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Gen Z पर चढ़ा 80s का क्रेज, पर क्या हर ट्रेंड को फॉलो करना सही?

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): सोशल मीडिया की दुनिया में इन दिनों पुराना दौर नए अंदाज में लौट रहा है. कहीं 80s स्टाइल के कपड़े दिखाई दे रहे हैं, तो कहीं पुराने फिल्मी पोस्टर जैसा लुक. विंटेज हेयरस्टाइल, ओवरसाइज कपड़े, रेट्रो चश्मे और पुरानी तस्वीरों जैसा फिल्टर Gen Z को खूब पसंद आ रहा है. AI की मदद से लोग अपनी तस्वीरों को 70s और 80s के फिल्मी सितारों जैसा बना रहे हैं. लेकिन ट्रेंड का हिस्सा बनने की इस दौड़ में एक सवाल पीछे छूट जाता है कि क्या हर वायरल ट्रेंड को फॉलो करना जरूरी है?

मामला केवल पसंद या फैशन का नहीं है. कई ऑनलाइन ट्रेंड आपकी निजी जानकारी यानी Privacy के लिए भी खतरा बन सकते हैं.

80s का स्टाइल क्यों पसंद कर रही Gen Z?

आज की युवा पीढ़ी उस दौर के फैशन को अपना रही है, जिसे उसने खुद देखा तक नहीं. सोशल मीडिया पर पुराने गाने दोबारा वायरल हो रहे हैं. रेट्रो कैमरा फिल्टर और विंटेज कपड़े नई पहचान बना रहे हैं.

इसके पीछे nostalgia के साथ कुछ अलग दिखने की चाह भी है. जब कोई सेलिब्रिटी या बड़ा सोशल मीडिया क्रिएटर किसी ट्रेंड को अपनाता है, तो हजारों लोग वैसा ही करने लगते हैं. धीरे-धीरे वही चीज वायरल ट्रेंड बन जाती है.

समस्या तब शुरू होती है, जब ट्रेंड में बने रहने के लिए लोग बिना सोचे अपनी निजी तस्वीरें और जानकारियां अनजान वेबसाइट या ऐप पर शेयर करने लगते हैं.

वायरल होने की चाह में कहां खतरे में पड़ती है Privacy?

मान लीजिए सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड चल रहा है जिसमें पूछा जाता है कि "आप 80s में कैसे दिखते?" इसके लिए कोई AI वेबसाइट आपसे अपनी साफ तस्वीर अपलोड करने को कहती है. आप फोटो देते हैं और कुछ सेकेंड में रेट्रो तस्वीर तैयार हो जाती है.

लेकिन क्या आपने यह देखा कि आपकी ओरिजिनल फोटो का आगे क्या होगा? वह कितने समय तक कंपनी के सर्वर पर रहेगी? क्या उसका इस्तेमाल AI को ट्रेन करने के लिए हो सकता है? क्या वह किसी तीसरे पक्ष के साथ शेयर होगी?

यही जगह है जहां सावधानी जरूरी हो जाती है.

खतरा केवल AI फोटो तक सीमित नहीं है. "अपनी पहली तस्वीर दिखाएं", "बचपन की फोटो शेयर करें", "आपका पहला स्कूल कौन सा था", "अपने पेट का नाम बताएं" या "10 साल पहले आप कैसे दिखते थे" जैसे ट्रेंड देखने में मजेदार लग सकते हैं. लेकिन कई बार इनके जरिए ऐसी व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक हो जाती है, जिसका इस्तेमाल पासवर्ड रिकवरी या सिक्योरिटी सवालों में भी किया जाता है.

लोकेशन से घर तक की जानकारी हो सकती है सार्वजनिक

फोटो और वीडियो पोस्ट करते समय बैकग्राउंड पर ध्यान नहीं देना भी परेशानी पैदा कर सकता है. घर का नंबर, गाड़ी की नंबर प्लेट, ऑफिस या स्कूल का नाम, फ्लाइट टिकट, बोर्डिंग पास और रोजाना आने-जाने वाली जगह जैसी जानकारी अनजाने में सार्वजनिक हो सकती है.

अगर कोई व्यक्ति लगातार अपनी लाइव लोकेशन और दिनचर्या पोस्ट करता है तो अनजान लोगों को भी उसके आने-जाने के समय का अंदाजा मिल सकता है.

ट्रेंड फॉलो करें, लेकिन एक सवाल जरूर पूछें

इसका मतलब यह नहीं कि हर सोशल मीडिया ट्रेंड खराब है. 80s फैशन अपनाना हो, पुराने गानों पर Reel बनानी हो या AI से रेट्रो तस्वीर बनानी हो, इनका आनंद लिया जा सकता है. जरूरत बस इतनी है कि पोस्ट करने से पहले कुछ सेकेंड सोचा जाए.

किसी अनजान ऐप को फोटो देने से पहले उसकी Privacy Policy और permissions देखें. फोन नंबर, पता, दस्तावेज, लाइव लोकेशन और परिवार से जुड़ी निजी जानकारी वायरल ट्रेंड के लिए शेयर न करें.

सोशल मीडिया पर ट्रेंड आज है और शायद कुछ दिनों बाद गायब हो जाएगा. लेकिन इंटरनेट पर छोड़ी गई आपकी निजी जानकारी उससे कहीं ज्यादा समय तक रह सकती है. इसलिए ट्रेंड जरूर फॉलो करें, मगर अपनी Privacy की कीमत पर नहीं.