Jharkhand

ईचागढ़ में हाथियों का कहर: घर की दीवार तोड़कर घुसे जंगली हाथी, मलबे में दबकर महिला घायल

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

सरायकेला (SARAIKELA): जिले के ईचागढ़ प्रखंड अंतर्गत मौसाढ़ा गांव में मंगलवार रात हाथी-मानव संघर्ष की एक और घटना सामने आई है. भोजन और पानी की तलाश में गांव पहुंचे जंगली हाथियों के झुंड ने एक घर को नुकसान पहुंचा दिया, जिससे घर के अंदर सो रही एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई. घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है, वहीं ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भारी नाराजगी देखने को मिल रही है.

ग्रामीणों के अनुसार, देर रात हाथियों का झुंड मौसाढ़ा गांव में घुस आया. अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे, तभी हाथियों ने एक मकान की दीवार तोड़ दी. दीवार गिरने से घर के भीतर सो रही महिला मलबे के नीचे दब गई और गंभीर रूप से घायल हो गई. घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद महिला को बाहर निकाला और इलाज के लिए अस्पताल भेजा.

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में पिछले कुछ समय से हाथियों की आवाजाही बढ़ गई है, जिससे लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि तिरुलडीह स्थित सुवर्णरेखा नदी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हो रहे बालू खनन के कारण हाथियों का प्राकृतिक रास्ता प्रभावित हुआ है, जिससे वे भटककर आबादी वाले इलाकों में पहुंच रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के लगातार गांवों में प्रवेश करने से लोगों में भय का माहौल बना हुआ है. फसलों को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ अब जान-माल का खतरा भी बढ़ गया है.

घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं. उनका आरोप है कि घटना की सूचना दिए जाने के बावजूद कोई अधिकारी या कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा. ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में न तो नियमित निगरानी की जा रही है और न ही हाथियों को आबादी वाले इलाकों से दूर रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं. गांव के लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, जिसके कारण ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं.

घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से घायल महिला के बेहतर इलाज, उचित मुआवजा और हाथियों के आतंक से राहत दिलाने के लिए स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में और भी बड़ी घटनाएं हो सकती हैं. फिलहाल गांव में दहशत का माहौल है और लोग रात के समय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.

रिपोर्ट : बीरेंद्र मण्डल