टिएनपी डेस्क(TNP DESK): मैदान क्रिकेट का हो, हॉकी का या फुटबॉल का, भारतीय खिलाड़ी जब नीली जर्सी पहनकर उतरते हैं तो दूर से ही टीम इंडिया की पहचान हो जाती है. क्रिकेट में 'Men in Blue' और 'Women in Blue' जैसे नाम काफी फेमस हैं, लेकिन नीला रंग केवल भारतीय क्रिकेट तक सीमित नहीं है. भारत की हॉकी और फुटबॉल टीमों समेत कई खेलों में नीले रंग की जर्सी लंबे समय से इस्तेमाल होती रही है. धीरे-धीरे यह रंग अंतरराष्ट्रीय खेलों में भारत की पहचान बन गया.
लेकिन सवाल यह है कि जब भारत के राष्ट्रीय ध्वज में केसरिया, सफेद और हरा तीन प्रमुख रंग हैं, तो भारतीय टीमों की जर्सी में नीला रंग इतना खास कैसे बन गया?
क्रिकेट ही नहीं, कई खेलों में दिखता है नीला रंग
भारतीय क्रिकेट टीम की नीली जर्सी सबसे ज्यादा चर्चा में रहती है. खासकर वनडे और टी20 क्रिकेट में नीला रंग टीम इंडिया की पहचान बन चुका है. 1990 के दशक से अलग-अलग शेड और डिजाइन में भारतीय क्रिकेट टीम नीली जर्सी पहनती रही है. 2007 टी20 वर्ल्ड कप और 2011 वनडे वर्ल्ड कप जैसी यादगार जीत ने नीली जर्सी को भारतीय फैंस की भावनाओं से और गहराई से जोड़ दिया.
लेकिन कहानी सिर्फ क्रिकेट की नहीं है. भारतीय हॉकी टीम भी लंबे समय से नीले रंग की जर्सी में नजर आती रही है. पुरुष और महिला हॉकी टीमों की किट में नीले रंग के साथ तिरंगे के रंगों का इस्तेमाल भी देखने को मिलता है.
भारतीय फुटबॉल टीम की पहचान भी नीली जर्सी से जुड़ी हुई है. इसी कारण भारतीय फुटबॉल टीम को 'Blue Tigers' के नाम से जाना जाता है. महिला फुटबॉल टीम के लिए 'Blue Tigresses' नाम भी इस्तेमाल किया जाता है.
कबड्डी समेत दूसरे अंतरराष्ट्रीय और मल्टी-स्पोर्ट टूर्नामेंट में भी भारतीय खिलाड़ियों की किट में अक्सर नीले रंग को प्रमुखता मिलती है. हालांकि हर खेल और हर प्रतियोगिता में जर्सी का रंग एक जैसा होना जरूरी नहीं है. कई मौकों पर भारतीय खिलाड़ी केसरिया, सफेद या दूसरे रंग की वैकल्पिक किट में भी नजर आते हैं.
आखिर नीला रंग ही क्यों बना भारत की पहचान?
इस सवाल का जवाब केवल एक कारण में नहीं छिपा है. भारत के राष्ट्रीय ध्वज के बीच में मौजूद अशोक चक्र का रंग नेवी ब्लू है. इसलिए नीले रंग का भारत की राष्ट्रीय पहचान से पहले से एक संबंध है. हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि सभी भारतीय खेल टीमों की जर्सी सिर्फ अशोक चक्र की वजह से ही नीली रखी गई.
अलग-अलग खेल अपनी किट और डिजाइन तय करते हैं. समय के साथ नीला रंग भारतीय टीमों के लिए इतना पहचाना जाने लगा कि इसे लगातार इस्तेमाल किया जाने लगा. अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भी इससे भारत को एक अलग विजुअल पहचान मिली.
डिजाइन बदलता रहा, लेकिन नीले से रिश्ता कायम
भारतीय टीमों की जर्सी वर्षों में कई बार बदली है. कभी आसमानी नीला दिखाई दिया तो कभी गहरा नेवी ब्लू. कभी जर्सी पर केसरिया और हरे रंग की पट्टियां आईं तो कभी तिरंगे को कंधों और कॉलर के आसपास जगह मिली.
खास बात यह है कि डिजाइन और किट बनाने वाली कंपनियां बदलती रहीं, लेकिन कई प्रमुख टीम खेलों में नीले रंग की मौजूदगी बनी रही.
आज नीली जर्सी केवल खिलाड़ियों की यूनिफॉर्म नहीं रह गई है. बड़े मुकाबलों में स्टेडियम में हजारों भारतीय समर्थक भी नीली जर्सी पहनकर पहुंचते हैं. क्रिकेट में 'Bleed Blue', फुटबॉल में 'Blue Tigers' और दूसरे खेलों में नीली किट ने इस रंग को भारतीय खेल संस्कृति का हिस्सा बना दिया है.
इसलिए मैदान कोई भी हो, नीली जर्सी में खिलाड़ी और उसके सीने पर भारत का नाम दिखाई देते ही पहचान साफ हो जाती है. वर्षों की जीत, हार, संघर्ष और यादगार पलों ने इस रंग को भारतीय खेलों से ऐसा जोड़ा कि आज नीला रंग टीम इंडिया की सबसे मजबूत खेल पहचान में से एक बन चुका है.