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Religion

दशहरा 2026: जानिए विजयादशमी पर क्यों की जाती है शस्त्र पूजा, क्या है इसका धार्मिक महत्व?

Samiksha Singh
Samiksha Singh
Sr. Content Writer

TNP DESK: दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है. इस दिन देशभर में रावण दहन के साथ कई स्थानों पर शस्त्र पूजा भी की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शस्त्र पूजा शक्ति, साहस और धर्म की रक्षा के संकल्प का प्रतीक है. लेकिन आखिर दशहरे के दिन हथियारों की पूजा करने की परंपरा क्यों है? आइए जानते हैं इसके पीछे की धार्मिक मान्यताएं

 भगवान श्रीराम की विजय से जुड़ा है दशहरा

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम ने विजयादशमी के दिन रावण का वध कर अधर्म का अंत किया था. इसी वजह से इस दिन को विजय और धर्म की स्थापना के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. शस्त्र पूजा के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि शक्ति का इस्तेमाल अन्याय के खिलाफ लड़ने और सत्य की रक्षा करने के लिए किया जाना चाहिए.

मां दुर्गा की शक्ति और महिषासुर वध का प्रतीक

पौराणिक कथाओं के अनुसार मां दुर्गा ने महिषासुर का वध करके संसार को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था. मां दुर्गा के हाथों में मौजूद अस्त्र-शस्त्र उनकी शक्ति, साहस और बुराई के विनाश का प्रतीक हैं. विजयादशमी पर शस्त्र पूजा करना देवी की इसी शक्ति का स्मरण करने और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देता है.

महाभारत के पांडवों से भी जुड़ी है शस्त्र पूजा की परंपरा

शस्त्र पूजा की परंपरा को महाभारत की एक प्रचलित कथा से भी जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने अपने अस्त्र-शस्त्र शमी के पेड़ में छिपा दिए थे. अज्ञातवास पूरा होने के बाद अर्जुन ने शमी वृक्ष से अपने शस्त्र वापस प्राप्त किए थे. इसी कथा के कारण कई क्षेत्रों में दशहरे के अवसर पर शमी वृक्ष की पूजा और शस्त्र पूजन की परंपरा निभाई जाती है.

शस्त्र पूजा का क्या है संदेश?

प्राचीन समय में राजा और सैनिक युद्ध में विजय, राज्य की सुरक्षा और शत्रुओं पर जीत की कामना के साथ अपने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा करते थे. समय के साथ यह परंपरा शक्ति, कर्तव्य और अपने कार्य के प्रति सम्मान का प्रतीक बन गई.

दशहरे पर कैसे की जाती है शस्त्र पूजा?

1.⁠ ⁠सबसे पहले शस्त्रों या काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों की साफ-सफाई की जाती है.
2.⁠ ⁠इसके बाद रोली, कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित किए जाते हैं.
3.⁠ ⁠दीपक जलाकर मां दुर्गा या अपने आराध्य देव का स्मरण किया जाता है.
4.⁠ ⁠परिवार की सुख-समृद्धि, सुरक्षा और कार्यों में सफलता की कामना की जाती है.