रांची (RANCHI): झारखंड की राजनीति और कानूनी गलियारों में आज का दिन काफी अहम है. पर सबसे ज्यादा अगर आज का दिन किसी परिवार के लिए जरूरी है तो वो है सोरेन परिवार. दरअसल आज बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मामले को लेकर रांची की विशेष PMLA अदालत में सुनवाई होने वाली है. इस मामले में अदालत ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को शाम 4 बजे तक पेश होने का निर्देश दिया है. वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यवाही में शामिल होंगे.
अब बड़ा सवाल यहां ये है कि आखिर बड़गाईं जमीन मामला है क्या, जिसकी महज 8.86 एकड़ जमीन के तार खुद सीएम तक जुड़े हैं
दरअसल मामला रांची के बड़गाईं अंचल स्थित लगभग 8.86 एकड़ जमीन का है जिसे लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में आरोप लगाया गया है कि जमीन के रिकॉर्ड में कथित तौर पर हेरफेर, फर्जी दस्तावेज और सरकारी राजस्व अभिलेखों में छेड़छाड़ के जरिए जमीन पर कब्जा और उसके स्वरूप को बदलने की कोशिश की गई. ऐसे में झारखंड हाई कोर्ट के 18 सितंबर 2026 के आदेश में ED की जांच से जुड़े आरोपों में अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, ED की जांच मूल रूप से रांची के मोरहाबादी में 4.45 एकड़ डिफेंस लैंड से जुड़े मामले से आगे बढ़ी थी. जांच के दौरान एजेंसी को कथित जमीन सिंडिकेट, सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ और फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाने की जानकारी मिली है.
ED का आरोप है कि इस सिंडिकेट की गतिविधियां बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन तक भी पहुंचीं और यह जमीन कथित तौर पर सीएम हेमंत सोरेन के कब्जे और नियंत्रण में थी. जांच एजेंसी ने दावा किया है कि वह जमीन 12 प्लॉट में फैली हुई थी और एक साझा बाउंड्री वॉल से घिरी थी. ऐसे में ED के मुताबिक, 20 अप्रैल 2023 को जमीन का सर्वे किया गया था. एजेंसी के अनुसार, मौके पर मौजूद लोगों ने जमीन के मालिकाना हक और कब्जे को लेकर सीएम हेमंत सोरेन का नाम बताया था. बाद में 10 फरवरी 2024 को भी जमीन का दूसरा सर्वे किया गया. जहां इन दावों को ED ने अपनी जांच का हिस्सा बनाया. इसके बाद जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि बड़गाईं अंचल कार्यालय के रिकॉर्ड में हेरफेर की गई है. ED के अनुसार, तत्कालीन राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद से जुड़े ठिकानों की जांच में बड़ी संख्या में जमीन के दस्तावेज और मूल रजिस्टर मिले थे. एजेंसी का दावा है कि इन दस्तावेजों में कई जमीनों के अवैध अधिग्रहण से संबंधित जानकारी थी. इसके बाद ED की जांच में एक कथित "CMO URGENT" फाइल का भी जिक्र मिल है, जिसमें बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े राजस्व दस्तावेज होने का दावा किया गया है.
वहीं हेमंत सोरेन ने इस मामले में खुद को आरोपमुक्त किए जाने यानी डिस्चार्ज की मांग की थी. रांची की विशेष PMLA अदालत ने 8 जून 2026 को उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी थी. इसके बाद उन्होंने झारखंड हाई कोर्ट का रुख किया था. ऐसे में 18 सितंबर 2026 को हाई कोर्ट ने भी उन्हें तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया और निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी. इसके बाद PMLA अदालत में आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ.
ऐसे में आज यानी कि 21 सितंबर को विशेष PMLA अदालत में मुख्य सवाल यह है कि हेमंत सोरेन के खिलाफ इस मामले में आरोप तय किए जाएंगे या नहीं. अदालत ने उन्हें शाम 4 बजे तक पेश होने का निर्देश दिया है. शनिवार की पिछली सुनवाई में वह व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे और उनके वकील ने पूर्व निर्धारित संवैधानिक जिम्मेदारियों का हवाला दिया था. इसके बाद अदालत ने अगली तारीख 21 सितंबर तय की थी. इस मामले में भानु प्रताप प्रसाद समेत कई अन्य आरोपी भी हैं. अदालत पहले ही कई आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर चुकी है, जबकि कुछ आरोपियों के खिलाफ प्रक्रिया लंबित बताई गई है.
