TECHNOLOGY

AI Chatbots को बता रहे हैं अपनी हर बात? जानिए कितना बड़ा है प्राइवेसी का खतरा

Diksha Benipuri
Diksha Benipuri
Copy Editor

TNP DESK: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट्स ने हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को पहले से कहीं अधिक आसान बना दिया है. आज लोग पढ़ाई, नौकरी, बिजनेस, कंटेंट राइटिंग, कोडिंग, ट्रैवल प्लानिंग और यहां तक कि स्वास्थ्य से जुड़े सामान्य सवालों के जवाब पाने के लिए भी AI का इस्तेमाल कर रहे हैं. कुछ ही सेकंड में जानकारी उपलब्ध होने के कारण इनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. हालांकि, इस सुविधा के साथ डेटा प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं. कई लोग अनजाने में AI चैटबॉट्स के साथ ऐसी निजी जानकारी साझा कर देते हैं, जो भविष्य में उनके लिए जोखिम पैदा कर सकती है.

क्यों बढ़ रही है प्राइवेसी की चिंता?

आज बड़ी संख्या में लोग AI चैटबॉट्स को सिर्फ एक डिजिटल टूल नहीं, बल्कि अपनी समस्याएं साझा करने वाले साथी की तरह इस्तेमाल करने लगे हैं. कई बार लोग बातचीत के दौरान अपना मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, बैंकिंग डिटेल्स, आधार या पैन नंबर, मेडिकल रिपोर्ट, ऑफिस के गोपनीय दस्तावेज और निजी बातचीत तक साझा कर देते हैं. ऐसी जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज होने से उसकी सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है. इसलिए यह समझना जरूरी है कि AI से बातचीत करते समय कौन-सी जानकारी साझा करनी चाहिए और कौन-सी नहीं.

हर AI प्लेटफॉर्म की नीति अलग होती है

यह मान लेना सही नहीं होगा कि सभी AI सेवाएं एक जैसी हैं. अलग-अलग प्लेटफॉर्म की डेटा हैंडलिंग और प्राइवेसी पॉलिसी अलग हो सकती है. कुछ सेवाएं उपयोगकर्ता की अनुमति मिलने पर बातचीत का उपयोग अपने सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए कर सकती हैं, जबकि कई प्लेटफॉर्म चैट हिस्ट्री बंद करने, डेटा हटाने या प्राइवेसी कंट्रोल के विकल्प भी उपलब्ध कराते हैं. यही कारण है कि किसी भी AI सेवा का इस्तेमाल करने से पहले उसकी प्राइवेसी पॉलिसी और उपलब्ध सेटिंग्स को समझना जरूरी है.

कौन-सी जानकारी साझा करने से बचें?

विशेषज्ञों का मानना है कि AI चैटबॉट्स के साथ कभी भी पासवर्ड, OTP, बैंक अकाउंट नंबर, डेबिट या क्रेडिट कार्ड की जानकारी, UPI PIN, आधार नंबर, पैन नंबर या पासपोर्ट जैसी संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए. इसके अलावा मेडिकल रिकॉर्ड, कानूनी दस्तावेज, कंपनी के गोपनीय कागजात और क्लाइंट डेटा भी AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने से बचना चाहिए. यदि किसी दस्तावेज पर AI की मदद लेनी हो, तो पहले उसमें मौजूद व्यक्तिगत जानकारी हटाना बेहतर विकल्प माना जाता है.

ऑफिस और बिजनेस में भी जरूरी है सावधानी

कॉर्पोरेट जगत में AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है. कर्मचारी ईमेल लिखने, रिपोर्ट तैयार करने, डेटा का विश्लेषण करने और प्रेजेंटेशन बनाने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन अगर कोई कर्मचारी बिना अनुमति के कंपनी के गोपनीय दस्तावेज या ग्राहकों की निजी जानकारी AI चैटबॉट में साझा कर देता है, तो इससे डेटा लीक होने का खतरा पैदा हो सकता है. इसी वजह से कई कंपनियों ने AI के सुरक्षित उपयोग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और आंतरिक नीतियां लागू की हैं.

साइबर अपराधी कैसे उठा सकते हैं फायदा?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट पर जरूरत से ज्यादा निजी जानकारी साझा करना हमेशा जोखिम भरा होता है. यदि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो जाती है, तो उसका इस्तेमाल फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी कॉल, पहचान की चोरी और ऑनलाइन ठगी जैसी गतिविधियों में किया जा सकता है. AI चैटबॉट्स स्वयं इस तरह की घटनाओं का कारण नहीं होते, लेकिन उपयोगकर्ता की असावधानी साइबर अपराधियों के लिए अवसर जरूर बना सकती है.

सुरक्षित तरीके से करें AI का इस्तेमाल

AI का उपयोग करते समय सबसे जरूरी बात यह है कि केवल वही जानकारी साझा करें, जो किसी सवाल का जवाब पाने के लिए आवश्यक हो. यदि किसी दस्तावेज या रिपोर्ट पर AI की मदद लेनी हो, तो उसमें मौजूद नाम, पता, फोन नंबर, बैंकिंग डिटेल्स और अन्य पहचान संबंधी जानकारी पहले हटा दें. साथ ही समय-समय पर AI प्लेटफॉर्म की प्राइवेसी सेटिंग्स की समीक्षा करें और केवल भरोसेमंद सेवाओं का ही इस्तेमाल करें. AI द्वारा दी गई जानकारी को भी जरूरत पड़ने पर विश्वसनीय स्रोतों से सत्यापित करना एक अच्छी आदत है.

सुविधा के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी

AI चैटबॉट्स आधुनिक तकनीक का एक बेहद उपयोगी माध्यम हैं. वे समय बचाते हैं, काम आसान बनाते हैं और कई मामलों में उत्पादकता बढ़ाने में मदद करते हैं. लेकिन यह भी याद रखना जरूरी है कि अपनी निजी और संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा की जिम्मेदारी अंततः उपयोगकर्ता की ही होती है. यदि AI का इस्तेमाल समझदारी के साथ किया जाए, केवल जरूरी जानकारी साझा की जाए और प्राइवेसी सेटिंग्स पर ध्यान दिया जाए, तो इस तकनीक का लाभ पूरी तरह सुरक्षित तरीके से उठाया जा सकता है. डिजिटल दौर में थोड़ी-सी सावधानी आपकी व्यक्तिगत जानकारी को बड़े खतरे से बचा सकती है.