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Sawan 2026: सावन में बाल और नाखून काटने से क्यों बचते हैं लोग? जानिए धार्मिक मान्यता

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): सावन का महीना शुरू होते ही देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगती है. "बोल बम" और "हर-हर महादेव" के जयघोष के बीच श्रद्धालु व्रत, पूजा और भगवान शिव की आराधना में लीन हो जाते हैं. इस पवित्र महीने में लोग केवल उपवास और जलाभिषेक ही नहीं करते, बल्कि अपने खानपान और जीवनशैली में भी कई बदलाव अपनाते हैं. इन्हीं परंपराओं में एक मान्यता यह भी है कि सावन के दौरान बाल, दाढ़ी और नाखून नहीं काटने चाहिए. लेकिन क्या यह वास्तव में धार्मिक नियम है या केवल परंपरा? आइए जानते हैं इसके पीछे की मान्यता और वास्तविकता.

सावन में बाल और नाखून न काटने की क्या है मान्यता?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. यह समय तप, संयम, साधना और आत्मशुद्धि का प्रतीक है. इसी कारण कई श्रद्धालु पूरे महीने सांसारिक सुख-सुविधाओं और शरीर के श्रृंगार से जुड़ी चीजों से दूरी बनाए रखते हैं. बाल कटवाना, दाढ़ी बनवाना और नाखून काटना भी इसी श्रेणी में माना जाता है. मान्यता है कि इस दौरान व्यक्ति जितना अधिक संयमित जीवन जीता है, उतनी ही श्रद्धा और एकाग्रता के साथ भगवान शिव की उपासना कर पाता है. इसलिए अनेक लोग सावन समाप्त होने तक बाल और नाखून नहीं कटवाते.

क्या शास्त्रों में इसे अनिवार्य बताया गया है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में बाल या नाखून न काटने की परंपरा जरूर प्रचलित है, लेकिन इसे हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं माना गया है. यह अधिकतर आस्था, पारिवारिक परंपरा और व्यक्तिगत श्रद्धा से जुड़ा विषय है. यदि किसी व्यक्ति की नौकरी, स्वास्थ्य, स्वच्छता या अन्य आवश्यक कारणों से बाल या नाखून काटना जरूरी हो, तो ऐसा करने में कोई धार्मिक बाध्यता नहीं मानी जाती. भगवान शिव के लिए बाहरी दिखावे से अधिक भक्त की सच्ची श्रद्धा और निर्मल भावना का महत्व माना जाता है.

सावन में किन बातों का पालन करना शुभ माना जाता है?
•    सात्विक भोजन ग्रहण करना. 
•    मांसाहार, शराब, प्याज और लहसुन से परहेज करना. 
•    प्रतिदिन भगवान शिव का जलाभिषेक करना. 
•    बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करना. 
•    "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करना. 
•    सोमवार का व्रत रखना और शिव मंदिर में दर्शन करना. 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का वास्तविक संदेश केवल कुछ कार्यों से परहेज करना नहीं, बल्कि अपने विचारों, व्यवहार और कर्मों को भी पवित्र बनाना है. इस दौरान क्रोध, ईर्ष्या, छल-कपट और नकारात्मक सोच से दूर रहने की सलाह दी जाती है. माता-पिता, गुरु और बड़ों का सम्मान करना, जरूरतमंदों की सहायता करना और घर में स्वच्छता बनाए रखना भी शुभ माना जाता है.

धार्मिक परंपराओं में सावन का महत्व भगवान शिव की भक्ति और आत्मसंयम से जुड़ा है. बाल और नाखून न काटना एक पारंपरिक मान्यता है, लेकिन इसे हर व्यक्ति के लिए बाध्यकारी नियम नहीं माना जाता. यदि किसी विशेष परिस्थिति में ऐसा करना आवश्यक हो, तो इसे धार्मिक दोष नहीं माना जाता. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि श्रद्धालु सच्चे मन, स्वच्छ विचार और पूर्ण आस्था के साथ भगवान शिव की उपासना करें. यही सावन का वास्तविक संदेश और सबसे बड़ा महत्व माना जाता है.