टिएनपी डेस्क (TNP DESK): साल 2028 में होने वाले लॉस एंजिल्स ओलंपिक यानी LA28 में खेलों की तस्वीर थोड़ी अलग नजर आएगी. इस बार पांच खेलों को ओलंपिक कार्यक्रम में शामिल किया गया है. इनमें क्रिकेट, बेसबॉल/सॉफ्टबॉल, फ्लैग फुटबॉल, लैक्रोस और स्क्वैश शामिल हैं. इनमें क्रिकेट, बेसबॉल, सॉफ्टबॉल और लैक्रोस की ओलंपिक में वापसी होगी, जबकि फ्लैग फुटबॉल और स्क्वैश पहली बार ओलंपिक का हिस्सा बनेंगे.
भारत के लिए इनमें सबसे ज्यादा उम्मीद क्रिकेट से जुड़ी है. लेकिन बाकी खेल भी भारतीय खिलाड़ियों के लिए नए मौके खोल सकते हैं.
क्रिकेट की होगी सबसे ज्यादा चर्चा
क्रिकेट की ओलंपिक में वापसी भारत के लिए सबसे बड़ा मौका है. क्रिकेट आखिरी बार 1900 के पेरिस ओलंपिक में खेला गया था. LA28 में क्रिकेट T20 फॉर्मेट में होगा. पुरुष और महिला दोनों वर्गों में छह-छह टीमों का टूर्नामेंट होगा.
भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता को देखते हुए यह खेल देश के लिए पदक की बड़ी उम्मीद बन सकता है. अगर भारतीय पुरुष और महिला टीमें क्वालिफाई करती हैं तो ओलंपिक में क्रिकेट को लेकर भारत में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल सकता है.
सबसे खास बात यह है कि ओलंपिक में क्रिकेट की एंट्री से इस खेल को दुनिया के उन हिस्सों में भी बढ़ावा मिल सकता है, जहां क्रिकेट अभी उतना लोकप्रिय नहीं है.
स्क्वैश पहली बार ओलंपिक में
स्क्वैश के लिए LA28 ऐतिहासिक होने वाला है. यह पहली बार होगा जब स्क्वैश ओलंपिक पदक के लिए खेला जाएगा. पुरुष और महिला दोनों वर्गों में मुकाबले होंगे.
भारत के लिए यह भी अच्छी खबर है, क्योंकि देश में स्क्वैश का मजबूत आधार है. भारतीय खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले भी अच्छा प्रदर्शन किया है. अब ओलंपिक में जगह मिलने से इस खेल को भारत में और ज्यादा पहचान मिल सकती है.
इसका फायदा नए खिलाड़ियों को भी मिल सकता है. स्कूल और अकादमी स्तर पर स्क्वैश को लेकर रुचि बढ़ने की उम्मीद है.
लैक्रोस की भी होगी वापसी
लैक्रोस भी LA28 में वापसी करने वाले खेलों में शामिल है. इस बार इसे Sixes फॉर्मेट में खेला जाएगा. पुरुष और महिला दोनों वर्गों में मुकाबले होंगे.
भारत में लैक्रोस अभी क्रिकेट, हॉकी या बैडमिंटन जितना लोकप्रिय नहीं है. इसलिए इस खेल की ओलंपिक एंट्री भारत के लिए एक नई चुनौती के साथ नया मौका भी है.
अगर भारतीय खेल संस्थाएं इस खेल को शुरुआती स्तर से बढ़ावा देती हैं तो आने वाले समय में भारत इसमें अपनी टीम तैयार कर सकता है. हालांकि, यहां भारत को उन देशों से कड़ी चुनौती मिल सकती है जहां लैक्रोस पहले से काफी लोकप्रिय है.
बेसबॉल और सॉफ्टबॉल की वापसी
बेसबॉल और सॉफ्टबॉल भी LA28 में वापस आ रहे हैं. दोनों खेल आखिरी बार टोक्यो 2020 में ओलंपिक कार्यक्रम का हिस्सा थे.
भारत में इन दोनों खेलों की लोकप्रियता अभी सीमित है. इसके बावजूद ओलंपिक में इनकी वापसी से भारत के लिए एक नया खेल क्षेत्र खुल सकता है.
