TNP DESK: आज स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. फोन पर हम सिर्फ वीडियो या तस्वीरें नहीं देखते, बल्कि स्क्रीन को छूकर लगभग हर काम करते हैं. किसी ऐप को खोलना हो, फोटो को बड़ा करना हो, वेबपेज स्क्रॉल करना हो या मैसेज टाइप करना हो, हर काम उंगलियों के टच से होता है. लेकिन कभी आपने सोचा है कि फोन को आखिर कैसे पता चलता है कि आपकी उंगली स्क्रीन के किस हिस्से पर लगी है? इसके लिए स्मार्टफोन में एक खास टच-सेंसिंग तकनीक काम करती है.
स्क्रीन के अंदर छिपी होती हैं कई लेयर्स
स्मार्टफोन की स्क्रीन बाहर से देखने पर भले ही एक साधारण सपाट सतह जैसी दिखाई देती हो, लेकिन इसके अंदर कई अलग-अलग परतें होती हैं. इनमें डिस्प्ले से जुड़ी लेयर के अलावा टच को महसूस करने वाली एक विशेष सेंसिंग लेयर भी होती है. यही लेयर आपकी उंगली के संपर्क में आने पर होने वाले इलेक्ट्रिकल बदलाव को पहचानने में मदद करती है.
आधुनिक ज्यादातर स्मार्टफोन में Capacitive Touchscreen तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इस सिस्टम में स्क्रीन के अंदर बेहद पतले और पारदर्शी इलेक्ट्रोड का एक नेटवर्क मौजूद रहता है. ये इलेक्ट्रोड एक नियंत्रित इलेक्ट्रिकल फील्ड तैयार करते हैं. स्क्रीन के अलग-अलग हिस्सों में इस फील्ड की स्थिति को लगातार मॉनिटर किया जाता रहता है.
उंगली छूते ही क्या बदल जाता है?
जब स्क्रीन सामान्य स्थिति में होती है, तब टच सेंसर एक तय इलेक्ट्रिकल स्थिति में काम कर रहे होते हैं. जैसे ही आपकी उंगली स्क्रीन को छूती है, उस जगह के आसपास मौजूद इलेक्ट्रिकल फील्ड में बदलाव आता है. इसका मुख्य कारण मानव शरीर की विद्युत विशेषताएं हैं. हमारा शरीर विद्युत आवेश के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है और यही बात कैपेसिटिव टचस्क्रीन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
उंगली के स्क्रीन के संपर्क में आने पर उस क्षेत्र की capacitance यानी विद्युत धारिता में बदलाव होता है. टच कंट्रोलर इसी छोटे से बदलाव को महसूस करता है. इसके बाद वह यह निर्धारित करता है कि स्क्रीन के किस हिस्से में यह परिवर्तन हुआ है.
यानी स्मार्टफोन आपकी उंगली को कैमरे की तरह देखकर टच को पहचान नहीं रहा होता. वह वास्तव में स्क्रीन के इलेक्ट्रिकल सिग्नल में आए बदलाव को मापता है और उसी के आधार पर टच की स्थिति तय करता है.
स्क्रीन को कैसे पता चलता है कि टच कहां हुआ?
टचस्क्रीन के अंदर मौजूद इलेक्ट्रोड एक तरह का ग्रिड या नेटवर्क बनाते हैं. स्क्रीन पर जिस स्थान पर उंगली पहुंचती है, वहां के इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदलाव दर्ज होता है. टच कंट्रोलर इस बदलाव से यह पता लगाने की कोशिश करता है कि टच किस जगह हुआ है.
इसके बाद यह जानकारी स्मार्टफोन के प्रोसेसर और ऑपरेटिंग सिस्टम तक पहुंचती है. सिस्टम टच की स्थिति को X और Y coordinates के रूप में समझ सकता है. यही कारण है कि फोन यह पहचान पाता है कि आपने स्क्रीन के किस हिस्से पर टैप किया.
उदाहरण के लिए, मान लीजिए स्क्रीन के निचले हिस्से में किसी ऐप का आइकन मौजूद है और आपने उसी जगह उंगली से टैप किया. टच सेंसर पहले उस स्थान का पता लगाएगा. टच कंट्रोलर उस जानकारी को आगे प्रोसेसर तक भेजेगा. ऑपरेटिंग सिस्टम फिर उस X और Y position को स्क्रीन पर मौजूद ऐप के आइकन से जोड़ देगा और ऐप खुल जाएगा.
एक साथ कई उंगलियों को कैसे पहचानता है फोन?
आधुनिक स्मार्टफोन सिर्फ एक टच तक सीमित नहीं हैं. इनमें मल्टी-टच सपोर्ट भी होता है. यही तकनीक हमें दो या उससे अधिक उंगलियों से स्क्रीन पर अलग-अलग काम करने की सुविधा देती है. उदाहरण के लिए, फोटो को जूम करने के लिए हम दो उंगलियों को स्क्रीन पर रखकर उन्हें अलग-अलग दिशा में ले जाते हैं.
टच सिस्टम दोनों उंगलियों से पैदा हुए अलग-अलग इलेक्ट्रिकल बदलावों को पहचान सकता है. इसके बाद फोन उनके बीच की दूरी और मूवमेंट को समझकर जूम-इन या जूम-आउट जैसी कार्रवाई करता है. इसी तरह गेमिंग, ड्रॉइंग और कई अन्य ऐप्स में भी एक साथ कई टच को प्रोसेस किया जाता है.
इस तरह स्मार्टफोन की टचस्क्रीन कोई साधारण कांच की सतह नहीं है. इसके पीछे सेंसर, इलेक्ट्रोड, टच कंट्रोलर, प्रोसेसर और सॉफ्टवेयर का पूरा सिस्टम मिलकर काम करता है. हमारी उंगली से होने वाले बेहद छोटे इलेक्ट्रिकल बदलाव को पहचानकर फोन उसे एक कमांड में बदल देता है. यही वजह है कि स्क्रीन पर किया गया एक छोटा-सा टैप तुरंत किसी ऐप को खोल सकता है, फोटो को जूम कर सकता है या कोई दूसरा काम शुरू कर सकता है.
