टीएनपी डेस्क (TNP DESK): आज की तेज रफ्तार जिंदगी में किसी बात को लेकर ज्यादा सोचना यानी ओवरथिंकिंग आम समस्या बनती जा रही है. काम का तनाव, रिश्तों की चिंता, भविष्य को लेकर डर या छोटी-सी गलती को बार-बार याद करना दिमाग को लगातार व्यस्त रख सकता है. कई बार व्यक्ति किसी समस्या का समाधान खोजने के बजाय उसी बात को अलग-अलग तरीके से सोचता रहता है. लंबे समय तक ऐसा होने पर मानसिक थकान महसूस हो सकती है और रोजमर्रा के काम पर भी इसका असर पड़ सकता है.
एक ही बात बार-बार सोचने से बढ़ सकता है तनाव
जब दिमाग किसी एक विचार में लगातार उलझा रहता है, तो व्यक्ति को मानसिक रूप से आराम करना मुश्किल हो सकता है. बार-बार नकारात्मक विचार आने से बेचैनी, चिड़चिड़ापन और ध्यान लगाने में परेशानी महसूस हो सकती है. कुछ लोगों को रात में सोते समय पुरानी बातें या आने वाली परिस्थितियां याद आने लगती हैं, जिससे नींद का पैटर्न भी प्रभावित हो सकता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हर समस्या पर लगातार सोचते रहना जरूरी नहीं है. जरूरी यह है कि समस्या और उसके समाधान के बीच फर्क समझा जाए.
खुद को व्यस्त रखने के बजाय दिमाग को दें ब्रेक
ओवरथिंकिंग कम करने के लिए सबसे पहले यह पहचानना जरूरी है कि आप कब जरूरत से ज्यादा सोच रहे हैं. जब कोई विचार बार-बार दिमाग में आ रहा हो, तो कुछ देर के लिए अपना ध्यान किसी दूसरे काम पर लगाएं. किताब पढ़ना, हल्का संगीत सुनना, टहलना, पौधों की देखभाल करना या किसी पसंदीदा गतिविधि में समय बिताना मददगार हो सकता है. हालांकि, खुद को लगातार व्यस्त रखना ही समाधान नहीं है. दिमाग को कुछ समय शांत रहने देना भी जरूरी है.
Deep Breathing से करें Mind Relax
गहरी सांस लेने की आसान एक्सरसाइज तनाव के समय मन को शांत करने में मदद कर सकती है. इसके लिए आराम से बैठकर धीरे-धीरे सांस अंदर लें और फिर उतनी ही सहजता से बाहर छोड़ें. कुछ मिनट तक इस प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करें. इससे आपका ध्यान बार-बार आने वाले विचारों से हटकर सांसों पर जा सकता है. मेडिटेशन और माइंडफुलनेस जैसी तकनीकें भी अपने विचारों को समझने और वर्तमान पल पर ध्यान लगाने में मदद कर सकती हैं.
हर बात को कंट्रोल करने की कोशिश न करें
ओवरथिंकिंग की एक बड़ी वजह ऐसी चीजों को लेकर चिंता करना हो सकती है, जिन पर हमारा नियंत्रण नहीं होता. इसलिए अपनी ऊर्जा उन चीजों पर लगाएं जिन्हें आप वास्तव में बदल सकते हैं. अगर किसी समस्या का समाधान आपके हाथ में है, तो उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर कदम उठाएं. वहीं, जिन परिस्थितियों को आप नियंत्रित नहीं कर सकते, उन्हें स्वीकार करना सीखना मानसिक तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है.
सोने से पहले मोबाइल और तनाव से बनाएं दूरी
रात में बिस्तर पर जाने के बाद फोन चलाते रहना या काम से जुड़ी बातें सोचते रहना दिमाग को आराम का मौका नहीं देता. इसलिए सोने से कुछ समय पहले स्क्रीन टाइम कम करने की कोशिश करें. अगले दिन के जरूरी कामों की एक छोटी सूची पहले ही बना लें, ताकि सोते समय उन्हें लेकर बार-बार सोचने की जरूरत न पड़े. नियमित नींद, संतुलित खान-पान और शारीरिक गतिविधि भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं.
कब एक्सपर्ट की मदद लेनी चाहिए?
अगर ओवरथिंकिंग लगातार बनी हुई है और इसका असर आपकी नींद, काम, पढ़ाई, रिश्तों या रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना बेहतर हो सकता है. समय पर मदद लेने से समस्या को समझने और उससे निपटने के सही तरीके सीखने में सहायता मिल सकती है. याद रखें, हर विचार का जवाब ढूंढना जरूरी नहीं है; कई बार दिमाग को बस थोड़ा आराम देने की जरूरत होती है.