भारत में बेसबॉल और सॉफ्टबॉल खेलने वाले खिलाड़ियों की संख्या क्रिकेट या हॉकी की तुलना में कम है. ऐसे में अगर इन खेलों को स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी स्तर पर बढ़ावा दिया जाता है तो भारत भविष्य में यहां अपनी मजबूत टीम तैयार कर सकता है.
फ्लैग फुटबॉल का होगा ओलंपिक डेब्यू
फ्लैग फुटबॉल LA28 में पहली बार ओलंपिक खेल के रूप में नजर आएगा. यह अमेरिकी फुटबॉल का एक तेज और बिना कॉन्टैक्ट वाला फॉर्मेट है. इसमें खिलाड़ी एक-दूसरे को गिराने के बजाय कमर पर लगी फ्लैग को खींचकर डिफेंस करते हैं. पुरुष और महिला दोनों वर्गों में छह-छह टीमों का टूर्नामेंट होगा.
भारत में फ्लैग फुटबॉल अभी नया खेल है. इसलिए यहां भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती खिलाड़ियों को तैयार करने और इस खेल को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की होगी.
लेकिन यही इसकी सबसे बड़ी संभावना भी है. अगर युवा खिलाड़ी इस खेल की तरफ आकर्षित होते हैं तो भारत में एक नया स्पोर्ट्स कल्चर तैयार हो सकता है.
भारत पर क्या होगा असर?
इन पांच खेलों की एंट्री भारत के लिए सिर्फ ओलंपिक मेडल का सवाल नहीं है. इसका असर देश के खेल माहौल पर भी पड़ सकता है.
सबसे बड़ा फायदा क्रिकेट को मिलेगा. ओलंपिक में शामिल होने के बाद क्रिकेट को एक अलग तरह की वैश्विक पहचान मिलेगी. भारत जैसे क्रिकेट प्रेमी देश में इससे खिलाड़ियों, ब्रॉडकास्टिंग, स्पोर्ट्स मार्केट और युवा प्रतिभाओं के लिए नए अवसर बन सकते हैं.
वहीं स्क्वैश भारत को पदक की एक नई संभावना दे सकता है. दूसरी तरफ लैक्रोस, बेसबॉल, सॉफ्टबॉल और फ्लैग फुटबॉल जैसे खेल भारत के लिए नए क्षेत्र खोलेंगे.
क्या भारत के पदक बढ़ सकते हैं?
भारत के लिए सबसे बड़ी उम्मीद क्रिकेट और स्क्वैश से बन सकती है. हालांकि किसी भी खेल में पदक पहले से तय नहीं माना जा सकता. टीम या खिलाड़ी को क्वालिफाई करने के साथ-साथ उस समय अपनी सर्वश्रेष्ठ तैयारी भी करनी होगी.
LA28 में कुल 51 खेल शामिल होंगे और खेलों का कार्यक्रम पहले की तुलना में काफी बड़ा होगा. आयोजकों के मुताबिक 2028 में 353 मेडल इवेंट होंगे, जबकि पेरिस 2024 में 329 मेडल इवेंट थे.
इसका मतलब भारत समेत कई देशों के खिलाड़ियों के पास पदक जीतने के ज्यादा मौके होंगे.
बदल सकता है भारत का स्पोर्ट्स कल्चर
LA28 में इन पांच खेलों की एंट्री का सबसे बड़ा असर शायद आने वाले वर्षों में दिखाई देगा. क्रिकेट तो भारत में पहले से ही बेहद लोकप्रिय है, लेकिन स्क्वैश जैसे खेलों को ओलंपिक मंच मिलने से उन्हें नई पहचान मिल सकती है.
वहीं लैक्रोस, फ्लैग फुटबॉल, बेसबॉल और सॉफ्टबॉल जैसे खेलों के लिए भारत के पास अपनी जगह बनाने का मौका है. अगर स्कूलों, कॉलेजों और खेल अकादमियों में इन खेलों को सही तरीके से बढ़ावा दिया जाए तो आने वाले वर्षों में भारत के पास कई नए खेलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हो सकते हैं.
यानी LA28 भारत के लिए सिर्फ क्रिकेट का ओलंपिक नहीं होगा. यह देश के लिए खेलों की नई दुनिया में कदम बढ़ाने का मौका भी हो सकता है