टिएनपी डेस्क (TNP DESK): क्रिकेट की दुनिया में एशिया कप का अपना अलग ही महत्व है. भारत और पाकिस्तान की भिड़ंत हो या श्रीलंका और बांग्लादेश की टक्कर, इस टूर्नामेंट में एशियाई क्रिकेट की बड़े मुकाबले देखने को मिलते हैं. लेकिन जब भी एशिया कप का आयोजन होता है, क्रिकेट फैंस के मन में एक सवाल जरूर आता है. आखिर ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी बड़ी टीमें इस टूर्नामेंट में क्यों नहीं खेलतीं. क्या उन्हें इसमें खेलने की अनुमति नहीं है या फिर वे खुद हिस्सा नहीं लेना चाहतीं.
इस सवाल का जवाब समझने के लिए एशिया कप के इतिहास और इसके आयोजन की व्यवस्था को समझना जरूरी है.
एशिया कप की शुरुआत कैसे हुई
एशिया कप की शुरुआत साल 1984 में हुई थी. इसके पीछे मकसद एशियाई देशों के बीच क्रिकेट को बढ़ावा देना और क्षेत्र की टीमों को एक-दूसरे के खिलाफ खेलने के लिए एक बड़ा मंच देना था.
इससे पहले एशिया में भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसी टीमों के बीच मुकाबले तो होते थे, लेकिन कोई ऐसा नियमित क्षेत्रीय टूर्नामेंट नहीं था, जिसमें एशिया की प्रमुख क्रिकेट टीमें एक साथ हिस्सा लें. इसी जरूरत को देखते हुए Asian Cricket Council यानी ACC की भूमिका महत्वपूर्ण बनी.
ACC का गठन 1983 में एशियाई देशों में क्रिकेट को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था. इसके बाद 1984 में पहला एशिया कप खेला गया. शुरुआत में भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसी टीमें इसका हिस्सा बनीं. धीरे-धीरे एशिया के दूसरे क्रिकेट देशों को भी इस टूर्नामेंट से जोड़ा गया.
ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड क्यों नहीं खेलते
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड दुनिया की बड़ी क्रिकेट टीमें हैं तो उन्हें एशिया कप में क्यों नहीं शामिल किया जाता.
इसकी सबसे बड़ी वजह है कि एशिया कप एक क्षेत्रीय टूर्नामेंट है और इसका आयोजन Asian Cricket Council के तहत होता है. ACC एशिया में क्रिकेट को संचालित और विकसित करने वाला क्षेत्रीय संगठन है. भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे देश इसके क्रिकेट ढांचे का हिस्सा हैं.
वहीं इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया ACC के सदस्य नहीं हैं. इंग्लैंड यूरोपियन क्रिकेट क्षेत्र से जुड़ा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया को ICC के East Asia-Pacific क्षेत्र में रखा जाता है. इसलिए दोनों देशों की राष्ट्रीय टीमें एशिया कप में नियमित रूप से हिस्सा नहीं लेतीं.
यानी इसकी वजह यह नहीं है कि ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड एशिया कप खेलने में दिलचस्पी नहीं रखते. असल बात यह है कि यह प्रतियोगिता मुख्य रूप से एशियाई क्रिकेट टीमों के लिए बनाई गई है.
फिर अफगानिस्तान कैसे बना हिस्सा
एशिया कप सिर्फ भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका तक सीमित नहीं रहा. समय के साथ एशिया के दूसरे देशों में क्रिकेट मजबूत हुआ और उन्हें भी इस प्रतियोगिता में जगह मिलने लगी.
अफगानिस्तान इसका बड़ा उदाहरण है. देश में क्रिकेट के तेजी से विकास के बाद उसकी राष्ट्रीय टीम ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी जगह बनाई. अफगानिस्तान ने 2014 में पहली बार एशिया कप में हिस्सा लिया.
