Jharkhand

चाय बेचने वाले पिता का बेटा बना BDO, संघर्ष और मेहनत की कहानी बनी मिसाल

Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor
चाय बेचने वाले पिता का बेटा बना BDO, संघर्ष और मेहनत की कहानी बनी मिसाल

साहिबगंज (SAHIBGANJ): कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और माता-पिता का साथ मिले तो कोई भी मुश्किल मंजिल का रास्ता नहीं रोक सकती. इस बात को सच साबित कर दिखाया है बिहार के कटिहार जिले के बरारी प्रखंड अंतर्गत मोहना चांदपुर गांव निवासी सौरभ कुमार अकेला ने. आर्थिक तंगी और अभावों के बीच पले-बढ़े सौरभ ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में सफलता हासिल कर प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) का पद प्राप्त किया है. उनकी इस उपलब्धि ने न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है.

सौरभ की सफलता के पीछे उनके पिता श्रीकांत मिश्रा और मां का वर्षों का त्याग, संघर्ष और समर्पण छिपा है. बेहतर रोजी-रोटी और बेटे की पढ़ाई के लिए श्रीकांत मिश्रा अपने गांव से निकलकर झारखंड के साहिबगंज पहुंचे, जहां उन्होंने एक छोटी-सी चाय की दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण किया. सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने कभी अपने बेटे की शिक्षा में कमी नहीं आने दी. दिनभर चाय बेचकर जो भी आय होती, उसी से घर का खर्च चलता और बेटे की पढ़ाई का इंतजाम किया जाता. आर्थिक परेशानियां कई बार सामने आईं, लेकिन श्रीकांत मिश्रा ने हार नहीं मानी. उनका मानना था कि शिक्षा ही वह रास्ता है, जो उनके बेटे का भविष्य बदल सकती है.

BPSC परीक्षा में सौरभ की सफलता की खबर मिलते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई. पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े. उन्होंने भावुक होकर कहा कि जीवन में कई कठिन दौर आए, लेकिन बेटे की पढ़ाई कभी नहीं रुकने दी. आज बेटे की सफलता ने वर्षों की मेहनत और संघर्ष को सार्थक कर दिया है. वहीं सौरभ की मां ने भी अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि परिवार ने अभावों में जीवन बिताया, लेकिन हमेशा बेटे के उज्ज्वल भविष्य की कामना की. आज उसका अधिकारी बनना पूरे परिवार के लिए गर्व और खुशी का सबसे बड़ा अवसर है.

सौरभ कुमार अकेला की यह सफलता उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी के बावजूद बड़े सपने देखते हैं. यह कहानी बताती है कि कठिन परिस्थितियां सफलता की राह में बाधा नहीं बनतीं, यदि मेहनत, लगन और परिवार का सहयोग साथ हो. सौरभ की उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि संघर्ष चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, निरंतर प्रयास से हर मंजिल हासिल की जा सकती है.

रिपोर्ट : गोविंद ठाकुर