टीएनपी डेस्क (TNP DESK): बंगाल चुनाव के पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कहा कि आज मुझसे ज्यादा कोई खुश नहीं है. मैं बार-बार धैर्य रखने और न्यायाधिकरण में आवेदन करने की बात कहती रही हूं, मैं खुद इस मामले में केस दायर किया था.आज मुझे न्यायपालिका पर गर्व है. यह जनता की जीत है. दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले सर्वोच्च न्यायालय का एक फैसला आया है. संविधान के अनुच्छेद 142 का प्रयोग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि मतदाता सूची को अंतिम रूप दिए जाने के बाद भी न्यायाधिकरण द्वारा जिनके नाम फाइनल होंगे, वह मतदान कर सकेंगे.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद तृणमूल कांग्रेस में खुशी
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद तृणमूल कांग्रेस में खुशी का माहौल है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी खुश है. जानकार बताते हैं कि सामान्य नियम के अनुसार मतदाता सूची को चुनाव के निर्धारित तिथि से पहले लॉक कर दिया जाता है. इसके बाद सूची में कोई चेंज नहीं किया जा सकता. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस कानूनी बाधा को दूर कर दिया है. न्यायालय ने आदेश दिया है कि बंगाल में 21 तारीख को एक सूची जारी की जाएगी और न्यायाधिकरण 27 तारीख को अंतिम घोषणा करेगा.
बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को होने हैं चुनाव
जिन लोगों के नाम न्यायाधिकरण द्वारा स्वीकृत किए जाएंगे, उनके नाम सूची में शामिल किए जाएंगे और नई मतगणना पंजी वितरित की जाएगी. बंगाल में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है. मतदान से दो दिन पहले यानी 21 और 27 अप्रैल को यदि नाम का निपटारा होता है, तो निर्णय को लागू करना होगा. जरूरत पड़ी तो एक पूरक संशोधित मतदाता सूची भी प्रकाशित की जा सकती है. मतदान के अधिकार की मांग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में आवेदन दिया गया था. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं इस मामले में बहस करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय गई थी. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ में सुनवाई चल रही थी. इस बार सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है.