TNP DESK: भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एफआईएच प्रो लीग 2025-26 का समापन शानदार प्रदर्शन के साथ किया. टीम ने मौजूदा विश्व चैंपियन जर्मनी और पेरिस ओलंपिक 2024 की स्वर्ण पदक विजेता नीदरलैंड्स जैसी मजबूत टीमों को हराकर अपनी तैयारियों का दम दिखाया. वहीं विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर मौजूद इंग्लैंड के खिलाफ भी भारतीय टीम ने कड़ी चुनौती पेश की. इस प्रदर्शन ने साफ संकेत दिया है कि टीम बड़े टूर्नामेंटों से पहले सही समय पर अपनी सर्वश्रेष्ठ लय हासिल कर रही है.
भारत का अभियान आसान नहीं रहा. राउरकेला में खेले गए शुरुआती चरण में टीम को बेल्जियम और अर्जेंटीना के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा. इन मुकाबलों के बाद टीम प्रबंधन ने अपनी कमियों पर काम शुरू किया और प्रदर्शन में लगातार सुधार देखने को मिला.
इसके बाद होबार्ट चरण में भारतीय टीम ने वापसी के संकेत दिए. स्पेन के खिलाफ शुरुआती मुकाबला हारने के बावजूद टीम ने ऑस्ट्रेलिया और स्पेन के खिलाफ ड्रॉ मुकाबले खेले. हालांकि दोनों मैचों के शूटआउट में जीत नहीं मिल सकी, लेकिन अंतिम मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शूटआउट जीतकर टीम ने आत्मविश्वास हासिल किया. इस चरण में भारतीय रक्षा पंक्ति काफी मजबूत नजर आई और चार मैचों में केवल छह गोल ही खाए.
यूरोप चरण में पहुंचते-पहुंचते भारतीय टीम का खेल पूरी तरह बदल चुका था. रॉटरडैम में भारत ने जर्मनी को 3-1 और नीदरलैंड्स को 3-2 से हराकर टूर्नामेंट की सबसे यादगार जीत दर्ज की. चार मुकाबलों में टीम ने नौ गोल किए, जिनमें अधिकांश गोल ओपन प्ले से आए. इससे स्पष्ट हुआ कि भारतीय टीम अब केवल पेनाल्टी कॉर्नर पर निर्भर नहीं है, बल्कि खुले खेल में भी लगातार गोल करने में सक्षम है.
लंदन चरण में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन जारी रखा. पाकिस्तान के खिलाफ दोनों मुकाबले जीतने के साथ एक मैच में 7-1 की बड़ी जीत दर्ज की. वहीं इंग्लैंड के खिलाफ दोनों मुकाबले निर्धारित समय तक बराबरी पर रहे और एक मैच का शूटआउट भारत ने अपने नाम किया. इस चरण में टीम ने कुल 13 गोल किए, जिनमें सात फील्ड गोल, पांच पेनाल्टी कॉर्नर और एक पेनाल्टी स्ट्रोक से आया. दूसरी ओर, चार मैचों में केवल छह गोल ही विपक्षी टीमों को करने दिए गए.
टीम की सबसे बड़ी ताकत उसका सामूहिक प्रदर्शन रहा. दिलप्रीत सिंह और जुगराज सिंह ने चार-चार गोल किए, जबकि अभिषेक, सुखजीत सिंह और नीलकांत शर्मा ने तीन-तीन गोल दागे. इससे यह साबित हुआ कि टीम अब किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं है और कई खिलाड़ी अहम मौकों पर योगदान दे रहे हैं.
मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने कहा कि प्रो लीग के दौरान टीम का आत्मविश्वास लगातार बढ़ा है. उनके अनुसार जर्मनी और नीदरलैंड्स जैसी मजबूत टीमों पर जीत तथा इंग्लैंड के खिलाफ प्रभावशाली प्रदर्शन यह दर्शाता है कि भारतीय टीम अपनी रणनीति पर अमल करते हुए दुनिया की किसी भी टीम को चुनौती दे सकती है. उन्होंने कहा कि विश्व कप और एशियाई खेलों से पहले यह प्रदर्शन सकारात्मक संकेत है, हालांकि टीम अभी भी अपने खेल को और बेहतर बनाने पर काम कर रही है.
भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने भी टीम के प्रदर्शन पर संतोष जताया. उन्होंने कहा कि दुनिया की शीर्ष टीमों के खिलाफ मिली सफलताओं ने खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाया है. उनके अनुसार टीम की रक्षा पंक्ति, मिडफील्ड और आक्रमण तीनों विभागों ने संतुलित प्रदर्शन किया है, जिससे आगे आने वाले बड़े टूर्नामेंटों के लिए टीम का भरोसा मजबूत हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि अभी कुछ क्षेत्रों में सुधार की गुंजाइश है और टीम उसी दिशा में मेहनत कर रही है.
हालांकि अंतिम अंक तालिका भारतीय टीम के पूरे अभियान की कहानी नहीं बताती, लेकिन प्रो लीग के दौरान टीम के प्रदर्शन में लगातार आया सुधार यह साबित करता है कि भारत विश्व कप और एशियाई खेलों से पहले सही दिशा में आगे बढ़ रहा है. यूरोप में मिली सफलता ने खिलाड़ियों को आत्मविश्वास, अनुभव और नई ऊर्जा दी है, जो आने वाले बड़े मुकाबलों में टीम के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है.
