टीएनपी डेस्क (TNP DESK): सनातन धर्म में पूजा-पाठ, हवन और यज्ञ का बहुत अधिक महत्व है, जहां हम देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए या फिर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पूजा-पाठ करते हैं. वैसे तो रोजाना घरों में लोग पूजा-पाठ करते हैं, लेकिन जब कोई विशेष कथा या धार्मिक अनुष्ठान होता है, तो आपने देखा होगा कि पंडित जी आचमन करवाते हैं. इसमें शुद्ध जल की कुछ बूंदें हाथों में रखकर पंडित जी मंत्र पढ़ते हैं और पूजा पर बैठे लोगों से आचमन करवाते हैं. देखने में तो यह बहुत सामान्य-सी रस्म लगती है, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा धार्मिक कारण छिपा हुआ है. इसे क्यों किया जाता है और यह क्यों जरूरी है, चलिए आज हम आपको इसके बारे में बताते हैं.
आचमन का शास्त्रों में भी उल्लेख
आपको बता दें कि पूजा से ठीक पहले आपने देखा होगा कि पंडित जी आचमन करवाते हैं. आचमन का शास्त्रों में भी उल्लेख किया गया है. इसमें केवल शरीर की शुद्धि ही पर्याप्त नहीं मानी गई है, बल्कि शरीर के साथ मन और आत्मा की शुद्धि के लिए भी इसे कराया जाता है. ऐसी मान्यता है कि पूजा से पहले लोग कई तरह के कार्य करते हैं और उनके मन में भी अनेक प्रकार के विचार आते हैं. उन विचारों की शुद्धि के लिए आचमन कराया जाता है, जिसमें हथेली पर शुद्ध जल की कुछ बूंदें लेकर मंत्रों का जाप करते हुए थोड़ी मात्रा में उसे ग्रहण किया जाता है. इसके बाद हाथ और मुंह को भी शुद्ध करने की परंपरा बताई गई है. इस समय भगवान का ध्यान करते हुए जल ग्रहण किया जाता है.
क्यों करवाया जाता है आचमन
मान्यता के अनुसार, पूजा से पहले आचमन करने से लोगों का ध्यान सांसारिक चीजों से हट जाता है और मन व बुद्धि भी शुद्ध हो जाते हैं. इसका मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को कुछ समय के लिए बाहरी दुनिया से हटाकर पूजा-पाठ और भगवान पर ध्यान केंद्रित कराना होता है. यह काफी पवित्र परंपराओं में से एक मानी जाती है. इसमें शुद्ध जल का ही इस्तेमाल किया जाता है. ऐसा माना जाता है कि इससे व्यक्ति के मन में मौजूद अशुद्ध और नकारात्मक विचार दूर होते हैं. इसलिए बाहर से भले ही आचमन की प्रक्रिया आपको उतनी महत्वपूर्ण न लगे, लेकिन यह आत्मा की शुद्धि करने और भगवान में मन लगाने के लिए काफी जरूरी मानी जाती है.
आचमन में मंत्रों का उचारण है सबसे जरूरी
आपको बता दें कि केवल हाथ धो लेने या जल ग्रहण कर लेने से ही आचमन की प्रक्रिया पूरी नहीं होती. इसका सबसे महत्वपूर्ण भाग मंत्रों का जाप होता है, जिसे आचमन के समय पंडित जी बोलते हैं. मंत्रों का उच्चारण मन में सकारात्मकता लाने के लिए जरूरी माना जाता है, क्योंकि इससे पूजा पर बैठे लोगों का मन भगवान की ओर आकर्षित होता है और एकाग्र हो जाता है. इसलिए आचमन करते समय किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और शांत मन से इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करना चाहिए.
