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झारखंड के इतिहास का सबसे बड़ा था कल का छात्र आंदोलन, पहली बार शहर में दिखा इतना बड़ा जनसैलाब

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

रांची (RANCHI): 10 अगस्त 2026 का दिन झारखंड के इतिहास के पन्नों में अलग जगह बना चुका है. यह दिन ना सिर्फ इसलिए खास था क्योंकि इस दिन माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का जन्मदिन था बल्कि इस दिन झारखंड के छात्रों ने उलगुलन की धरती पर अपनी एकजुटता का प्रमाण भी दिया है. इसीलिए 10 अगस्त 2026 का यह दिन झारखंड के छात्र आंदोलन के इतिहास में एक बड़े घटनाक्रम के तौर पर दर्ज हो गया. 

मामला जुड़ा है JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और परीक्षा सुधार की मांग से, जिसे लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों ने हजारों की संख्या में बीते सोमवार को विधानसभा मार्च किया था. ऐसे में देखते ही देखते यह मार्च राजधानी रांची की सड़कों पर एक बड़े जनसैलाब में बदल गया. ऐसे में बीते सोमवार की सुबह पुराने विधानसभा परिसर, धुर्वा के पास छात्र और अभ्यर्थी जुटने लगे. हाथों में तिरंगा, पोस्टर और बैनर लिए छात्र लगातार अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाते रहे. अलग-अलग जिलों से पहुंचे अभ्यर्थियों की बड़ी संख्या के कारण विधानसभा के आसपास का पूरा इलाका आंदोलन के रंग में नजर आया.

JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर छात्र पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे थे. पहले धरना, भूख हड़ताल और सरकार के साथ बातचीत का दौर चला, लेकिन कई दौर की वार्ता के बावजूद छात्रों की प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन सकी. इसी गतिरोध के बाद छात्रों ने विधानसभा मार्च का ऐलान किया था. प्रशासन ने भी मार्च को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे. विधानसभा जाने वाले प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई थी और बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी.

भूख हड़ताल के बावजूद मार्च में पहुंचे देवेंद्रनाथ महतो
आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो भी खराब स्वास्थ्य के बावजूद मार्च में पहुंचे. वह पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर थे. ऐसे में स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद भी उन्होंने आंदोलन से पीछे हटने से इनकार किया और एंबुलेंस के जरिए मार्च स्थल तक पहुंचे. उन्होंने छात्रों के बीच सरकार से मांगों पर ठोस फैसला लेने की अपील की. देवेंद्रनाथ महतो का कहना था कि केवल बातचीत और आश्वासन से आंदोलन खत्म नहीं होगा. छात्रों की मांगों पर स्पष्ट निर्णय जरूरी है.

बैरिकेडिंग टूटी तो बढ़ा तनाव
मार्च आगे बढ़ा तो पुलिस ने छात्रों को रोकने की कोशिश की. पुराने विधानसभा के आसपास और योगदा कॉलेज के पास कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए गए थे. प्रदर्शनकारियों ने कुछ बैरिकेडिंग को हटा दिया और विधानसभा की ओर आगे बढ़ने लगे. हालात को संभालने के लिए आंदोलन के प्रतिनिधियों ने भी छात्रों से संयम बरतने की अपील की. कुछ जगहों पर मानव श्रृंखला बनाकर छात्रों को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन बड़ी संख्या में मौजूद प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करना मुश्किल होता गया.  इस दौरान नारेबाजी तेज हो गई. छात्र लगातार अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाते रहे. कई जगहों पर धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी.

लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस भी चले 
स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए लाठीचार्ज किया. इसके साथ वाटर कैनन और आंसू गैस का भी इस्तेमाल किया गया. लाठीचार्ज में कुछ छात्रों के घायल होने की जानकारी सामने आई. एक छात्र के सिर में चोट लगने के बाद साथी छात्रों ने कपड़े से उसका सिर बांधकर प्राथमिक मदद की. दूसरी ओर पुलिसकर्मियों के घायल होने और प्रदर्शनकारियों की ओर से पत्थरबाजी किए जाने की भी जानकारी सामने आई. हालांकि, पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग पक्षों के अपने दावे हैं. वाटर कैनन के इस्तेमाल के बावजूद कई छात्र पीछे हटने के बजाय आगे बढ़ते रहे. कुछ स्थानों पर बैरिकेडिंग को खींचकर हटाने की कोशिश की गई. इसके बाद पुलिस ने सुरक्षा घेरा और मजबूत कर दिया.

विधानसभा गेट नंबर-1 तक पहुंचा हुजूम
दोपहर तक आंदोलनकारी छात्रों की बड़ी संख्या विधानसभा के गेट नंबर-1 के आसपास पहुंच गई. पुलिस ने यहां भी बैरिकेडिंग कर रास्ता रोक दिया. बताया गया कि राज्य के कई जिलों से आए छात्र और अभ्यर्थी इस प्रदर्शन में शामिल थे. मौके पर ADM और SDO समेत प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और छात्रों से बातचीत की कोशिश की. इस दौरान विधायक जयराम महतो भी छात्रों के बीच मौजूद रहे. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से गेट के बिल्कुल पास जाने के बजाय वहीं सड़क पर शांतिपूर्ण तरीके से धरना देने की अपील की. इसके बाद कई छात्र सड़क पर बैठ गए और धरना शुरू कर दिया. इस तरह सुबह से शुरू हुआ मार्च देर तक प्रदर्शन और धरने में बदल गया.

बता दें कि छात्रों की प्रमुख मांगों में JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करना, कथित परीक्षा अनियमितताओं की CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार शामिल हैं. छात्रों का आरोप है कि नियुक्ति परीक्षाओं की प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं. सरकार और छात्रों के बीच पहले भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है. सरकार की ओर से जांच समेत कुछ मुद्दों पर आश्वासन दिए गए, लेकिन CBI जांच और अन्य प्रमुख मांगों को लेकर अंतिम सहमति नहीं बन सकी.