Jharkhand

झारखंड के डैम में दौड़ेगी वाटर मेट्रो? पतरातू से चांडिल तक बदल सकती है पर्यटन की तस्वीर, जानिए कैसे

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

टिएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड में पर्यटन को नई दिशा देने के लिए वाटर मेट्रो एक बड़ा विकल्प बन सकती है. राज्य में कई बड़े डैम और जलाशय हैं, जो पहले से ही पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. अगर इन जलस्रोतों पर वाटर मेट्रो की सुविधा शुरू होती है तो लोगों को घूमने के साथ जल परिवहन का एक नया अनुभव भी मिल सकता है.

केरल के कोच्चि में वाटर मेट्रो परियोजना सफलतापूर्वक चल रही है. इसी परियोजना के तकनीकी निदेशक और मुख्य महाप्रबंधक शाजी जनार्दन का कहना है कि झारखंड में भी इस तरह की व्यवस्था की अच्छी संभावना है. उनके मुताबिक पतरातू, तिलैया और चांडिल जैसे बड़े जलाशयों में वाटर मेट्रो को पर्यटन और परिवहन से जोड़ा जा सकता है.

इसके अलावा साहिबगंज और राजमहल के बीच जल परिवहन के लिए भी यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है. इससे स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है.

बैटरी और डीजल से चल सकती है वाटर मेट्रो

झारखंड में प्रस्तावित वाटर मेट्रो को जरूरत के हिसाब से हाइब्रिड मोड में चलाया जा सकता है. यानी इसमें बैटरी और डीजल दोनों का इस्तेमाल संभव है. राज्य में साल के ज्यादातर समय अच्छी धूप रहने के कारण सोलर ऊर्जा से इसे जोड़ने की संभावना भी बताई जा रही है.

शाजी जनार्दन के मुताबिक, उनकी टीम भारत के अलावा वियतनाम, सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों में भी वाटर मेट्रो परियोजनाओं को लेकर सलाह दे रही है. उनका कहना है कि जल परिवहन को इस तरह विकसित किया जा सकता है कि स्थानीय जैव विविधता पर कम से कम असर पड़े.

कम खर्च में सफर, पर्यटन को भी फायदा

वाटर मेट्रो की एक बड़ी खासियत कम किराया बताया जा रहा है. कोच्चि में करीब 20 किलोमीटर की यात्रा के लिए अधिकतम 40 रुपये तक किराया लिया जाता है. ऐसे में झारखंड में भी इसे किफायती परिवहन के तौर पर विकसित किया जा सकता है.

कोच्चि मेट्रो परियोजना की वित्त निदेशक रंजिनी आर के मुताबिक, वाटर मेट्रो के लिए तैयार किया गया इंफ्रास्ट्रक्चर दूसरे कामों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे परियोजना की कमाई के दूसरे रास्ते भी खुल सकते हैं.

झारखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निजी कंपनियों की ब्रांडिंग और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप का सहारा भी लिया जा सकता है. अगर योजना जमीन पर उतरती है तो पतरातू, तिलैया और चांडिल जैसे जलाशयों को पर्यटन के साथ बेहतर परिवहन सुविधा से जोड़ा जा सकता है. इससे राज्य के वाटर टूरिज्म को नई पहचान मिलने की उम्मीद है.