TNP DESK:झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम देश के सबसे प्रमुख शिव तीर्थों में गिना जाता है. यह ऐसा पवित्र स्थान है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं. खासकर सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. इस धाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में स्थान प्राप्त है. साथ ही यह 51 शक्तिपीठों में भी शामिल माना जाता है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है.
देवघर में स्थित है बाबा बैद्यनाथ धाम
बाबा बैद्यनाथ मंदिर झारखंड के देवघर जिले में स्थित है. यह भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है. सावन के दौरान यहां का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है. देश के अलग-अलग राज्यों से कांवड़िए गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हुए बाबा के दरबार में पहुंचते हैं और जलाभिषेक करते हैं.
रावण की तपस्या से जुड़ी है ज्योतिर्लिंग की कथा
बाबा बैद्यनाथ धाम का इतिहास कई पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है. मान्यता के अनुसार, लंका के राजा रावण भगवान शिव के परम भक्त थे. उन्होंने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें एक दिव्य शिवलिंग प्रदान किया.
हालांकि, भगवान शिव ने एक शर्त रखी कि यात्रा के दौरान इस शिवलिंग को कहीं भी भूमि पर नहीं रखना होगा. यदि एक बार इसे धरती पर रख दिया गया, तो यह वहीं स्थायी रूप से स्थापित हो जाएगा.
कथा के अनुसार, रावण शिवलिंग लेकर लंका की ओर चल पड़े. इस बीच देवताओं को चिंता हुई कि यदि शिव स्वयं लंका पहुंच गए तो रावण अत्यंत शक्तिशाली हो जाएगा. तब भगवान विष्णु ने एक योजना बनाई. रास्ते में ऐसी परिस्थिति बनी कि रावण को कुछ समय के लिए रुकना पड़ा. उन्होंने पास खड़े एक ग्वाले को शिवलिंग पकड़ाया और उसे जमीन पर न रखने का आग्रह किया. लेकिन कुछ समय बाद ग्वाला शिवलिंग का भार नहीं संभाल सका और उसने उसे भूमि पर रख दिया. इसके बाद शिवलिंग वहीं स्थापित हो गया. रावण ने उसे उठाने का काफी प्रयास किया, लेकिन वह सफल नहीं हो सके. मान्यता है कि यही शिवलिंग आज देवघर में बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान है.
भगवान शिव को बैद्यनाथ नाम कैसे मिला?
बाबा बैद्यनाथ नाम के पीछे भी एक प्रसिद्ध धार्मिक मान्यता है. कहा जाता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रावण ने अपने सिर एक-एक करके अर्पित करने शुरू कर दिए थे. जब वह अंतिम सिर चढ़ाने वाले थे, तब भगवान शिव प्रकट हुए. उन्होंने रावण की भक्ति से प्रसन्न होकर उसके सभी सिर दोबारा जोड़ दिए और उसका उपचार किया. चूंकि भगवान शिव ने वैद्य यानी चिकित्सक की तरह रावण का उपचार किया था, इसलिए उन्हें बैद्यनाथ कहा जाने लगा. इसी कारण यह स्थान बाबा बैद्यनाथ धाम के नाम से प्रसिद्ध हुआ.
मंदिर का इतिहास और परिसर
बाबा बैद्यनाथ धाम का वर्तमान मंदिर कई शताब्दियों पुराना माना जाता है. समय-समय पर विभिन्न शासकों और श्रद्धालुओं ने इसका जीर्णोद्धार कराया. मुख्य मंदिर लगभग 72 फीट ऊंचा बताया जाता है. मंदिर परिसर में केवल ज्योतिर्लिंग ही नहीं, बल्कि माता पार्वती, भगवान गणेश, कालभैरव, हनुमान सहित कई देवी-देवताओं के लगभग 21 मंदिर भी मौजूद हैं. यही कारण है कि यहां आने वाले श्रद्धालु एक ही परिसर में अनेक देवी-देवताओं के दर्शन कर सकते हैं.
शक्तिपीठ के रूप में भी है विशेष पहचान
बाबा बैद्यनाथ धाम का महत्व केवल ज्योतिर्लिंग होने तक सीमित नहीं है. इसे 51 शक्तिपीठों में भी शामिल माना जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता सती के देह त्याग के बाद भगवान शिव उनके शरीर को लेकर तांडव करने लगे थे. तब भगवान विष्णु ने सृष्टि की रक्षा के लिए अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के विभिन्न अंग अलग किए. मान्यता है कि माता सती का हृदय देवघर में गिरा था. इसी कारण यह स्थान शक्तिपीठ के रूप में भी पूजनीय माना जाता है.
श्रावणी मेले की अनोखी परंपरा
बाबा बैद्यनाथ धाम का श्रावणी मेला विश्व प्रसिद्ध है. हर वर्ष श्रावण मास में लाखों कांवड़िए बिहार के सुल्तानगंज से गंगाजल भरकर लगभग 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए देवघर पहुंचते हैं. इसके बाद वे बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक करते हैं. पूरे सावन महीने में "बोल बम" और "हर-हर महादेव" के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा रहता है.
आस्था का प्रमुख केंद्र
हिंदू धर्म में बाबा बैद्यनाथ धाम को मनोकामना पूर्ण करने वाला शिव धाम माना जाता है. यहां श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. ऐसी मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यही कारण है कि यह धाम सदियों से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है.
