Jharkhand

राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर झारखंड आंदोलन का क्या पड़ेगा असर? सरकार पर क्यों बढ़ा दवाब 

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

टीएनपी डेस्क:  दिल्ली के जंतर मंतर के बाद झारखंड छात्रों के आंदोलन का केंद्र बन गया है.  सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर भी झारखंड सरकार छात्रों के निशाने पर है.  यह  अलग बात है कि झारखंड सरकार बातचीत से समाधान निकालने की कोशिश कर रही है.  लेकिन मामला कहीं ना कहीं अटक जा रहा है.  9 अगस्त को बातचीत हुई, लेकिन सीबीआई जांच को लेकर मामला फंस  गया.  कांग्रेस नेता राहुल गांधी अभी देश में घूम-घूम कर छात्रों की गूंज कार्यक्रम चला  रहे हैं.  ऐसे में उन पर भी झारखंड को लेकर बड़ा दबाव है, क्योंकि झारखंड सरकार में कांग्रेस भी हिस्सेदार है.  यह  अलग बात है कि राहुल गांधी कह  चुके हैं कि जहां भी छात्रों पर अत्याचार होता है ,हम उसका विरोध करेंगें.

कांग्रेस नेता राहुल गाँधी  ने क्या कहा है 

झारखंड में हुए लाठी चार्ज के संबंध में उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा है कि झारखंड में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल का इस्तेमाल गलत है.  छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है और बातचीत से ही समाधान निकल सकता है.  झारखंड सरकार को इन छात्रों की बात सुननी  चाहिए और हर समस्या का तुरंत समाधान करना चाहिए।  दूसरी ओर डुमरी के विधायक जयराम महतो ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा है कि

क्या कहा है विधायक जयराम महतो ने
 
झारखंड विधानसभा का घेराव कर रहें छात्रों पर पुलिस का डंडा शासन की विफलता हैं.  मैं इसकी घोर शब्दों में निंदा करता हूँ। रात के अंधेरे में छात्रों पर किया गया लाठीचार्ज अंग्रेज़ी हुकूमत के दौर के अत्याचारों की याद दिलाता है.  लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण अपनी आवाज़ उठाने वाले छात्रों पर इस तरह की कार्रवाई किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है. सरकार के पास बातचीत कर रास्ता निकालने का पर्याप्त समय था.  लेकिन सरकार ने इस गंभीर समस्या की गंभीरता को नहीं समझी। लाठीचार्ज के बाद सीधे सदर अस्पताल पहुंचकर घायल छात्रों से मुलाकात की। घायल छात्रों का हाल जाना। इसके बाद जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचकर छात्रों से मुलाकात की.  उनके साथ आगे की रणनीति पर विशेष चर्चा हुई और उनका हौसला बढ़ाया।जब JPSC के अध्यक्ष गिरफ्तार हो गए, तीनों सदस्यों को इस्तीफा देना पड़ा. इसका मतलब है ये प्रमाणित है कि अनियमितता तो हुई है.  एक विश्वविद्यालय के एक विषय के सभी 33 छात्र CDPO बन गए। वो भी ऐसे विश्वविद्यालय से जहाँ कोई पढ़ने लिखने वाला छात्र पढ़ना नहीं चाहते हैं. टीडीपीएल के अभय तिवारी ने स्वीकार किया है कि 40-60 लाख रुपये वसूले गए थे, फिर सरकार को CBI जाँच करवाने में क्या परेशानी है ? ये बात समझ से परे है।  मैं पुनः माँग करता हूँ सरकार इन नियुक्ति घोटाले की जाँच CBI से करवाये। CGL को रद्द करें, TDBL के सभी परीक्षाओं को रद्द करे. दुर्भाग्यपूर्ण लाठीचार्ज घटना की उच्च स्तरीय जाँच उच्च न्यायालय के किसी रिटायर न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जाँच करवाये.संघर्ष कठिन हो सकता है, लेकिन हक़ की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता. संघर्ष जारी है...

क्या कहा है मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 

आज के छात्र आंदोलन के दौरान संयम, संवेदनशीलता और पूरी जिम्मेदारी के साथ स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन और पुलिस के सभी अधिकारियों एवं जवानों का मैं धन्यवाद करता हूं।
मेरे प्यारे युवा साथियों,
आपने अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ उठाई। लोकतंत्र में अपनी बात रखने का आपका अधिकार है और आपकी आवाज़ का सम्मान करना सरकार की जिम्मेदारी है।सरकार ने आपकी बात सुनी है। हमारे सरकार के वरिष्ठ मंत्रीगण आपसे लगातार संवाद करते रहे हैं और मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि आपकी मांगों पर पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई होगी।पिछले कुछ दिनों में आपने देखा है कि दोषी चाहे कोई भी हो, सरकार ने किसी को भी बख्शा नहीं है। हमारा स्पष्ट उद्देश्य है कि व्यवस्था में ऐसी कमियां दूर हों, जिससे भविष्य में किसी भी छात्र को परेशानी न उठानी पड़े।
हम परीक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना चाहते हैं। इस बदलाव में आपकी भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है।
हमारा प्रयास है कि झारखंड केवल समस्याओं की चर्चा न करे, बल्कि यहाँ से समाधान की एक नई मिसाल कायम करे। यह भी समझता हूं कि आपके शांतिपूर्ण आंदोलन के बीच विपक्ष के कुछ लोगों ने राजनीतिक लाभ के लिए माहौल बिगाड़ने और छात्रों को भटकाने की कोशिश की। आप सभी से अपील है कि आप ऐसे किसी भी राजनीतिक नैरेटिव के बहकावे में न आएं।आप झारखंड का भविष्य हैं। आपकी आवाज़ को नजरअंदाज करना नहीं, उसे सुनना और आपकी समस्याओं का समाधान करना हमारी जिम्मेदारी है।मैं अपनी बात दोहराऊंगा कि आइए, संवाद और विश्वास के साथ मिलकर इस मुद्दे का समाधान करें।