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मेटा को बड़ा झटका, कोर्ट ने लगाया 5,404 करोड़ का जुर्माना

Diksha Benipuri
Diksha Benipuri
Copy Editor

TNP DESK: सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. एक ओर भारत सरकार कंपनी पर सख्ती बरत रही है, वहीं अब अमेरिका के न्यू मैक्सिको की अदालत ने भी मेटा को बड़ा झटका दिया है. अदालत ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप की पैरेंट कंपनी मेटा पर 567 मिलियन डॉलर (करीब 5,404 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया है. यह राशि राज्य के उस विशेष फंड में जमा कराई जाएगी, जिसका इस्तेमाल किशोरों की मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, न्यू मैक्सिको की फर्स्ट ज्यूडिशियल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया. अदालत का मानना है कि मेटा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का प्रभाव कई किशोरों की मानसिक सेहत पर नकारात्मक पड़ा है. कोर्ट ने आदेश दिया कि कंपनी राज्य के मानसिक स्वास्थ्य फंड में 567 मिलियन डॉलर जमा करे, ताकि प्रभावित युवाओं के इलाज और सहायता कार्यक्रमों को मजबूत किया जा सके.

यह फैसला एक लंबे ट्रायल के बाद आया. इससे पहले जूरी ने मेटा को उसके प्लेटफॉर्म्स से जुड़ी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और किशोरों के यौन शोषण से संबंधित मामलों में जिम्मेदार ठहराते हुए 375 मिलियन डॉलर का हर्जाना तय किया था. बाद में अदालत ने अंतिम आदेश में कुल जुर्माने की राशि बढ़ाकर 567 मिलियन डॉलर कर दी.

मेटा दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों में शामिल है. फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म इसी कंपनी के स्वामित्व में हैं. हालांकि, हाल के दिनों में कंपनी को अलग-अलग देशों में अपने प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद कंटेंट और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवालों का सामना करना पड़ रहा है.

भारत में भी सरकार की सख्ती जारी

भारत में भी मेटा पर सरकार की नजर बनी हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डीपफेक वीडियो, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट (CSAM) और AI से तैयार भ्रामक सामग्री को लेकर केंद्र सरकार ने कंपनी के साथ लगातार दूसरे दिन बैठक की. सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में सबसे ज्यादा चर्चा ऐसे कंटेंट की पहचान, निगरानी और उसे तेजी से हटाने की व्यवस्था पर हुई.

सरकार को मेटा ने क्या आश्वासन दिया?

बैठक के दौरान मेटा ने केंद्र सरकार को भरोसा दिलाया कि वह आपत्तिजनक और गैरकानूनी कंटेंट के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और मजबूत करेगा. कंपनी ने कहा कि कंटेंट की पहचान करने वाले सिस्टम को बेहतर बनाया जाएगा, निगरानी बढ़ाई जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वाली सामग्री को पहले से अधिक तेजी से हटाया जाएगा.

हालांकि, सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है. सरकार मेटा द्वारा उठाए गए कदमों की नियमित समीक्षा करेगी और यह भी देखेगी कि उनका वास्तविक असर कितना दिखाई देता है.

 सरकार अब भी इस बात पर कायम है कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट, डीपफेक और AI से तैयार भ्रामक सामग्री जैसे गंभीर मामलों में आपत्तिजनक कंटेंट को अधिकतम तीन घंटे के भीतर हटाया जाना चाहिए. सरकार का मानना है कि ऐसी सामग्री पर जितनी जल्दी कार्रवाई होगी, लोगों को होने वाला नुकसान उतना ही कम होगा.