Jharkhand

ये झारखंड है जनाब, यहां 70 लाख में बन जाएंगे अधिकारी! JPSC विवाद में अभय तिवारी के साथ होती थी डील

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

रांची (RANCHI): झारखंड में JPSC परीक्षा विवाद की जांच अब और गंभीर मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. CID के सामने आरोपी अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी ने कथित तौर पर परीक्षा में अभ्यर्थियों की सेटिंग, पदों के लिए रकम तय होने और इंटरव्यू में कथित मदद पहुंचाने को लेकर कई अहम दावे किए हैं. उसके बयान में JPSC के तत्कालीन सदस्यों अजीता भट्टाचार्य, जमाल अहमद और अनीमा हांसदा समेत पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते और TDPL के निदेशक रामवीर सिंह के नामों का उल्लेख किया गया है. हालांकि, ये सभी आरोप जांच का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है.

FRO और ACF पदों के लिए करोड़ों की कथित वसूली

अभय तिवारी के कथित बयान के मुताबिक, FRO और ACF पदों के लिए अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लेने की व्यवस्था थी. उसके अनुसार FRO के एक पद के लिए कथित तौर पर 20 से 25 लाख रुपये और ACF के लिए 30 से 35 लाख रुपये तक की बोली लगने का दावा किया गया. बयान में कहा गया कि उसके और कथित दलालों के जरिए FRO के 12 और ACF के 8 अभ्यर्थी उपलब्ध कराए गए. अभय के मुताबिक, इन 20 अभ्यर्थियों से कुल करीब 5.80 करोड़ रुपये जुटाए गए, जिसमें से लगभग एक करोड़ रुपये अपने पास रखने की बात उसने कथित तौर पर कही. इनमें 19 अभ्यर्थियों के परीक्षा में सफल होने और एक अभ्यर्थी के असफल रहने का दावा भी बयान में किया गया है. इन दावों की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी.

JPSC सिविल सेवा परीक्षा में भी कथित सेटिंग का आरोप

अभय तिवारी के बयान में 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं. कथित तौर पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए पांच लाख रुपये और एसटी-एससी अभ्यर्थियों के लिए दो से तीन लाख रुपये तक की रकम तय होने की बात कही गई. वहीं अंतिम चयन तक पहुंचाने के लिए प्रति अभ्यर्थी 60 से 70 लाख रुपये तक की कथित मांग का दावा किया गया है. बयान के अनुसार, अभ्यर्थियों की पैरवी TDPL के निदेशक रामवीर सिंह के माध्यम से JPSC के तत्कालीन सदस्यों और अध्यक्ष तक पहुंचाने की बात सामने आई. इसमें अजीता भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम और आदित्य पांडेय समेत कई लोगों के नामों का उल्लेख किया गया है.

सात अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने का दावा

अभय तिवारी ने कथित तौर पर सात अभ्यर्थियों को इस व्यवस्था से लाभ पहुंचाए जाने और प्रत्येक से करीब 15 लाख रुपये लिए जाने का दावा किया. आरोप है कि इंटरव्यू से पहले अभ्यर्थियों के कोड की पहचान यानी डी-कोडिंग कर उन्हें कथित तौर पर खास इंटरव्यू बोर्ड में भेजने की कोशिश की जाती थी. बयान में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ JPSC सदस्यों की ओर से TDPL निदेशक पर अभ्यर्थियों के कोड की जानकारी उपलब्ध कराने का दबाव बनाया जाता था. हालांकि, इन आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी.

CDPO परीक्षा में भी कथित लेन-देन का दावा

अभय तिवारी ने CDPO परीक्षा को लेकर भी कथित पैसों के लेन-देन का जिक्र किया है. उसके बयान के अनुसार, प्रति अभ्यर्थी करीब 10 लाख रुपये का कथित रेट था. एक अभ्यर्थी के मामले में 15 लाख रुपये और दूसरे मामले में अजीता भट्टाचार्य के पीए को 10 लाख रुपये दिए जाने का दावा किया गया है. अब CID इन बयानों, दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और TDPL से जुड़े लोगों के कथित बयानों की जांच कर रही है. फिलहाल किसी भी व्यक्ति की भूमिका को दोष सिद्ध मानना उचित नहीं है. जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्य पर निर्णय के बाद ही इन आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट होगी.