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Religion

Navratri Day 5: नवरात्रि के पाँचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र, भोग और व्रत कथा

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): शारदीय नवरात्रि का आज पांचवां दिन है. यह दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता को समर्पित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां स्कंदमाता की विधि-विधान से आराधना करने से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. मां अपने भक्तों को जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती हैं. संतान सुख की कामना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी मां स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. भगवान कार्तिकेय का एक नाम स्कंद है और उनकी माता होने के कारण देवी के इस स्वरूप को स्कंदमाता कहा जाता है. आइए जानते हैं नवरात्रि के पांचवें दिन पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, प्रिय भोग, मंत्र और पौराणिक व्रत कथा.

मां स्कंदमाता का स्वरूप और धार्मिक महत्व

मां स्कंदमाता का स्वरूप वात्सल्य, शक्ति और ममता का प्रतीक है. देवी की चार भुजाएं हैं और उनकी गोद में भगवान कार्तिकेय बाल रूप में विराजमान रहते हैं. मां का वाहन सिंह है. उनके चेहरे पर दिव्य तेज दिखाई देता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की सच्चे मन से पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और भक्तों को मानसिक शांति प्राप्त होती है. मां का आशीर्वाद जीवन में आने वाली बाधाओं से लड़ने का साहस भी देता है.

मां स्कंदमाता की पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, इस बार पंचमी तिथि 14 अक्टूबर की रात 1 बजकर 14 मिनट से शुरू होकर 15 अक्टूबर की रात 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगी. ज्येष्ठा नक्षत्र पूरे दिन रहेगा, जबकि सौभाग्य योग रात 9 बजकर 15 मिनट तक प्रभावी रहेगा. पूजा के लिए सुबह 7:32 बजे से 7:47 बजे तक और सुबह 10:15 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक का समय शुभ बताया गया है. वहीं, दोपहर 2:30 बजे से शाम 4 बजे तक राहुकाल रहेगा. इस दौरान पूजा के शुभ कार्यों से बचने की परंपरा है. श्रद्धालु अपनी स्थानीय पंचांग गणना के अनुसार भी मुहूर्त देख सकते हैं.

मां स्कंदमाता की पूजा विधि

नवरात्रि के पांचवें दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें. इसके बाद गंगाजल छिड़ककर स्थान को पवित्र करें. लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर मां स्कंदमाता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें. देवी का ध्यान करते हुए उन्हें पीले फूल, वस्त्र और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें. इसके बाद इलायची, लौंग और पान का पत्ता चढ़ाएं.

पूजा के दौरान मां स्कंदमाता के मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है. इसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और मां की व्रत कथा सुनें. पूजा के अंत में देवी की आरती करें और प्रसाद परिवार के सदस्यों तथा अन्य श्रद्धालुओं के बीच वितरित करें. मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई आराधना से मां प्रसन्न होती हैं.

मां स्कंदमाता का मंत्र

मां स्कंदमाता की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप कर सकते हैं.

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया.

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

मां स्कंदमाता को क्या चढ़ाएं?

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता को पीले रंग की वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है. इस दिन देवी को केसर की खीर, पीले रंग की मिठाइयां और मौसमी फल का भोग लगाया जा सकता है. पूजा में पीले फूलों का इस्तेमाल भी किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि मां को श्रद्धापूर्वक भोग अर्पित करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है.