टीएनपी डेस्क (TNP DESK):भारत में सबसे प्राचीन और पवित्र नगरी मानी जाने वाली काशी नगरी भगवान भोलेनाथ को काफी प्रिय है. यही कारण है कि इसको भगवान भोलेनाथ की नगरी के नाम से भी जाना जाता है. बनारस के नाम से मशहूर काशी शहर करोड़ों रहस्य, परंपराओं और कहानियों को अपने अंदर समेटे हुए है. भगवान विश्वनाथ के दर्शन के लिए हर साल करोड़ों श्रद्धालु बनारस पहुंचते हैं. ऐसी मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ को यह नगरी काफी प्रिय है. यही कारण है कि इसे भोलेनाथ की नगरी भी कहा जाता है. वहीं एक और मान्यता है कि काशी नगरी भगवान भोलेनाथ के त्रिशूल पर बसी है. इसके पीछे की परंपरा क्या है, चलिए आपको बताते हैं.
क्यों कहा जाता है भगवान शिव की नगरी
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब सृष्टि की रचना हो रही थी, तब भगवान भोलेनाथ ने काशी को ही अपना निवास स्थान चुना था. यही वजह है कि इसे शिव की नगरी कहा जाता है. वहीं यहां स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जिसकी महिमा का वर्णन हमारे धर्म ग्रंथों में किया गया है. जो भी भक्त काशी विश्वनाथ में भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए आते हैं, उनकी मनोकामना जरूर पूर्ण होती है. इसे मोक्ष की नगरी भी कहा जाता है. यही वजह है कि लोग यहां भगवान भोले के प्रति पूजा-अर्चना करते हैं, तो वहीं पापों से मुक्ति और मोक्ष की कामना भी करते हैं.
क्या सच है भोलेनाथ का त्रिशूल पर बसा है यह शहर
ऐसी मान्यता है कि काशी को भगवान भोलेनाथ के त्रिशूल पर बसाया गया है. यह नगरी धरती पर नहीं है, बल्कि भगवान शिव के त्रिशूल के तीनों फालों पर इसकी नींव टिकी हुई है. यहां के लोगों का कहना है कि प्रलय के समय भी, जब पूरी सृष्टि जलमग्न हो जाती है, तब भी काशी का नाश नहीं होता, क्योंकि भगवान शिव ने इसे स्वयं अपने त्रिशूल पर धारण किया हुआ है. इसे अविनाशी नगरी के नाम से भी जाना जाता है. काशी विश्वनाथ में मोक्ष की प्राप्ति के लिए लोग यहां पहुंचते हैं. ऐसी मान्यता है कि अंतिम समय में स्वयं भगवान शिव भक्त के कान में तारक मंत्र का उपदेश देते हैं, जिससे उसे जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है. इसी वजह से हर साल करोड़ों लोग यहां आते है.
काफ़ी रहस्यमयी है काशीनगरी
इन पौराणिक रहस्यमयी कथाओं के अलावा काशी की गंगा आरती, संकरी गलियां और प्राचीन मंदिर लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. यहां आकर लोग सांसारिक मोह-माया से कुछ देर के लिए ही सही, लेकिन छुटकारा जरूर पा लेते हैं. यहां की मान्यता है कि मणिकर्णिका घाट पर आज तक चिता की आग शांत नहीं हुई है. 24 घंटे यहां चिताएं जलती रहती हैं, जिन्हें देखकर लोगों को यह सीख मिलती है कि जीवन में अंततः सब कुछ यहीं रह जाता है. इसलिए जितना हो सके भगवान में मन लगाया करिए. यहां आते ही लोगों के मन की नकारात्मक ऊर्जा का नाश हो जाता है और वे सकारात्मकता की ओर आगे बढ़ते हैं.
12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है प्रसिद्ध विश्वनाथ मंदिर
काशी का सबसे बड़ा आकर्षण श्री काशी विश्वनाथ मंदिर है. यह मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है. यहां जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव भक्तों पर प्रसन्न होते हैं और उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. सावन के महीने में, महाशिवरात्रि और देव दीपावली के अवसर पर भी यहां लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है.
