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टेलीग्राम पर कार्रवाई और WhatsApp सुरक्षित, आखिर दोनों प्लेटफॉर्म में ऐसा क्या है फर्क?

Saumya Shukla
Senior News Publisher • TheNewsPost.in
टेलीग्राम पर कार्रवाई और WhatsApp सुरक्षित, आखिर दोनों प्लेटफॉर्म में ऐसा क्या है फर्क?

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): भारत में NEET UG परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक मामले के बाद टेलीग्राम एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है. सरकार ने 22 जून 2026 तक इस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. इस कदम के बाद कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर टेलीग्राम पर कार्रवाई क्यों हुई, जबकि WhatsApp जैसे दूसरे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप्स पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया. इसका जवाब दोनों प्लेटफॉर्म की तकनीकी संरचना और काम करने के तरीके में छिपा हुआ है.

हालांकि टेलीग्राम और WhatsApp दोनों ही मैसेज भेजने, फोटो शेयर करने और वीडियो कॉल जैसी सुविधाएं देते हैं, लेकिन उनकी बुनियादी कार्यप्रणाली काफी अलग है. WhatsApp मुख्य रूप से निजी बातचीत के लिए विकसित किया गया प्लेटफॉर्म है, जबकि टेलीग्राम को बड़े स्तर पर सूचना साझा करने और विशाल समुदायों को जोड़ने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है.

टेलीग्राम की सबसे बड़ी खासियत इसका क्लाउड आधारित सिस्टम है. यहां उपयोगकर्ताओं की चैट, फाइलें और दस्तावेज ऑनलाइन सर्वर पर सुरक्षित रहते हैं. इसका फायदा यह है कि कोई भी व्यक्ति किसी नए मोबाइल, टैबलेट या कंप्यूटर से लॉगिन करके तुरंत अपना पूरा डेटा एक्सेस कर सकता है. इसी सुविधा के कारण बड़ी मात्रा में जानकारी और फाइलों का आदान-प्रदान बेहद आसान हो जाता है.

इसके उलट WhatsApp का अधिकांश डेटा उपयोगकर्ता के डिवाइस पर ही स्टोर होता है. हालांकि क्लाउड बैकअप की सुविधा मौजूद है, लेकिन वह वैकल्पिक है. इसलिए किसी गतिविधि के डिजिटल निशान डिवाइस में मौजूद रहने की संभावना अधिक होती है, जिससे जांच एजेंसियों को कई मामलों में मदद मिल सकती है.

दोनों प्लेटफॉर्म के बीच एक बड़ा अंतर पहचान प्रणाली का भी है. टेलीग्राम में यूजरनेम के जरिए लोग बिना मोबाइल नंबर साझा किए एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं. इससे उपयोगकर्ताओं की पहचान अपेक्षाकृत अधिक निजी बनी रहती है. दूसरी ओर WhatsApp पूरी तरह मोबाइल नंबर आधारित व्यवस्था पर काम करता है. किसी से संपर्क करने या समूह में शामिल होने के लिए नंबर जरूरी होता है, जिससे पहचान करना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है.

टेलीग्राम के चैनल और सुपरग्रुप फीचर्स भी इसे अलग बनाते हैं. एक चैनल एडमिन लाखों लोगों तक एक साथ संदेश, वीडियो, दस्तावेज और अन्य सामग्री पहुंचा सकता है. जानकारी का प्रसार कुछ ही मिनटों में बड़े स्तर पर हो सकता है. इसके विपरीत WhatsApp में समूह और ब्रॉडकास्ट सुविधाओं पर विभिन्न सीमाएं लागू हैं, जिससे एक साथ बहुत बड़ी संख्या में लोगों तक सामग्री पहुंचाना अपेक्षाकृत कठिन होता है.

एक और महत्वपूर्ण अंतर दोनों कंपनियों की प्रशासनिक संरचना में है. WhatsApp, Meta समूह का हिस्सा है, जिसके दुनिया के कई देशों में कार्यालय और कानूनी टीमें मौजूद हैं. सरकारें जरूरत पड़ने पर कंपनी से सीधे संपर्क कर सकती हैं. वहीं टेलीग्राम खुद को काफी हद तक विकेंद्रीकृत तरीके से संचालित करता है और कई देशों में स्थायी स्थानीय कार्यालय रखने से बचता है. यही कारण है कि कई बार सरकारों के लिए उस पर प्रभावी निगरानी या दबाव बनाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि टेलीग्राम और WhatsApp दोनों के अपने-अपने उपयोग हैं. WhatsApp जहां व्यक्तिगत और पारिवारिक संवाद के लिए अधिक लोकप्रिय है, वहीं टेलीग्राम बड़े नेटवर्क, गोपनीयता और व्यापक सूचना प्रसार के लिए जाना जाता है. यही तकनीकी और संरचनात्मक अंतर दोनों प्लेटफॉर्म को एक-दूसरे से पूरी तरह अलग बनाता है और मौजूदा विवाद में भी यही अंतर सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है.