Jharkhand

खत्म होगा नक्सलवाद का अंतिम किला! मिसिर बेसरा की फिर तलाश हुई तेज, 5 हजार जवान करेंगे खात्मा

Samir Hussain
सीनियर रिपोर्टर
खत्म होगा नक्सलवाद का अंतिम किला! मिसिर बेसरा की फिर तलाश हुई तेज, 5 हजार जवान करेंगे खात्मा

रांची (RANCHI): झारखंड में माओवादियों के अंतिम किले को अब पूरी तरह से ध्वस्त करने की कार्रवाई फिर शुरू होने वाली है.CRPF,कोबरा झारखंड पुलिस और जगुआर की स्पेशल टीम अब माओवादियों के खिलाफ बड़े अभियान की शुरुआत करेंगे. सारंडा,कोल्हान के साथ साथ पूर्वी सिंहभूम के जंगल में माओवादियों के आखरी नेता की तलाश तेज कर दी गई. जिससे इस इलाके को पूरी तरह नक्सल मुक्त किया जा सके. आखरी ऑपरेशन को लेकर डीजीपी तदाशा मिश्रा ने चाईबासा में हाई लेबल मीटिंग की है. जिसमें कई जिले के एसपी के साथ बैठक की है.

दरअसल केंद्र सरकार ने माओवादियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की और नक्सल खात्मे की तारिक 31 मार्च 2026 रखी. जिसपर देश के अन्य राज्यों में बड़े पैमाने पर ऑपरेशन शुरू किए गए और बड़े माओवादियों ने हथियार डाल दिया. लेकिन झारखंड का सारंडा एक चुनौती के रूप में सामने आया. जहां अधिकतर इलाके में माओवादियों का खात्मा हुआ. कई माओवादी मारे गए. इसके बावजूद मिसिर बेसरा समेत दो दर्जन माओवादी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गए.

ऐसे में आखिर माओवादी नेता कहा है इसकी कोई जानकारी किसी के पास नहीं है. लेकिन बीच में खबर आई की मिसिर बेसरा समेत अन्य नक्सली दाल्मा इलाके में मौजूद है. उनकी गतिविधि देखी गई है. जिसके बाद इस इलाके में नए सिरे से अभियान चलाने की शुरुआत की गई. लेकिन बेसरा की कोई जानकारी नहीं मिली. ऐसे में अब डीजीपी ने बैठक में तय किया है कि एक साथ तीन जिलों में अभियान की शुरुआत होगी.

जिसमें पश्चिमी सिंहभूम,सरायकेला खरसावां और पूर्वी सिंहभूम में सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस संयुक्त रूप से अभियान चला कर माओवादियों की तलाश करेगी. जिससे ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट पूरी तरह से कामयाब हो सके. और माओवादियों का नाम ओ निशान झारखंड से खत्म हो सके.

बता दे कि माओवादियों के खिलाफ़ झारखंड के सारंडा में करीब पाँच हजार जवानों को लगाया गया है. इसके बावजूद माओवादियों के दूसरे सबसे बड़े नेता मोसिर बेसरा फरार हो गया. उसके साथ उसके दस्ते के करीब 5 से 7 साथी मौजूद है. जिनकी तलाश सुरक्षा बल के जवानों को है. माना जा रहा है कि झारखंड में अगर बेसरा का अंत हुआ तो माओवाद पूरी तरह से खत्म हो जाएगा.यही वजह है डीजीपी खुद पूरे अभियान की खुद मोनेटरिंग कर रही है.                                           

डीजीपी ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे अभियान को और तेज करने, सीमावर्ती इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने, अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा आम लोगों में सुरक्षा के प्रति विश्वास मजबूत करने पर जोर दिया.  उन्होंने अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए और निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का टास्क सौंपा.  डीजीपी की यह समीक्षा बैठक कोल्हान में नक्सल गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण, अपराध पर अंकुश तथा कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

बैठक में एसटीएफ के आईजी अनूप बिरथरे, आईजी ऑपरेशन नरेंद्र कुमार सिंह, सीआरपीएफ के आई जी साकेत कुमार सिंह, कोल्हान प्रक्षेत्र के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा, जमशेदपुर के एसएसपी डॉ एहतेशाम वक़ारिब, पूर्वी सिंहभूम के ग्रामीण एसपी शुभम कुमार खंडेलवाल, सरायकेला-खरसावां के एसपी मनोज स्वर्गियारी, पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अमित रेणु सहित तीनों जिलों के वरीय पुलिस पदाधिकारी, सीमावर्ती क्षेत्रों के सभी थाना प्रभारी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे.