Jharkhand

विकास के दावों पर सवाल! सड़क न होने से खटिया बनी मरीजों की एंबुलेंस, देखिए Video

Varsha Varma CE
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साहिबगंज (SAHIBGANJ): जिले के चपड़ी गांव से एक बार फिर ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी सच्चाई सामने आई है. यहां की 45 साल की महिला सोमी पहाड़िन की तबीयत अचानक गंभीर हो गई, लेकिन गांव में सड़क सुविधा नहीं होने के कारण परिजनों को उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए खटिया का सहारा लेना पड़ा.

परिजनों और ग्रामीणों ने मिलकर महिला को खटिया पर लिटाया और कई किलोमीटर तक खेतों, पगडंडियों और कच्चे रास्तों से होकर पैतृक गांव चपड़ी तक ले गए. आज भी कई आदिवासी और ग्रामीण इलाके बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं.

सोमी पहाड़िन पिछले एक महीने से अपनी बहन के घर गुटी बेड़ा में रह रही थीं और अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई. जब स्थिति गंभीर हुई तो परिवार ने एंबुलेंस बुलाने की कोशिश की, लेकिन गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण वाहन पहुंचना संभव नहीं हो सका. मजबूरी में ग्रामीणों को खटिया पर ही मरीज को ढोना पड़ा.

स्थानीय लोगों का कहना है कि चपड़ी गांव की स्थिति वर्षों से जस की तस बनी हुई है. बरसात के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जब पूरा संपर्क प्रखंड मुख्यालय से लगभग टूट जाता है. ऐसे में मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए खटिया ही एकमात्र सहारा बन जाती है. कई बार समय पर इलाज न मिलने से जान तक खतरे में पड़ जाती है.

इस घटना पर सामाजिक कार्यकर्ता बेंजामिन मालतो ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह केवल एक महिला की परेशानी नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य और विकास तंत्र की विफलता का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि सरकार बड़े-बड़े विकास के दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी बेहद खराब है. उन्होंने आगे कहा कि जब तक गांवों तक सड़क नहीं पहुंचेगी, तब तक एंबुलेंस और स्वास्थ्य सेवाओं के दावे अधूरे रहेंगे. खटिया पर मरीजों को ढोना किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक स्थिति है.

घटना के बाद ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक धनंजय सोरेन और जिला प्रशासन से जल्द से जल्द चपड़ी गांव तक पक्की सड़क निर्माण, नियमित स्वास्थ्य शिविर और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के दशकों बाद भी यदि मरीजों को खटिया पर ढोना पड़े, तो यह विकास व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है.

रिपोर्ट- गोविंद ठाकुर