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फोन बजा भी नहीं, फिर भी बार-बार स्क्रीन देखते हैं? एक्सपर्ट्स ने बताई चौंकाने वाली वजह

Rashmi Prasad
Rashmi Prasad
Copy Editor

टीनपी डेस्क (TNP DESK): क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि फोन की कोई घंटी नहीं बजी, कोई मैसेज नोटिफिकेशन नहीं आया और फिर भी हाथ अपने आप जेब या टेबल पर रखे फोन की तरफ चला जाता है? आप स्क्रीन ऑन करते हैं, कुछ सेकंड तक देखते हैं और फिर फोन वापस रख देते हैं. थोड़ी देर बाद यही सिलसिला दोबारा शुरू हो जाता है. अगर ऐसा अक्सर होता है तो जरूरी नहीं कि आप किसी जरूरी कॉल या मैसेज का इंतजार कर रहे हों. इसके पीछे हमारा दिमाग, आदत और स्मार्टफोन से मिलने वाला लगातार डिजिटल जिम्मेदार हो सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, बार-बार फोन चेक करना कई लोगों में एक तरह का ऑटोमैटिक बिहेवियर बन जाता है, जिसे व्यक्ति बिना ज्यादा सोचे करता रहता है.

दिमाग को मिलती है 'कुछ नया' मिलने की उम्मीद

स्मार्टफोन का इस्तेमाल सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं रह गया है. सोशल मीडिया, मैसेज, ईमेल, शॉर्ट वीडियो, न्यूज और दूसरे ऐप्स लगातार नई जानकारी उपलब्ध कराते हैं. जब कभी फोन देखने पर कोई नया मैसेज, लाइक या दूसरी दिलचस्प चीज मिलती है, तो दिमाग उस अनुभव को याद रखता है. इसके बाद कई बार बिना किसी नोटिफिकेशन के भी व्यक्ति फोन चेक करने लगता है, क्योंकि उसे उम्मीद होती है कि शायद इस बार कुछ नया देखने को मिल जाए. इसे समझने के लिए आप इसे छोटे-छोटे 'रिवॉर्ड' से जोड़ सकते हैं. हर बार फोन देखने पर कुछ दिलचस्प मिलना जरूरी नहीं है, लेकिन कभी-कभी मिलने वाला नया कंटेंट उस आदत को मजबूत कर सकता है. यही वजह है कि कुछ लोगों को फोन चेक किए बिना बेचैनी या अधूरापन महसूस होने लगता है.

'फैंटम नोटिफिकेशन' भी हो सकता है कारण

कुछ लोगों को ऐसा भी महसूस होता है कि फोन बजा, वाइब्रेट हुआ या नोटिफिकेशन आया, जबकि वास्तव में ऐसा कुछ नहीं हुआ. इसे आम तौर पर फैंटम नोटिफिकेशन या फैंटम वाइब्रेशन जैसी अनुभूति से जोड़ा जाता है. लंबे समय तक फोन के नोटिफिकेशन और वाइब्रेशन के आदी होने पर हमारा दिमाग मामूली आवाज या शरीर की हल्की हलचल को भी फोन से जोड़ सकता है. ऐसी स्थिति में व्यक्ति तुरंत स्क्रीन चेक कर लेता है. फोन पर कुछ न मिलने के बावजूद वह थोड़ी देर बाद फिर उसे देखने लगता है. हालांकि, कभी-कभार ऐसा होना अपने आप में किसी बीमारी का संकेत नहीं है. समस्या तब बन सकती है जब फोन चेक करने की आदत काम, पढ़ाई, बातचीत या नींद में लगातार बाधा डालने लगे.

खाली समय में फोन बन जाता है सबसे आसान विकल्प

फोन बार-बार देखने की एक बड़ी वजह बोरियत और खाली समय भी हो सकती है. लाइन में खड़े होने, बस का इंतजार करने, खाना खाने या कुछ मिनट खाली बैठने के दौरान हमारा दिमाग तुरंत किसी गतिविधि की तलाश करता है. स्मार्टफोन इस जरूरत का सबसे आसान जवाब बन चुका है. कुछ सेकंड का खाली समय मिलते ही सोशल मीडिया खोलना, स्क्रीन स्क्रॉल करना या मैसेज चेक करना धीरे-धीरे आदत में बदल सकता है. यही कारण है कि कई लोग किसी काम के बीच में भी अचानक फोन उठा लेते हैं, जबकि उन्हें वास्तव में किसी सूचना की जरूरत नहीं होती.

बार-बार स्क्रीन देखने की आदत कैसे कम करें?

विशेषज्ञों के मुताबिक, सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आप फोन कब और क्यों चेक करते हैं. अगर हर कुछ मिनट में हाथ फोन की तरफ जाता है, तो नोटिफिकेशन कम करना, गैर-जरूरी ऐप्स की अलर्ट बंद करना और फोन को नजरों से दूर रखना मददगार हो सकता है. कुछ समय के लिए स्क्रीन टाइम लिमिट तय करना भी उपयोगी है. इसके अलावा, खाली समय में फोन की जगह दूसरी छोटी गतिविधियां अपनाई जा सकती हैं. बातचीत के दौरान फोन को दूर रखना और सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना भी अच्छी आदत है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर बार फोन देखना जरूरी नहीं होता. कई बार फोन नहीं, बल्कि हमारा दिमाग ही किसी नए अपडेट की तलाश कर रहा होता है.