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Religion

इस बार खास है खरजितिया: पहली बार व्रत शुरू करने का दुर्लभ संयोग, महिलाएं जान लें ये नियम 

Samiksha Singh
Samiksha Singh
Sr. Content Writer

tnp desk: भारत में अपने बच्चों की लंबी आयु, के लिए माताएं कठिन से कठिन व्रत करती हैं. इन्हीं कठिन व्रतों में से एक है जीवित्पुत्रिका व्रत. जीवित्पुत्रिका व्रत को जिउतिया या जितिया व्रत भी कहा जाता है. आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हर साल यह व्रत रखा जाता है. माताएं जीवित्पुत्रिका व्रत के दिन निर्जला उपवास कर भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं और अपने बच्चों की लंबी आयु की कामना करती हैं.सभी व्रत में जितिया व्रत  काफ़ी कठिन माना जाता है.

इस साल जितिया पर दुर्लभ संयोग 

वहीं इस साल जितिया  पर काफ़ी शुभ मुहूर्त है. बता दे कि इस साल जितिया में दुर्लभ संयोग बन रहा है.  ज्योतिष शास्त्र में ख़रजीतिया एक बहुत ही दुर्लभ संयोग माना जाता है. ऐसे में जो महिलाएं पहली बार जितिया का व्रत करना चाहती है वह इस व्रत को उठा सकती हैं. मान्यता है कि ख़रजीतिया के संयोग में व्रत शुरू करने से संतान को दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है. ऐसे में अगर कोई महिला पहली बार ये व्रत शुरू करना चाहती हैं तो उनको कुछ नियम जानना ज़रूरी है.

जितिया व्रत कब है?

पहले दिन नहाय-खाय के साथ इस व्रत की शुरुआत होती है .नहाय-खाय 2 अक्तूबर यानी शुक्रवार को किया जाएगा. अष्टमी तिथि 3 अक्तूबर  को सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन अगले दिन यानी 4 अक्तूबर  को सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर होगा.ऐसे में उदयातिथि के अनुसार दूसरे दिन जितिया व्रत शनिवार 3 अक्तूबर 2026 को रखा जाएगा. तीसरा दिनजितिया व्रत का पारण 4 अक्तूबर रविवार को होगा।

जितिया व्रत के नियम 

इसमें पहले दिन महिलायें नहाय-खाए, दूसरे दिन निर्जला उपवास और फिर तीसरे दिन पारण करती हैं.  

नहाय-खाए के  दिन व्रत रखने वाली महिलाएं स्नान करके सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं. इस दिन नोनी का साग,  मडुआ की रोटी खाने की परंपरा है.

जितिया व्रत निर्जला उपवास होता है. इसलिए व्रत के दूसरे दिन महिलाएं पानी तक नहीं ग्रहण करती है .

वहीं जितिया के दिन महिलाएं पूजा करके संतान की लंबी उम्र के लिए जितिया धागा धारण करते हैं 

इस दिन महिलाओं को गुस्सा और झगड़ा करने से बचना चाहिए, किसी को भी अपशब्द नहीं कहना चाहिए 

इस दिन घर के सभी लोगों को सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए 

महिलाओं को इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा कर जितवाहन की कथा सुननी चाहिए.