Jharkhand

JPSC मुद्दे पर अनसन पर बैठेंगे टाइगर जयराम! बनेंगे छात्रों के समर्थक

Diksha Benipuri
Diksha Benipuri
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RANCHI:रांची में JPSC-JSSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. इस आंदोलन में अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ भी आ गया है. डुमरी विधायक जयराम महतो ने ऐलान किया है कि वह भी छात्रों के समर्थन में अनशन पर बैठेंगे. उनके इस फैसले के बाद आंदोलन को नई ताकत मिलने की संभावना जताई जा रही है. अब तक छात्र परीक्षा रद्द करने, निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. जयराम महतो के अनशन में शामिल होने की घोषणा के बाद इस मुद्दे ने राज्य की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है. खास बात यह है कि झारखंड विधानसभा का मॉनसून सत्र भी जारी है. ऐसे में JPSC-JSSC विवाद और छात्रों का आंदोलन सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है.

छात्रों का आरोप है कि JPSC की चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. आंदोलनरत अभ्यर्थी लगातार परीक्षा रद्द करने और मामले की CBI जांच कराने की मांग कर रहे हैं. कई दिनों से रांची में धरना, प्रदर्शन और अनशन का दौर जारी है. इससे पहले छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी आमरण अनशन पर बैठे थे, जिसके बाद सरकार और प्रशासन पर दबाव बढ़ा था. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों को कार्रवाई का भरोसा दिया है और मामले की जांच CID द्वारा किए जाने की बात कही है. इसके बावजूद छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और आंदोलन जारी है. माना जा रहा है कि मॉनसून सत्र के दौरान विपक्ष भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाकर सरकार को घेरने की तैयारी में है.

इसी बीच डुमरी विधायक जयराम महतो ने स्पष्ट किया है कि वह छात्रों की लड़ाई को अपनी लड़ाई मानते हैं और उनकी मांगों के समर्थन में अनशन पर बैठेंगे. उनके इस एलान के बाद आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिलने की उम्मीद बढ़ गई है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जनप्रतिनिधि भी सीधे आंदोलन में शामिल होते हैं तो सरकार पर समाधान निकालने का दबाव और बढ़ सकता है. अब सभी की नजर सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी है. यदि जल्द कोई सकारात्मक फैसला नहीं होता है तो JPSC विवाद और बड़ा राजनीतिक एवं सामाजिक आंदोलन का रूप ले सकता है. फिलहाल जयराम महतो के अनशन की घोषणा और विधानसभा के मॉनसून सत्र के बीच यह मामला झारखंड की सबसे बड़ी राजनीतिक बहस बन गया है और राज्यभर के अभ्यर्थियों की निगाहें आने वाले घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं.