टीएनपी डेस्क (TNP DESK): हमारे देश में कई ऐसी ऐतिहासिक, धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं हैं, जो लोगों को आज भी आकर्षित करती हैं. लेकिन बात अगर उत्तर प्रदेश की काशी नगरी की जाए, तो यह अपने आप में जहां खास है, तो वहीं दूसरी तरफ अपने अंदर कई रहस्यमय कहानियों को समेटे हुए है. काशी को शिव की नगरी कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव ने इसे अपने त्रिशूल पर बसा रखा है. यह नगरी जमीन पर बसी हुई नहीं है. हर साल लाखों लोग काशी विश्वनाथ के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं. साथ ही यहां की हर एक गली और हर एक घाट अपने अंदर कई रहस्यमय कहानियां आज भी बयान करते हैं.
क्यों कहा जाता है मोक्ष की नगरी पढिये
कहा जाता है कि काशी एक ऐसी नगरी है, जहां जीवन और मौत एक साथ चलते हैं. यह मोक्ष की नगरी है, जहां अगर किसी की मौत हो जाए, तो सीधे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है. इंसान जीवन-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है. यहां कई ऐसे घाट हैं, जहां 24 घंटे चिताएं जलती रहती हैं.काशी को गलियों का शहर भी कहा जाता है. यहां हर एक कदम पर एक गली मिलेगी, जिसका नजारा काफी अद्भुत होता है. यहां के लोग भी काफी मजेदार हैं. देश-विदेश से लोग यहां का नजारा देखने के लिए पहुंचते हैं. कहा जाता है कि बनारस में एक तरफ जहां आपको घाटों पर पूजा-पाठ करते हुए लोग देखेंगे, तो वहीं दूसरी ओर चिता जलती रहती है और यह लोगों के लिए सामान्य बात है. कोई इसको देखकर डरता या आश्चर्यचकित नहीं होता, क्योंकि यहां के लिए यह रोज की बात है. इसी वजह से लोग इसे जीवन और मौत, दोनों को साथ लेकर चलने की बात करते हैं.यहां आकर लोग जीवन को समझते हैं और कि आखिर अंत में हमारे साथ क्या होने वाला है. अर्थात हमें लोभ और भय छोड़कर अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए. कोई भी गलत कर्म नहीं करना चाहिए.
जहां हर एक गली और घाट कहती है एक कहानी
अब बता दें कि काशी की गलियों से लेकर गंगा के घाटों तक हर जगह कोई न कोई कहानी सुनने को मिल जाती है. कहीं भगवान शिव से जुड़ी मान्यता है, तो कहीं माता पार्वती और भगवान विष्णु की कथा. मणिकर्णिका घाट से लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर तक, यहां हर जगह अपने अंदर एक अलग धार्मिक महत्व रखती है.काशी विश्वनाथ यहां का सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है. कहा जाता है कि भगवान भोलेनाथ के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ भी है. देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां आते हैं. वहीं, यहां अंतिम संस्कार करने को लेकर भी खास मान्यता है. कहा जाता है कि जिस व्यक्ति का यहां अंतिम संस्कार होता है या यहां मृत्यु होती है, तो मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है. इसी वजह से ऐसे लोग हैं, जो अपने अंतिम समय यानी बुजुर्ग समय में काशी आकर रहते हैं और चाहते हैं कि यहां उनकी मृत्यु हो जाए, ताकि मोक्ष की प्राप्ति हो जाए.वहीं, मणिकर्णिका घाट को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, जो काफी प्रसिद्ध हैं. मान्यता है कि इस स्थान से माता पार्वती का गहरा नाता है. यहां माता पार्वती का मणि जड़ा हुआ कुंडल गिरा था. इसी वजह से इस जगह का नाम मणिकर्णिका पड़ा. हालांकि, इस कथा से अलग-अलग धार्मिक और पौराणिक रूप मिलते हैं. इस तरह से इसे आस्था और मान्यता के रूप में ही देखा जाता है.
तारक मंत्र देते हैं महादेव
वैसे तो किसी की मृत्यु कभी भी अच्छी नहीं लगती, लेकिन काशी में किसी की मौत हो जाए, तो उसका खास महत्व माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि जो भी यहां भगवान भोलेनाथ को प्राप्त होता है, उसे तारक मंत्र देते हैं, जिसके कारण से वह व्यक्ति जीवन-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है और मोक्ष को प्राप्त करता है.वहीं, काशी माता गंगा के बिना अधूरी मानी जाती है. शहर के किनारे गंगा के कई प्रसिद्ध घाट हैं, जहां सुबह के समय नजारा कुछ अलग ही देखने को मिलता है. सुबह और शाम के समय यहां भारी संख्या में भक्त जुटते हैं, जहां घंटी और मंत्रों की आवाज के बीच गंगा किनारे का माहौल काफी आध्यात्मिक हो जाता है.आपको बता दें कि यहां हरिश्चंद्र घाट भी खास है. मणिकर्णिका के अलावा हरिश्चंद्र घाट भी काशी का महत्वपूर्ण घाट माना जाता है, जिसका संबंध राजा हरिश्चंद्र से जुड़ा है. माना जाता है कि राजा हरिश्चंद्र सत्य के लिए अपनी हर चीज त्यागने को तैयार रहते थे. इसी कथा के कारण हरिश्चंद्र घाट को सत्य और त्याग की कहानी से जोड़ा जाता है. आज भी यहां अंतिम संस्कार होते हैं.
प्रलय आने के बाद भी नहीं डूबती है काशी
ऐसी मान्यता है कि जब प्रलय आता है, तो पूरी सृष्टि समाप्त हो जाती है, तब भी काशी का अस्तित्व बना रहता है. ऐसा माना जाता है कि उस समय भगवान शिव काशी को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेते हैं. इसलिए काशी को अविनाशी नगरी भी कहा जाता है.आपको बता दें कि काशी नगरी में हर एक कदम पर आपको घूमते हुए थोड़ी-थोड़ी दूर पर मंदिर, घाट या धार्मिक स्थान मिल जाता है. काशी में हजारों ऐसे छोटे-बड़े मंदिर हैं, जहां भगवान शिव के अलावा माता पार्वती, भगवान गणेश, हनुमान और अलग-अलग देवी-देवताओं के कई मंदिर मिल जाते हैं. काशी केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति को समझने का भी एक जरिया है.गंगा किनारे अलग-अलग घाटों पर जलती चिताएं लोगों को समझाती हैं कि चाहे आपका जीवन कितना भी लंबा हो, लेकिन आपको इसे छोड़ना ही होता है.
