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रसोई में सिलबट्टे से मिक्सर ग्राइंडर और स्मार्ट उपकरण तक का सफर, ऐसे बदली भारतीय किचन की तस्वीर

Rashmi Prasad  CE
Rashmi Prasad CE
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टीनपी डेस्क (TNP DESK): भारतीय रसोई का इतिहास सिर्फ खाने के स्वाद से नहीं, बल्कि बदलती तकनीक और जीवनशैली से भी जुड़ा है. एक समय था जब मसाले पीसने, चटनी बनाने और दाल तैयार करने के लिए सिलबट्टे और ओखली-मूसल का इस्तेमाल किया जाता था. इन कामों में काफी समय और मेहनत लगती थी, लेकिन इससे तैयार मसालों और चटनी के स्वाद को खास माना जाता था. धीरे-धीरे घरों में बिजली पहुंची और रसोई के कामों में भी तकनीक का प्रवेश हुआ. सिलबट्टे से शुरू हुआ यह सफर आज मिक्सर ग्राइंडर, फूड प्रोसेसर, माइक्रोवेव और स्मार्ट किचन उपकरण तक पहुंच चुका है.

सिलबट्टा और ओखली-मूसल से शुरू हुई कहानी

पुराने समय में भारतीय घरों की रसोई में सिलबट्टा एक जरूरी हिस्सा हुआ करता था. हरी मिर्च, धनिया, लहसुन, अदरक और अलग-अलग मसालों को सिल पर रखकर बट्टे से पीसा जाता था. चटनी और मसाले तैयार करने में मेहनत तो लगती थी, लेकिन कई लोगों का मानना था कि हाथ से पिसे मसालों का स्वाद और खुशबू अलग होती है. इसी तरह अनाज और दूसरे खाद्य पदार्थों को कूटने के लिए ओखली-मूसल का इस्तेमाल किया जाता था. यह काम घर के रोजमर्रा के श्रम का हिस्सा था.

हाथ से चलने वाले उपकरणों से बिजली तक

समय के साथ लोगों की जीवनशैली बदलने लगी. शहरों का विस्तार हुआ, परिवारों की दिनचर्या व्यस्त हुई और रसोई में कम समय में ज्यादा काम करने की जरूरत महसूस होने लगी. इसी दौर में हाथ से चलने वाले उपकरणों की जगह बिजली से चलने वाले घरेलू उपकरणों ने लेना शुरू किया. ग्राइंडर और दूसरे इलेक्ट्रिक उपकरणों ने मसाले पीसने और खाद्य सामग्री तैयार करने का काम काफी आसान कर दिया. अब घंटों की मेहनत वाला काम कुछ ही मिनटों में पूरा होने लगा.

मिक्सर ग्राइंडर ने बदला किचन का काम

भारतीय रसोई में मिक्सर ग्राइंडर का आना एक बड़ा बदलाव माना जा सकता है. मसाले पीसने से लेकर चटनी, शेक, प्यूरी और बैटर तैयार करने तक इसके इस्तेमाल ने खाना बनाने की प्रक्रिया को आसान बना दिया. अलग-अलग जार और ब्लेड के कारण एक ही उपकरण से कई तरह के काम किए जाने लगे. खासकर कामकाजी परिवारों के लिए यह उपकरण समय बचाने वाला साबित हुआ. धीरे-धीरे मिक्सर ग्राइंडर भारतीय किचन का आम हिस्सा बन गया.

फ़ूड प्रोसेसर और माइक्रोवेव ने बढ़ाई सुविधा

इसके बाद रसोई में फ़ूड प्रोसेसर, माइक्रोवेव ओवन, इलेक्ट्रिक केतली, इंडक्शन कुकटॉप और दूसरे उपकरण शामिल होने लगे. सब्जियां काटना, आटा गूंथना, खाना गर्म करना या कम समय में खाना तैयार करना आसान हो गया. आधुनिक उपकरणों ने सिर्फ मेहनत कम नहीं की, बल्कि खाना बनाने की प्रक्रिया को भी अधिक व्यवस्थित बनाया. इससे रसोई में काम करने वाले लोगों के पास दूसरे जरूरी कामों के लिए भी समय बचने लगा.

अब स्मार्ट किचन अप्लायंसेज़ का दौर

आज रसोई का सफर स्मार्ट तकनीक तक पहुंच गया है. स्मार्ट उपकरण में डिजिटल कंट्रोल, ऑटोमैटिक प्रोग्राम, टाइमर और कुछ मामलों में मोबाइल कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं मिलने लगी हैं. स्मार्ट ओवन, स्मार्ट एयर फ्रायर, स्मार्ट कॉफी मशीन और अन्य उपकरण उपयोगकर्ता की जरूरत के अनुसार अलग-अलग मोड पर काम कर सकते हैं. तकनीक का उद्देश्य अब केवल मेहनत कम करना नहीं, बल्कि खाना बनाने की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और नियंत्रित बनाना भी है.

सिलबट्टे का स्वाद और स्मार्ट किचन की रफ्तार

हालांकि आधुनिक उपकरणों ने रसोई के काम को काफी आसान बना दिया है, लेकिन सिलबट्टे की जगह पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. आज भी कई घरों में खास चटनी और मसाले पारंपरिक तरीके से तैयार किए जाते हैं. एक ओर सिलबट्टा भारतीय रसोई की परंपरा और स्वाद से जुड़ा है, तो दूसरी ओर स्मार्ट उपकरण को लेकर बदलती जीवनशैली और तकनीकी विकास की पहचान हैं. इस तरह भारतीय किचन ने मेहनत से सुविधा और सुविधा से स्मार्ट तकनीक तक लंबा सफर तय किया है.