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खाकी नहीं सफेद! जानिए क्यों पूरे भारत से बिल्कुल अलग है बंगाल पुलिस की वर्दी, क्या कहता है इतिहास और विज्ञान?

Rashmi Prasad CE
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खाकी नहीं सफेद! जानिए क्यों पूरे भारत से बिल्कुल अलग है बंगाल पुलिस की वर्दी, क्या कहता है इतिहास और विज्ञान?

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): भारतीय पुलिस का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में सबसे पहली छवि खाकी वर्दी की उभरती है. उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र और बिहार से लेकर तमिलनाडु तक, देश के लगभग हर राज्य की पुलिस खाकी रंग की वर्दी पहनती है. लेकिन अगर आप कभी पश्चिम बंगाल, खासकर कोलकाता जाएंगे, तो वहां का नजारा बिल्कुल अलग दिखेगा. वहां पुलिसकर्मी खाकी नहीं, बल्कि एकदम सफेद रंग की सूती वर्दी (White Uniform) में मुस्तैद नजर आते हैं.

पूरे देश से अलग दिखने वाली इस सफेद वर्दी के पीछे सिर्फ कोई परंपरा या फैशन नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बेहद गहरा ऐतिहासिक कारण और एक सटीक वैज्ञानिक लॉजिक भी छिपा हुआ है.

सफेद वर्दी के पीछे का इतिहास

इस अनोखी परंपरा की शुरुआत औपनिवेशिक काल (Colonial Era) यानी अंग्रेजों के जमाने से हुई थी. साल 1845 में ब्रिटिश सरकार ने कोलकाता पुलिस का गठन किया था. उस समय अंग्रेजों ने अपने पसंदीदा रंग 'सफेद' को पुलिस की वर्दी के लिए चुना.

खाकी की शुरुआत और बंगाल का इनकार

अंग्रेजों के समय पूरे देश में पहले पुलिस की वर्दी सफेद ही हुआ करती थी. लेकिन सफेद रंग बहुत जल्दी गंदा हो जाता था, जिसके कारण पुलिसकर्मियों को काफी परेशानी होती थी. इस समस्या को देखते हुए साल 1847 में सर हैरी लम्सडेन ने पहली बार 'खाकी' रंग की वर्दी पेश की, जो धूल-मिट्टी में जल्दी गंदी नहीं दिखती थी.

धीरे-धीरे ब्रिटिश सरकार ने पूरे भारत की पुलिस के लिए खाकी वर्दी अनिवार्य कर दी. लेकिन जब कोलकाता पुलिस की बारी आई, तो उन्होंने खाकी रंग को अपनाने से साफ इनकार कर दिया. इसके पीछे तर्क यह था कि कोलकाता एक तटीय (Coastal) इलाका है, इसलिए यहां के मौसम के हिसाब से सफेद रंग ही सबसे बेहतर है. तब से लेकर आज तक, कोलकाता पुलिस ने अपनी इस ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखा है.

 (नोट: पश्चिम बंगाल राज्य पुलिस खाकी पहनती है, लेकिन कोलकाता पुलिस और हुगली जैसे महानगरीय क्षेत्रों की पुलिस आज भी सफेद वर्दी ही पहनती है).

इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण

बंगाल पुलिस (विशेषकर कोलकाता पुलिस) की सफेद वर्दी के पीछे का वैज्ञानिक कारण वहां के भूगोल और मौसम से जुड़ा हुआ है. कोलकाता और उसके आसपास के इलाके समुद्र के करीब होने के कारण अत्यधिक उमस (Humid) और गर्मी वाले क्षेत्र हैं. विज्ञान के अनुसार, सफेद रंग सूरज की किरणों (Sunlight) और हीट को सोखने के बजाय उन्हें रिफ्लेक्ट (परावर्तित) कर देता है. इससे वर्दी के अंदर का तापमान कम बना रहता है. वहीं खाकी या अन्य गहरे रंग गर्मी को अपने अंदर सोख लेते हैं, जिससे शरीर को ज्यादा गर्मी लगती है. कोलकाता जैसी अत्यधिक उमस वाली जगह पर, जहां पुलिसकर्मियों को सड़क पर घंटों खड़े रहकर ट्रैफिक और कानून व्यवस्था संभालनी होती है, सफेद सूती (Cotton) वर्दी उन्हें लू और डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करती है.