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Religion

नवरात्रि के नौ दिन, नौ रंग और उनका खास महत्व, जानिए किस रंग से जुड़ी है कौन-सी भावना

Rashmi Prasad
Rashmi Prasad
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टीनपी डेस्क (TNP DESK):  दुर्गा पूजा की शुरुआत हो चुकी है. 10 अक्टूबर को महालया के साथ 11 अक्टूबर से 9 दिनों की आराधना शुरू हो जाएगी. नवरात्रि का त्योहार मां दुर्गा की आराधना और शक्ति की उपासना का पर्व है. इस दौरान भक्त नौ दिनों तक देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं. दुर्गा पूजा के दौरान शहर में पंडाल सज चुके है, मंदिरों से लेकर घरों तक भक्ति का माहौल रहता है. वहीं, इस पर्व में नौ रंगों का भी खास महत्व माना जाता है. मान्यता है कि नवरात्रि के हर दिन से जुड़ा एक खास रंग होता है, जो किसी न किसी भावना, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है. यही वजह है कि कई भक्त पूजा के साथ-साथ दिन के अनुसार कपड़े पहनने में भी इन रंगों का ध्यान रखते हैं.

बता दें, साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी और इसका समापन 21 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा के साथ होगा. आइए जानते हैं नवरात्रि के नौ रंग कौन-कौन से हैं और इनका क्या महत्व माना जाता है.

नवरात्रि में नौ रंगों की परंपरा क्यों है खास?

नवरात्रि का अर्थ होता है नौ रातें. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. हर स्वरूप को अलग-अलग गुणों और शक्तियों से जोड़कर देखा जाता है. इसी तरह नवरात्रि के नौ रंग भी जीवन की अलग अलग भावनाओं और सकारात्मक विचारों को दर्शाते हैं. इन रंगों का संबंध केवल पहनावे से नहीं है, बल्कि इन्हें भक्ति, आत्मविश्वास, शांति, साहस और नई शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है. हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में नवरात्रि के रंगों में अंतर देखने को मिल सकता है.

नवरात्रि के नौ दिन और नौ रंगों का महत्व

पहला दिन: सफेद रंग

नवरात्रि के पहले दिन सफेद रंग को पवित्रता, शांति और सादगी का प्रतीक माना जाता है. यह मन को शांत रखने और सकारात्मक सोच के साथ पर्व की शुरुआत करने का संदेश देता है. मां शैलपुत्री की पूजा के साथ भक्त अपने जीवन में सुख और शांति की कामना करते हैं.

दूसरा दिन: लाल रंग

लाल रंग ऊर्जा, प्रेम, उत्साह और शक्ति का प्रतीक है. इसे मां दुर्गा की शक्ति से जोड़कर देखा जाता है. नवरात्रि के दूसरे दिन लाल रंग के कपड़े पहनना कई भक्तों की परंपरा का हिस्सा है. यह रंग साहस और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है.

तीसरा दिन: रॉयल ब्लू

रॉयल ब्लू यानी गहरा नीला रंग स्थिरता, शांति और गहराई का प्रतीक माना जाता है. यह व्यक्ति को मुश्किल परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और सोच-समझकर फैसले लेने की प्रेरणा देता है. नवरात्रि में इस रंग को दिव्य ऊर्जा से भी जोड़कर देखा जाता है.

चौथा दिन: पीला रंग

पीला रंग खुशहाली, उत्साह और नई ऊर्जा का प्रतीक है. यह जीवन में उमंग और सकारात्मकता बनाए रखने का संदेश देता है. नवरात्रि के चौथे दिन पीले रंग को धारण करना कई भक्त शुभ मानते हैं.

पांचवां दिन: हरा रंग

हरा रंग प्रकृति, हरियाली, विकास और नई शुरुआत का प्रतीक है. यह जीवन में संतुलन बनाए रखने और आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देता है. नवरात्रि के पांचवें दिन इस रंग को समृद्धि और सकारात्मक बदलाव से जोड़कर देखा जाता है.

छठा दिन: ग्रे यानी धूसर रंग

धूसर रंग संतुलन, गंभीरता और स्थिरता को दर्शाता है. यह जीवन में उतार-चढ़ाव के बीच धैर्य बनाए रखने का संदेश देता है. इस रंग को परिस्थितियों का सामना शांति और समझदारी से करने का प्रतीक भी माना जाता है.

सातवां दिन: नारंगी रंग

नारंगी रंग उत्साह, साहस और ऊर्जा का प्रतीक है. यह व्यक्ति को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और कठिनाइयों का सामना करने की प्रेरणा देता है. नवरात्रि के सातवें दिन इस रंग को शक्ति और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है.

आठवां दिन: मोर हरा रंग

मोर हरा रंग सुंदरता, विशिष्टता और रचनात्मकता का प्रतीक माना जाता है. यह व्यक्ति को अपनी अलग पहचान बनाए रखने और जीवन के प्रति सकारात्मक नजरिया अपनाने का संदेश देता है. अष्टमी के दिन कई भक्त विशेष पूजा-अर्चना करते हैं.

नौवां दिन: बैंगनी रंग

बैंगनी रंग आध्यात्मिकता, आत्मविश्वास, महत्वाकांक्षा और गरिमा का प्रतीक है. नवरात्रि के अंतिम दिन यह रंग आत्मचिंतन और अपने भीतर की शक्ति को पहचानने का संदेश देता है. इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है.

रंगों के साथ मनाएं भक्ति और सकारात्मकता का पर्व

नवरात्रि के नौ रंग त्योहार की खूबसूरती बढ़ाने के साथ जीवन में सकारात्मक विचारों और अच्छे गुणों को अपनाने की प्रेरणा भी देते हैं. हालांकि, रंगों का चयन करना हर भक्त की व्यक्तिगत पसंद और परंपरा पर निर्भर करता है. मां दुर्गा की आराधना में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, विश्वास और मन की पवित्रता है. इन नौ दिनों में पूजा-पाठ के साथ प्रेम, करुणा, धैर्य और साहस जैसे गुणों को अपनाना ही नवरात्रि की भावना को सही मायने में दर्शाता है.