Jharkhand

कई दिनों बाद आज भरपेट खाना खाएंगे साहिबगंज के इस स्कूल के बच्चे, परोसा जाएगा मिड-डे मील

Priyanka Kumari CE
Sr. Content Writer
कई दिनों बाद आज भरपेट खाना खाएंगे साहिबगंज के इस स्कूल के बच्चे, परोसा जाएगा मिड-डे मील

साहिबगंज (SAHIBGANJ): सरकार की ओर से गरीब बच्चों के लिए मिड-डे मील की व्यवस्था की गई है. सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को दोपहर का भोजन स्कूल में ही दिया जाता है, ताकि वे पेट भर खाना खाने के बाद मन लगाकर पढ़ाई कर सकें. लेकिन स्कूल प्रबंधन की लापरवाही या फिर सही व्यवस्था नहीं होने की वजह से बच्चों को भूखे पेट ही पढ़ाई करनी पड़ती है.दरअसल, हम बात कर रहे हैं झारखंड के साहिबगंज जिले के राजमहल प्रखंड स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय ढोलबज्जा की. इस स्कूल में पिछले कई दिनों से मिड-डे मील का खाना नहीं बन रहा था. ऐसे में बच्चे भूखे पेट पढ़ने को मजबूर थे.अब जरा सोचिए, इन मासूम छोटे बच्चों का भूखे पेट पढ़ाई में कितना मन लगता होगा.

भूखे पेट पढने को मजबूर बच्चे

दरअसल, मिड-डे मील सरकार की ओर से चलाई जाने वाली ऐसी योजना है, जो यह सुनिश्चित करती है कि सरकारी स्कूलों में सुबह 10 बजे से पढ़ने आने वाले बच्चों को दोपहर का भोजन स्कूल में ही मिले.बच्चे सुबह 10 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक स्कूल में रहते है.इस दौरान उन्हें भूख भी लगती है.इसी बात का ध्यान रखते हुए सरकार ने स्कूलों में मिड-डे मील की व्यवस्था शुरू की.लेकिन झारखंड के साहिबगंज जिले में सरकार की महत्वाकांक्षी मिड-डे मील योजना की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है. ताजा मामला राजमहल प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय,ढोलबज्जा का है,जहां लगातार कई दिनों तक छात्र-छात्राओं को मध्यान भोजन नहीं दिया गया. इससे सैकड़ों बच्चे सरकार की पोषण योजना के लाभ से वंचित रहे.

निर्धारित मेन्यू से अंडा भी गायब

जानकारी के अनुसार निर्धारित मेन्यू के तहत बच्चों को अंडा दिया जाना था,लेकिन विद्यालय में न तो अंडा वितरित किया गया और न ही मध्यान भोजन की व्यवस्था की गई.लगातार तीन दिनों तक योजना बंद रहने से अभिभाव कों और स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी गई.लोगों का कहना है कि बच्चों के पोषण से जुड़ी इतनी महत्वपूर्ण योजना में इस तरह की लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है.घटना के बाद सवाल उठने लगे हैं कि आखिर तीन दिनों तक मध्यान भोजन बंद रहने की जानकारी विद्यालय प्रबंधन समिति और संबंधित विभा गीय अधिकारियों को क्यों नहीं मिली.यदि जानकारी थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई.मामले पर प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी कुणाल किशोर ने कहा कि उन्हें विद्यालय में 5 दिनों से मध्यान भोजन बंद रहने की जानकारी नहीं थी.उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में मध्यान भोजन योजना बंद नहीं की जा सकती,क्योंकि यह बच्चों के पोषण और विद्यालय में उनकी नियमित उपस्थिति से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना है.

उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों को फटकार लगाते हुए 25 जुलाई से एमडीएम शुरू करने का निर्देश दिया है.आगे उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध विभागीय स्तर पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

दोपहर में खाने के लिए शिक्षक को घर भेज देते थे शिक्षक

स्कूल में पढ़ने वाले छोटे मासूम बच्चों से जब पूछा गया कि उन्हें कितने दिनों से खाना नहीं मिल रहा है.तो बच्चों ने भी साफ कहा है कि पिछले कई दिनों से उन्हें MDM का खाना नहीं मिल रहा है.वही स्कूल के टीचर उन्हें दोपहर के समय घर खाना खाने के लिए भेजते है.आपको बता दें कि इन मासूम बच्चों के लिए ही सरकार करोड़ों रुपये शिक्षा के लिए खर्च कर रही है.और हर सुविधा देती है ताकि बच्चों को कोई भी परेशानी ना हो. लेकिन स्कूल प्रबंधन की ओर से आए दिन ऐसे-ऐसे कारनामे देखने को मिलते है.जो उन्हें कटघरे में खड़े कर देते है तो वहीं दूसरी तरफ बच्चों के भविष्य पर भी प्रश्न चिन्ह लगाते है.

रिपोर्ट-गोविंद ठाकुर