टीएनपी डेस्क (TNP DESK): देश के तीन लाख से अधिक कोयला मजदूर अब रिटायरमेंट के दिन ही करोड़पति हो जाएंगे. कोयला खनन भविष्य निधि संगठन (सीएमपी एफ) ने इसकी पहल शुरू कर दी है. अब कर्मियों को इंतजार नहीं करना पड़ेगा. जानकारी के अनुसार इस पहल के अनुसार रिटायरमेंट के एक वर्ष पहले से ही कर्मचारियों के पीएफ और पेंशन संबंधी कागजातों की जांच शुरू कर दी जाएगी और कार्य पूरा कर लिए जाएंगे. सूत्रों के अनुसार सीएमपीएफ हेडक्वार्टर ने देशभर के अपने 23 क्षेत्रीय कार्यालय के क्षेत्रीय आयुक्तों को इससे संबंधित निर्देश जारी कर दिया है.
सीएमपीएफ में कोयला खनन से जुड़े कर्मियों का होता है काम
बता दें कि सीएमपीएफ का कार्यालय कन्याकुमारी से लेकर जम्मू और कश्मीर तक फैला है. सूत्र बताते हैं कि सीएमपीएफ में कोल इंडिया के साथ टाटा, सेल, अडानी सहित कोयला खनन करने वाली सरकारी और गैर सरकारी कंपनियों के कर्मियों को पीएफ और पेंशन का काम होता है. हर वर्ष लगभग 17000 कोयला कर्मी रिटायर करते हैं. संगठन का उद्देश्य है कि कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति होने की तिथि को ही सारे कार्य तैयार रहे और सभी लाभ उन्हें दिया जा सके. जानकारी के अनुसार कोयला उद्योग में कार्यरत कर्मचारियों का सेवाकाल लंबा होने की वजह से कई बार उन्हें एक इकाई से दूसरी इकाई में तबादला होता है. ऐसे मामलों में सेवा अभिलेख, अंशदान विवरण और नामांकन संबंधी सूचनाओं के मिलान में समय लगता है. जिसके कारण कई बार सेवानिवृत्ति के बाद पीएफ एवं पेंशन भुगतान में विलंब की शिकायतें मिलती हैं.
रिटायरमेंट के पहले ही कागजात कर लिए जाएंगे रेडी
नई व्यवस्था में सेवानिवृत्ति के एक साल पहले ही सभी संबंधित कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका, अंशदान रिकॉर्ड, नामांकन, परिवार विवरण और पेंशन पात्रता की जांच कर ली जाएगी. किसी प्रकार की त्रुटि रहने पर समय रहते उसे खत्म कर लिया जाएगा. एक अनुमान के अनुसार इस नियम से देश के लगभग साढे तीन लाख कर्मियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है. यह सभी कर्मी नियमित रूप से सीएम पीएफ में अंशदान करते हैं और सेवानिवृत्ति के बाद इसी फंड से उन्हें पीएफ तथा पेंशन मिलता है.
