Jharkhand

MMDR पर झारखंड में सियासी संग्राम, रघुवर दास का JMM और कांग्रेस पर हमला , बोले-‘खनन के नाम पर राज्य में चल रहा लूट का खेल’

Samir Hussain
Samir Hussain
सीनियर रिपोर्टर

रांची. झारखंड में MMDR को लेकर सियासी तपिश बढ़ गई है. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने केंद्र सरकार के MMDR बिल के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है. वहीं भाजपा ने इसे राज्य की जनता को बरगलाने वाला आंदोलन बताया है. भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता कर पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने JMM और हेमंत सोरेन सरकार पर जमकर निशाना साधा.

रघुवर दास ने कहा कि केंद्र सरकार का MMDR बिल राज्य और राष्ट्रहित में है. लेकिन JMM इसे गलत तरीके से पेश कर जनता के बीच भ्रम पैदा कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड के धनबाद. बोकारो. चतरा. हजारीबाग और रामगढ़ जैसे खनन क्षेत्रों में कोयले की लूट का खेल चल रहा है.उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान JMM ने ‘जल. जंगल और जमीन’ की बात की थी. लेकिन सत्ता में आने के बाद इन्हीं संसाधनों को एक सिंडिकेट के हवाले कर दिया गया. रघुवर दास ने सरकार पर खनन क्षेत्र में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था को संरक्षण देने का आरोप लगाया.

‘खनिज रॉयल्टी का 90 फीसदी राज्य को मिलता है’

MMDR को लेकर राज्य सरकार की आपत्तियों पर सवाल उठाते हुए रघुवर दास ने कहा कि खनन से मिलने वाली रॉयल्टी का बड़ा हिस्सा राज्य सरकार को मिलता है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के बीच यह भ्रम पैदा कर रही है कि केंद्र खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकार को खत्म करना चाहता है.उन्होंने राज्य में खनन परियोजनाओं की धीमी रफ्तार का भी मुद्दा उठाया. रघुवर दास के मुताबिक. राज्य में कई कोल ब्लॉक को मंजूरी मिलने के बावजूद उनमें से बहुत कम पर काम शुरू हो पाया है. उन्होंने लौह अयस्क और बॉक्साइट खनन की स्थिति पर भी सरकार से जवाब मांगा.

निवेश के नाम पर सिर्फ ढिंढोरा’

रघुवर दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की निवेश नीति पर भी हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निवेश लाने के दावे तो करती है. लेकिन राज्य में वास्तविक निवेश का माहौल तैयार नहीं कर पाई है.उन्होंने कहा कि राज्य में खनन और उद्योग से जुड़े मामलों में फाइलें लंबे समय तक लंबित रहने से निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो रहा है. भाजपा नेता ने सवाल उठाया कि जब कई कोयला खदानों की नीलामी हो चुकी है. तो आवंटन और आगे की प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है.

DMF को लेकर भी सरकार पर गंभीर आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन यानी DMF के इस्तेमाल को लेकर भी राज्य सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने धनबाद. चाईबासा और चतरा में DMF के पैसों के इस्तेमाल में अनियमितता का आरोप लगाया.रघुवर दास ने कहा कि जिन इलाकों में खनन हो रहा है. वहां स्थानीय लोगों को स्वच्छ पेयजल. स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए थीं. उन्होंने आरोप लगाया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को इसका पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा है.

‘सेस से झारखंड का कोयला और लोहा महंगा’

रघुवर दास ने झारखंड सरकार की ओर से लगाए गए सेस को भी उद्योग और खनन क्षेत्र के लिए नुकसानदेह बताया. उनका दावा है कि अतिरिक्त सेस के कारण झारखंड का कोयला और लोहा पड़ोसी राज्यों की तुलना में महंगा हो गया है.उन्होंने कहा कि महंगे खनिज के कारण खरीदार झारखंड से दूरी बना सकते हैं. इससे वैध खनन प्रभावित होने का खतरा है. उनके मुताबिक. वैध खनन घटने से राज्य के राजस्व और रोजगार दोनों पर असर पड़ेगा.

आदिवासी-मूलवासी की स्थिति नहीं बदली’

रघुवर दास ने सरकार से सवाल किया कि पिछले छह वर्षों में कितने आदिवासी और मूलवासी परिवारों की आर्थिक स्थिति में वास्तविक सुधार हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि खनन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याएं जस की तस हैं. जबकि सत्ता और प्रशासन से जुड़े लोगों की स्थिति बेहतर हुई है.उन्होंने कहा कि MMDR को लेकर आंदोलन के पीछे असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है. भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नई व्यवस्था से अवैध खनन और कथित सिंडिकेट पर लगाम लग सकती है. इसलिए JMM इसका विरोध कर रही है.