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Religion

Chaturmas 2026: इस दिन से शुरू होगा चातुर्मास, जानिए इस दौरान क्यों रुक जाते हैं सभी मांगलिक कार्य

Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Sr. Content Writer

टीएनपी डेस्क(TNP DESK):सनातन धर्म में चातुर्मास का काफी अधिक महत्व माना जाता है, क्योंकि यह चार महीने हिंदू धर्म का पालन करने वाले लोगों के लिए बेहद पवित्र माने जाते है.यह भक्ति, अध्यात्म और साधना का सबसे उत्तम समय माना जाता है. पौराणिक मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार महीने बाद देवउठनी एकादशी के दिन जागते है. इन चार महीनों के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता.शादी-विवाह, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्यों पर पूर्ण रूप से रोक रहती है. इस दौरान लोगों को पूजा-पाठ, दान, व्रत और जप-तप करने की सलाह दी जाती है. यदि आप भी चातुर्मास से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं को नहीं जानते हैं, तो आइए आपको इसके बारे में बताते है.

पढिए क्यों नहीं किया जाता है मांगलिक काम

पौराणिक मान्यता है कि भगवान विष्णु, जो सृष्टि के पालनकर्ता हैं, वे चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और इस दौरान सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान भोलेनाथ को सौंप देते है. किसी भी शुभ कार्य में भगवान विष्णु का आह्वान किया जाता है. शादी-विवाह में भी भगवान विष्णु को साक्षी मानकर सात फेरे लिए जाते है. जब भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं, तब शुभ कार्य नहीं किए जाते, क्योंकि इस दौरान भगवान विष्णु स्थिर अवस्था में नहीं होते.यही कारण है कि चातुर्मास के दौरान शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक लगाई जाती है. वहीं, देवउठनी एकादशी यानी गोवर्धन पूजा के दिन भगवान विष्णु के जागने के साथ ही मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते है.

पढ़ें इस साल कब से शुरू होगा चातुर्मास

साल 2026 में चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई 2026 से होने जा रही है, जो पूरे 120 दिनों तक चलेगा. इसका समापन 21 नवंबर 2026 यानी देवउठनी एकादशी के दिन होगा. ऐसे में यदि आप भी उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें यह नहीं पता कि चातुर्मास के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं, तो आइए आपको इसकी पूरी जानकारी देते है.चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और तुलसी माता की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है.इस दौरान "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का नियमित जाप करना चाहिए.साथ ही श्रीमद्भागवत, रामचरितमानस, श्रीमद्भगवद्गीता और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है. इसके अलावा गरीब और जरूरतमंद लोगों को वस्त्र, अन्न और दक्षिणा का दान करना भी शुभ माना गया है.

पढ़िये क्या करना चाहिए और क्या नहीं

इस दौरान लोगों को सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है. इसके साथ ही क्रोध, अहंकार और नकारात्मक विचारों से भी दूर रहना चाहिए. चातुर्मास में एकादशी का व्रत, कीर्तन और सत्संग करना शुभ माना जाता है.वहीं, तुलसी के पौधे की सेवा करना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है.वहीं, अब आपको यह भी बता देते हैं कि चातुर्मास के दौरान किन कार्यों की मनाही होती है. इस दौरान गृह प्रवेश, मुंडन, शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए. मान्यता है कि यदि कोई इस दौरान विवाह करता है, तो उसे भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता. इसके साथ ही मदिरा और अन्य नशीली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए तथा तामसिक भोजन से भी दूर रहना चाहिए.वहीं, किसी पर झूठा आरोप नहीं लगाना चाहिए, झूठ नहीं बोलना चाहिए और पेड़-पौधों तथा जीव-जंतुओं को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए.

इस कारण से भी माना जाता है चातुर्मास 

चातुर्मास को लेकर एक और पौराणिक परंपरा भी प्रचलित है. कहा जाता है कि इन चार महीनों में वर्षा अधिक होती है, जिसके कारण संत-महात्मा एक ही स्थान पर रहकर प्रवचन और साधना करते थे.यही परंपरा आगे चलकर चातुर्मास के रूप में प्रसिद्ध हुई. इस दौरान लोग भगवान विष्णु की उपासना करते है.श्रीहरि के मंत्रों का जाप, श्रीमद्भागवत और रामायण का पाठ अत्यंत लाभकारी माना जाता है, जिससे विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है.