टीएनपी डेस्क: हिंदू धर्म में कार्तिक मास को बेहद ही पवित्र महीना माना जाता है. कहा जाता है कि इस महीने में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष फल मिलता है. इस साल कार्तिक मास की शुरुआत कल यानी 27 अक्टूबर से शुरू हो रही है. वहीं कार्तिक पूर्णिमा के दिन यानी 24 नवंबर को इस महीने का समापन होगा. ऐसे में जानते हैं कि कार्तिक माह में किन नियमों का ध्यान रखना चाहिए और कौन-कौन सी गलतियां करने से बचना चाहिए
कार्तिक मास चूंकि भगवान विष्णु की आराधना के लिए काफी शुभ महीना माना जाता है ऐसे में इस महीने में पूजा-पाठ, जप आदि करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. इस माह में बड़ी संख्या में लोग सुबह सूर्य के उगने से पहले स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और शाम के समय दीपक जलाते हैं. कार्तिक माह में तुलसी की पूजा करने का भी विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को तुलसी बेहद प्रिय है. इसीलिए इस महीने में तुलसी के पौधे की पूजा करना और तुलसी में दीप जलाने की परंपरा प्रचलित है.
इस महीने जरूर करें ये काम
1. सुबह स्नान करने की परंपरा अपनाएं
कार्तिक मास में सूर्योदय से पहले स्नान करना शुभ माना जाता है. स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु का पूजा करें.
2. भगवान विष्णु की पूजा करें
इस महीने में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करने की परंपरा है. प्रतिदिन पूजा के लिए समय निकालें. अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र जाप, भजन और धार्मिक ग्रंथों का पाठ भी कर सकते हैं.
3. तुलसी पूजन और दीपदान करें
कार्तिक मास में तुलसी के पौधे में पूजा करना शुभ माना जाता है. शाम के समय तुलसी के पास या घर के पूजा स्थल पर दीपक जलाएं.
4. जरूरतमंदों की सहायता करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक मास में अन्न, वस्त्र और जरूरत की वस्तुओं का दान करना पुण्यदायी माना जाता है. अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की मदद करें
कार्तिक मास में भूलकर भी न करें ये गलतियां
1. तामसिक भोजन से परहेज करें
कार्तिक मास में सात्विक भोजन करने की परंपरा है. इस दौरान कई लोग प्याज और लहसुन और मांस मछली का सेवन नहीं करते हैं.
2. क्रोध और विवाद से बचें
कार्तिक मास को भक्ति का महीना माना जाता है. ऐसे में झूठ बोलने, दूसरों का अपमान करने, अनावश्यक विवाद करने और किसी के प्रति द्वेष रखने से बचने का प्रयास करें.
3. पूजा-पाठ में लापरवाही न करें
इस महीने में नियमित पूजा और भगवान का स्मरण करने की परंपरा है. इसलिए साफ़ सुथरे मन से श्रद्धा के साथ पूजा करें
