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महिलाओं की सुरक्षा के लिए शुरू हुई पिंक बस सेवा खुद हुई बेबस, 3 बसों में सिमटी सुविधा

Varsha Varma CE
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रांची (RANCHI): महिलाओं की सुरक्षित और सम्मानजनक यात्रा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से झारखंड सरकार ने 19 मार्च 2021 को पिंक बस सेवा की शुरुआत की थी. इस योजना का मकसद सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं को एक सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराना था, ताकि वे बसों और ट्रेनों में होने वाली छेड़छाड़, अभद्र व्यवहार और अन्य अप्रिय घटनाओं से बच सकें. पिंक बस सेवा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें चालक से लेकर कंडक्टर तक सभी कर्मचारी महिलाएं होती हैं. इससे महिला यात्रियों में सुरक्षा और आत्मविश्वास की भावना बढ़ती है.

हालांकि, सेवा शुरू होने के पांच वर्ष बाद भी राजधानी रांची की बड़ी आबादी को इसका पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा है. शहर में महिलाओं की संख्या और यात्रा की जरूरतों की तुलना में पिंक बसों की संख्या बेहद कम है. वर्तमान में रांची में केवल तीन पिंक सिटी बसें संचालित हो रही हैं, जबकि शहर में कुल 41 सिटी बसें चलती हैं. ऐसे में अधिकांश महिलाओं को मजबूरी में सामान्य सिटी बसों का सहारा लेना पड़ता है.

तीन बसों पर हजारों महिलाओं का भार

रांची में संचालित तीनों पिंक बसें कचहरी चौक से बिरसा चौक के बीच चलती हैं. सीमित संख्या के कारण इन बसों में पहले से ही यात्रियों की भारी भीड़ रहती है. स्थिति यह है कि कई बार महिलाओं को बस में सीट तो दूर, खड़े होने तक के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती. परिणामस्वरूप उन्हें भीड़भाड़ के बीच लंबा सफर तय करना पड़ता है. महिला यात्रियों का कहना है कि यदि पिंक बस में जगह नहीं मिलती तो उन्हें सामान्य सिटी बसों में यात्रा करनी पड़ती है. इन बसों में अत्यधिक भीड़ के कारण महिलाओं को पुरुष यात्रियों के बीच खड़े होकर सफर करना पड़ता है, जिससे वे असहज महसूस करती हैं. कई महिलाओं का मानना है कि जिस उद्देश्य से पिंक बस सेवा शुरू की गई थी, वह सीमित संसाधनों के कारण पूरी तरह सफल नहीं हो पा रही है.

निश्चित समय-सारिणी का अभाव भी बड़ी समस्या

पिंक बस सेवा से जुड़ी एक और बड़ी समस्या इसका अनियमित संचालन है. बस स्टैंडों पर पिंक बसों के आगमन और प्रस्थान का कोई स्पष्ट समय निर्धारित नहीं है. महिलाओं का कहना है कि उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि पिंक बस कब आएगी और कब नहीं. ऐसी स्थिति में लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है. कई बार समय पर बस नहीं मिलने पर उन्हें ऑटो या अन्य निजी साधनों का उपयोग करना पड़ता है, जिससे यात्रा खर्च बढ़ जाता है. कामकाजी महिलाओं, छात्राओं और रोजाना आने-जाने वाली यात्रियों के लिए यह परेशानी और भी गंभीर हो जाती है.

पहचान करना भी हो रहा मुश्किल

रांची में चलने वाली अधिकांश सिटी बसों पर वर्तमान में मंईयां सम्मान योजना के प्रचार-प्रसार से जुड़े पोस्टर लगाए गए हैं. इसके कारण सामान्य सिटी बसों और पिंक सिटी बसों के बीच दृश्य अंतर काफी कम हो गया है. महिला यात्रियों का कहना है कि दूर से देखकर यह पहचान पाना मुश्किल हो जाता है कि कौन-सी बस पिंक बस है और कौन-सी सामान्य सिटी बस. कई बार बस स्टॉप पर खड़ी महिलाओं को अंतिम समय तक यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि आने वाली बस महिलाओं के लिए आरक्षित पिंक बस है या सामान्य बस.

बढ़ती मांग के बावजूद विस्तार नहीं

राजधानी रांची में लगातार बढ़ती आबादी, कामकाजी महिलाओं और छात्राओं की संख्या को देखते हुए पिंक बस सेवा के विस्तार की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है. महिलाओं का कहना है कि यदि बसों की संख्या बढ़ाई जाए, नए रूट जोड़े जाएं और नियमित समय-सारिणी जारी की जाए, तो बड़ी संख्या में महिलाएं इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगी. साथ ही बसों की स्पष्ट पहचान, डिजिटल डिस्प्ले, मोबाइल ऐप आधारित ट्रैकिंग और निर्धारित समय पर संचालन जैसी सुविधाएं भी यात्रियों की समस्याओं को काफी हद तक कम कर सकती हैं.

सरकार से अपील

महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर शुरू की गई पिंक बस सेवा का उद्देश्य सराहनीय है, लेकिन सीमित बसों की संख्या, अनियमित संचालन और पहचान संबंधी समस्याओं के कारण यह योजना अपने पूर्ण लक्ष्य तक नहीं पहुंच पा रही है. राजधानी रांची की हजारों महिलाएं आज भी मजबूरी में भीड़भाड़ वाली सामान्य बसों में सफर करने को विवश हैं. यदि सरकार इस सेवा का विस्तार कर बसों की संख्या बढ़ाती है और संचालन व्यवस्था को बेहतर बनाती है, तो यह वास्तव में महिलाओं के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन का माध्यम बन सकती है.