को जीत मिलती है. उसी प्रकार संथाल परगना प्रमंडल की बात करें तो यहां झामुमो प्रत्याशी के लिए दिसोम गुरु शीबू सोरेन का चेहरा के साथ तीर कमान निशान वरदान साबित होता है. बढ़ती उम्र और विपरीत मौसम के बाबजूद नलीन सोरेन दिन रात पूरे लोकसभा क्षेत्र में घूम घूम कर मेहनत कर रहे हैं.

सीता के लिए अग्नि परीक्षा है यह चुनाव

कुल मिलाकर देखा जाए तो दुमका लोकसभा सीट पर दिलचस्प मुकाबला होने के संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. पार्टी के साथ परिवार से बगाबत करने वाली सीता सोरेन के लिए यह चुनाव किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है.

रिपोर्ट: पंचम झा

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