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बरसात में क्यों बढ़ जाता है Snake Bite का खतरा? किसी को सांप काट ले तो सबसे पहले क्या करें

Priyanka Kumari CE
Sr. Content Writer
बरसात में क्यों बढ़ जाता है Snake Bite का खतरा? किसी को सांप काट ले तो सबसे पहले क्या करें

टीएनपी डेस्क (TNP DESK):बरसात के दिनों में सांपों का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है, क्योंकि बारिश के दौरान सांपों के बिलों में पानी भर जाता है.ऐसे में वे बाहर निकलकर लोगों के घरों और खेतों में पहुंच जाते है. हालांकि, इसके पीछे एक और बड़ी वजह यह है कि बारिश के मौसम में बिलों के अंदर उमस बढ़ जाती है. गर्मी और उमस से बचने के लिए सांप ठंडी जगह की तलाश में बिलों से बाहर निकलते हैं और अनजाने में लोगों के घरों में घुस जाते है, खासकर उन जगहों पर जहां काफी सामान रखा होता है. वहां वे छिपकर बैठे रहते है. यदि समय रहते उन पर किसी की नजर नहीं पड़ती, तो ये जहरीले सांप किसी की जान भी ले सकते है.हर साल बरसात के दिनों में हजारों लोगों की जान सांप के काटने से चली जाती है.

ASV से इलाज पूरी तरह से संभव

आपको बता दें कि भारत में सांपों की 250 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन इनमें से सभी जहरीले नहीं होते. औसतन देखा जाए तो 100 में से केवल 20 प्रतिशत सांप ही खतरनाक होते हैं, जबकि बाकी 80 प्रतिशत सांपों का जहर इंसानों के लिए घातक नहीं होता. हालांकि, जो 20 प्रतिशत जहरीले सांप हैं, उनका जहर समय पर इलाज नहीं मिलने पर जानलेवा साबित हो सकता है.प्राचीन समय में सांप काटने पर लोग झाड़-फूंक या अन्य पारंपरिक तरीकों का सहारा लेते थे, लेकिन आज इसका प्रभावी इलाज उपलब्ध ह.एंटी स्नेक वेनम (ASV) इंजेक्शन के जरिए जहर के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है.इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों में आज भी अंधविश्वास के कारण कई लोगों की जान चली जाती है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह सही जानकारी का अभाव और अशिक्षा है.

सांप काटने के बाद बिना देर किए डॉक्टर के पास जायें

हालांकि, यदि समय पर इलाज मिल जाए तो किसी भी व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है. बिना समय गंवाए कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए.एक अनुमान के मुताबिक, पिछले 20 वर्षों में भारत में सांप के काटने से लगभग 12 लाख लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें सबसे अधिक ग्रामीण क्षेत्रों के लोग शामिल है. इसका मुख्य कारण यह है कि ग्रामीण इलाकों में लोग झाड़-फूंक और अंधविश्वास के चक्कर में इलाज में देरी कर देते है. दूसरी ओर, कई जगहों पर समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण भी लोगों की मौत हो जाती है. WHO के अनुसार, Snake Bite एक उपेक्षित बीमारी है और इसका इलाज एंटी स्नेक वेनम से संभव है.

आख़िर क्यों ग्रामीण इलाकों में ही ज़्यादा होती हैं मौतें

सांपों के काटने से सबसे ज्यादा मौत ग्रामीण इलाकों में होती है, क्योंकि वहां लोगों को इससे बचाव, प्राथमिक उपचार और सही इलाज की पर्याप्त जानकारी नहीं होती.वहीं, कई लोग सांप के काटने के बाद यह मान लेते हैं कि अब वे नहीं बचेंगे, जिससे वे घबरा जाते है.घबराने से ब्लड प्रेशर और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है, जिससे जहर तेजी से शरीर में फैल सकता है.इसलिए सबसे जरूरी है कि मरीज को शांत रखा जाए और बिना देरी किए अस्पताल पहुंचाया जाए, ताकि समय पर उचित इलाज मिल सके.आपको यह भी जानना चाहिए कि भारत में केवल चार प्रमुख जहरीली प्रजातियां ऐसी हैं, जिनके काटने से इंसान की जान जा सकती है, लेकिन वह भी तब जब समय पर इलाज न मिले. यदि समय रहते उपचार मिल जाए, तो कोबरा, कॉमन क्रेट, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर के काटने पर भी मरीज की जान बचाई जा सकती है.

घबराने के बजाय खुद को रखे शांत

यदि आपके आसपास किसी व्यक्ति को सांप काट ले, तो सबसे पहले उसे घबराने न दें और शांत रखें, ताकि उसका ब्लड प्रेशर न बढ़े.इसके बाद बिना किसी देरी के उसे नजदीकी अस्पताल ले जाएं.जितनी जल्दी मरीज अस्पताल पहुंचेगा, उसके बचने की संभावना उतनी ही अधिक होगी. हालांकि, अस्पताल पहुंचने से पहले कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए, ताकि जहर शरीर में तेजी से न फैले.

साँप के काटने वाले शरीर के अंग को हिलाने से बचे

यदि किसी को सांप काट ले, तो जहर शरीर में तेजी से तभी फैलता है, जब वह व्यक्ति बहुत ज्यादा घबरा जाए या शरीर को अधिक हिलाए-डुलाए.इसलिए मरीज को शांत रखें और जहां सांप ने काटा है, उस अंग की गतिविधि कम से कम रखें. कई लोग काटे गए स्थान पर ब्लेड या किसी नुकीली चीज से चीरा लगा देते हैं, लेकिन ऐसी गलती कभी भी नहीं करनी चाहिए.वहीं, कुछ लोग सांप को पकड़ने की कोशिश भी करते हैं, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि वह दोबारा भी काट सकता है.

सिर के बल लिटाएं

अगर किसी व्यक्ति को सांप ने काट लिया है, तो उसे सिर के बल लिटाएं. जिस जगह सांप ने काटा है, उस हिस्से को ज्यादा हिलने-डुलने न दे.यदि संभव हो तो घाव को साफ पानी और साबुन से हल्के हाथों से साफ करें तथा साफ सूती कपड़े से ढक दें. इसके बाद मरीज को तुरंत अस्पताल लेकर जाएं. जानकारी के लिए बता दें कि देश के लगभग सभी राज्यों और जिलों के सरकारी अस्पतालों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी स्नेक वेनम (ASV) उपलब्ध रहता है. यही दवा सांप के काटने वाले मरीजों को दी जाती है, जिससे जहर के असर को कम किया जा सकता है और मरीज के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है.