धनबाद(DHANBAD): आज 15 जून है, झारखंड में 18 जून को राज्यसभा चुनाव की वोटिंग होगी। दो सीट के लिए तीन उम्मीदवारों के मैदान में होने की वजह से वोटिंग होगी। झारखंड की धरती भी राज्यसभा चुनाव को लेकर तप रही है. गणित पर गणित बैठाये जा रहे है. झामुमो ने बैद्यनाथ राम को अपना उम्मीदवार बनाया है, तो कांग्रेस ने प्रणव झा को मैदान में उतारा है. भाजपा ने निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को समर्थन दिया है. ऐसे में मामला एनडीए और महागठबंधन के लिए प्रतिष्ठा से जुड़ गया है. सबसे अधिक प्रतिष्ठा झारखंड में कांग्रेस की फंसी हुई है ,क्योंकि कांग्रेस उम्मीदवार राष्ट्रीय अध्यक्ष के राजनीतिक सलाहकार हैं. इसलिए भी प्रदेश कांग्रेस की बेचैनी और परेशानी बढ़ी हुई है.
प्रदेश कांग्रेस के लिए भी ही बड़ी चुनौती
प्रदेश कांग्रेस के लिए जीत सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती है. गठबंधन के दोनों प्रत्याशियों की बात की जाए तो 28-28 वोट उनके पास है. ऐसे में दोनों प्रत्याशी जीत सकते हैं, लेकिन दोनों प्रत्याशियों को जितने भर का ही वोट महागठबंधन के पास है. ऐसे में एक या दो वोट इधर-उधर हुआ, तो पूरा मामला पलट सकता है. झामुमो अपने प्रत्याशी की जीत को पक्की करने के लिए एक दो अधिक विधायकों का प्रथम वरीयता का वोट भी दिला सकता है. क्योंकि अगर एक दो वोट रद्द होने पर भी प्रत्याशी को कोई नुकसान नहीं हो. ऐसे में कांग्रेस को एनडीए से वोट खींचने की जरूरत पड़ेगी।
एनडीए का भी है पूरा जोर
दूसरी ओर परिमल नाथवानी लगातार सक्रिय हैं. उन्हें एनडीए का सपोर्ट है. उन्हें जीतने के लिए चार विधायकों के समर्थन की जरूरत है. उनकी कोशिश होगी कि सत्तारूढ़ गठबंधन में सेंध लगाकर वोट को खींचा जा सके. ऐसे में कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती होगी। झामुमो के पास 34 विधायक है. अगर 28 विधायक ही झामुमो उम्मीदवार को वोट करते हैं और कांग्रेस के सभी 16, राजद के चार और माले के दो वोट कांग्रेस प्रत्याशी को मिलता है, तब तो जीत पक्की हो जाएगी, लेकिन अगर क्रॉस वोटिंग हो जाए तो मामला फंस सकता है. सत्तारूढ़ महागठबंधन के पास 56 विधायक हैं तो एनडीए के पास 24 हैं. ऐसे में परिणाम क्या होगा, कांग्रेस कैसे अपने को बचा पाएगी? कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की प्रतिष्ठा कैसे बचेगी? इसका उत्तर तो चुनाव परिणाम के बाद ही मिलेगा।
