टीएनपी डेस्क (TNP DESK):सावन का महीना पूरी तरह भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. इस दौरान शिवभक्त रोजाना जलाभिषेक के लिए शिवालयों में पहुंचते हैं. हालांकि, सावन के सोमवार का विशेष महत्व होता है. इस दिन सदियों से व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है. व्रत रखने वाले श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने के बाद फलाहार करते हैं. व्रत का मुख्य उद्देश्य संयम और सात्विक आहार के जरिए शरीर और मन को शुद्ध रखना माना जाता है. इस दौरान लोग तेल-मसाले और सामान्य भोजन से परहेज करते हैं. कुछ लोग पूरे दिन फलाहार या उपवास रखते हैं, जबकि कई लोग सेंधा नमक से बने व्रत के भोजन का सेवन करते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर व्रत में सेंधा नमक का ही इस्तेमाल क्यों किया जाता है.
बहुत से लोग अलग-अलग तरीके से रखते हैं व्रत
सोमवार के व्रत के दौरान लोग फल, दूध, साबूदाना, सिंघाड़े के आटे का हलवा, मखाना और कुट्टू जैसी चीजों का सेवन करते हैं. वहीं, कुछ जगहों पर सेंधा नमक डालकर बनाए गए आलू, सब्जी और दूसरे व्रत के व्यंजन भी खाए जाते हैं. सेंधा नमक को रॉक सॉल्ट भी कहा जाता है और यह प्राकृतिक नमक की चट्टानों से प्राप्त होता है. इसे सामान्य टेबल सॉल्ट की तुलना में कम प्रोसेस्ड माना जाता है. यही वजह है कि धार्मिक परंपराओं में इसे व्रत के अनुकूल माना गया है. हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि हर परिवार या हर क्षेत्र में व्रत के नियम एक जैसे हों. कई लोग व्रत के दौरान नमक का सेवन बिल्कुल नहीं करते, जबकि कुछ लोग सेंधा नमक का इस्तेमाल करते हैं.
पढ़े क्यों किया जाता है व्रत में सेंधा नमक का इस्तेमाल
अब अगर सेंधा नमक की तुलना सामान्य नमक से की जाए तो दोनों में मुख्य रूप से सोडियम क्लोराइड ही पाया जाता है. सेंधा नमक में कुछ अन्य खनिज भी हो सकते हैं, लेकिन उनकी मात्रा बहुत कम होती है. वहीं, आयोडीनयुक्त सामान्य नमक शरीर के लिए आयोडीन का महत्वपूर्ण स्रोत है. आयोडीन हमारे शरीर में थायरॉयड हार्मोन बनाने के लिए जरूरी होता है. इसलिए वैज्ञानिक नजरिए से सेंधा नमक को सामान्य नमक से कई गुना ज्यादा फायदेमंद या कोई चमत्कारी नमक मानना सही नहीं है.
दोनों का सेवन सीमित मात्रा में करना ही बेहतर माना जाता है.व्रत के दौरान सेंधा नमक का इस्तेमाल करने की एक वजह यह भी मानी जाती है कि इससे फलाहारी भोजन में स्वाद बना रहता है और भोजन को व्रत के नियमों के अनुसार तैयार किया जा सकता है. साबूदाना खिचड़ी, उबले आलू, कुट्टू की रोटी या सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजनों में लोग अपनी पसंद के अनुसार थोड़ी मात्रा में सेंधा नमक डालते हैं. हालांकि, व्रत के दौरान ज्यादा नमक या तला-भुना भोजन करने से बचना चाहिए. व्रत का मतलब केवल अनाज छोड़ना नहीं है, बल्कि खान-पान में संयम रखना भी है. इसलिए हल्का और संतुलित भोजन करना शरीर के लिए बेहतर रहता है.
पढ़िये क्या हैं परंपरा
इस तरह देखा जाए तो सावन सोमवार के व्रत में सेंधा नमक के इस्तेमाल का मुख्य कारण धार्मिक परंपरा और व्रत के खान-पान से जुड़े नियम हैं. इसे व्रत में सात्विक और अनुकूल माना जाता है, इसलिए कई लोग सामान्य नमक की जगह इसका इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, सेंधा नमक को रोजाना इस्तेमाल करने के लिए सामान्य आयोडीनयुक्त नमक से बेहतर मानना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा. अगर आप सावन सोमवार का व्रत रखते हैं तो अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार सेंधा नमक का सेवन कर सकते हैं, लेकिन इसकी मात्रा सीमित रखना जरूरी है. साथ ही व्रत के दौरान पर्याप्त पानी और पौष्टिक फलाहार का सेवन करना भी ध्यान रखें. इस तरह आस्था और सेहत दोनों का संतुलन बनाए रखते हुए सावन सोमवार का व्रत किया जा सकता है.