इसके बाद टीम ने कई मौकों पर बड़ी टीमों को कड़ी चुनौती दी. इससे यह भी साफ होता है कि एशिया कप का उद्देश्य सिर्फ पारंपरिक बड़ी टीमों को मंच देना नहीं है, बल्कि एशियाई क्रिकेट को आगे बढ़ाना भी है.
यह पूरी तरह प्रतियोगिता के नियम और ACC के फैसले पर निर्भर करेगा. अगर भविष्य में एशिया कप का प्रारूप बदला जाता है या किसी टीम को विशेष रूप से आमंत्रित करने का फैसला होता है तो परिस्थितियां अलग हो सकती हैं.
हालांकि, मौजूदा व्यवस्था में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड का नियमित रूप से एशिया कप में खेलना संभव नहीं है. दोनों टीमों का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर भी काफी व्यस्त रहता है. टेस्ट सीरीज, वनडे और टी20 सीरीज के अलावा ICC टूर्नामेंट और घरेलू क्रिकेट के कारण खिलाड़ियों के पास सीमित समय होता है.
लेकिन यह समझना जरूरी है कि व्यस्त शेड्यूल उनकी गैरमौजूदगी की मुख्य वजह नहीं है. मुख्य कारण एशिया कप का क्षेत्रीय स्वरूप और ACC की सदस्यता व्यवस्था है.
एशिया कप में भारत-पाकिस्तान मुकाबला क्यों है खास
एशिया कप की लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबले भी हैं. दोनों देशों के बीच क्रिकेट मैचों को लेकर दुनियाभर में काफी उत्सुकता रहती है.
इसके अलावा श्रीलंका, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसी टीमों ने भी टूर्नामेंट को काफी प्रतिस्पर्धी बनाया है. यही वजह है कि एशिया कप सिर्फ एक सामान्य क्षेत्रीय प्रतियोगिता नहीं रह गया है, बल्कि एशियाई क्रिकेट के सबसे बड़े मंचों में शामिल हो चुका है.
दुनिया की बड़ी टीमें फिर कहां भिड़ती हैं
अगर क्रिकेट फैंस ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी टीमों को भारत या पाकिस्तान के खिलाफ देखना चाहते हैं तो इसके लिए ICC के बड़े टूर्नामेंट सबसे बड़ा मंच हैं. वनडे वर्ल्ड कप, टी20 वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंटों में दुनिया की प्रमुख टीमें एक-दूसरे के खिलाफ खेलती हैं.
इसके अलावा द्विपक्षीय सीरीज और दूसरे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भी इन टीमों के बीच मुकाबले होते रहते हैं.
इसलिए ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड का एशिया कप में नहीं खेलना किसी तरह की कमी या टीम की क्षमता से जुड़ा मामला नहीं है. यह पूरी तरह टूर्नामेंट के क्षेत्रीय स्वरूप से जुड़ा है.
आसान भाषा में समझिए पूरा मामला
सीधे शब्दों में कहें तो एशिया कप एशियाई क्रिकेट टीमों के लिए आयोजित होने वाला क्षेत्रीय टूर्नामेंट है. इसे Asian Cricket Council के तहत आयोजित किया जाता है. भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसी टीमें इसी क्रिकेट क्षेत्र का हिस्सा हैं.
दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड ACC के सदस्य नहीं हैं. ऑस्ट्रेलिया अलग ICC क्षेत्र से और इंग्लैंड यूरोपियन क्रिकेट क्षेत्र से जुड़ा है. इसलिए दुनिया की बड़ी टीम होने के बावजूद दोनों एशिया कप में नियमित रूप से नहीं खेलतीं.
यानी अगली बार जब एशिया कप में ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड की कमी महसूस हो तो वजह याद रखिए. यह टूर्नामेंट दुनिया की सभी बड़ी टीमों के लिए नहीं, बल्कि एशियाई क्रिकेट को एक मंच देने के लिए बनाया गया है.