टीएनपी डेस्क (TNP DEKS): बंगाल की राजनीति अब पूरी तरह से बदल गई है. बंगाल की जनता अब सुशासन और सुरक्षा की उम्मीद कर रही है. नए मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी के लिए यह एक बड़ी चुनौती है. साथ ही यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या सुभेंदु अधिकारी ज्योति बसु और ममता बनर्जी बन पाएंगे? अथवा उनसे भी आगे निकल जाएंगें. ज्योति बसु ने 23 साल तक बंगाल पर एकछत्र "राज "किया. ममता बनर्जी 15 साल तक बंगाल में सरकार की मुखिया रही.
ज्योति बशु और ममता बनर्जी के छोड़ी है अमिट छाप
इन दोनों नेताओं ने बंगाल में अपनी अमिट छाप छोड़ रखी है. इसे तोड़कर आगे निकलना शुभेंदु अधिकारी के लिए बहुत आसान नहीं होगा. इसकी चर्चा लोग करने लगे हैं. हालांकि लोग यह भी कह रहे हैं कि बंगाल जब भी किसी को चुनता है, तो बहुत जल्द उससे किनारा नहीं करता है. ज्योति बसु और ममता बनर्जी के शासन का लोग उदाहरण दे रहे हैं. ज्योति बशु के पास शासन में स्थिरता का मंत्र था. जिसे समाप्त कर पाना कभी मुश्किल लगता था. लेकिन इसे खत्म होने में 34 साल लग गए. 2011 में जब ममता बनर्जी लाल झंडे की घेराबंदी को तोड़कर सत्ता में आई, तो उन्होंने मां माटी मानुष का नारा दिया और यह नारा खूब चला.15 साल तक वह शासन में बनी रही. उनकी सादगी भी लोगों ने खूब पसंद किया.
2026 के चुनाव में सबकुछ कैसे बदल गया
लेकिन 2026 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा और देश के इतिहास में पहली बार भाजपा का शासन बंगाल में शुरू हुआ है. शुभेंदु अधिकारी के लिए ज्योति बसु और ममता बनर्जी से आगे निकलने की बड़ी चुनौती होगी. यह अलग बात है कि शुभेंदु अधिकारी को डबल इंजन की सरकार का साथ मिलेगा. सुभेंदु अधिकारी एक अच्छे संगठनकर्ता माने जाते हैं. कार्यकर्ताओं के नाम उनकी जुबान पर होता है. भाजपा सरकार से जनता की बड़ी अपेक्षाएं हैं और इन अपेक्षाओं पर खरा उतरना बहुत आसान नहीं होगा. यह अलग बात है कि भाजपा नेतृत्व का उन्हें सहयोग और निर्देश मिलता रहेगा. केंद्र सरकार से भी उन्हें पूरी मदद मिलेगी, क्योंकि भाजपा ने बंगाल में चुनाव नहीं बल्कि सालों साल की अपनी इच्छा पूरी की है. इसके लिए भाजपा को लंबा इंतजार करना पड़ा है.