टीएनपी डेस्क (TNP DESK): जैसे-जैसे JPSC/JSSC घोटाले की परत-दर-परत खुलती जा रही है वैसे वैसे-वैसे नए-नए खुलासे होते जा रहे हैं. पर हैरान करने वाली बात यह ये है की इस घोटाले को देश के सबसे बड़े घोटालों में से एक में गिने जाने वाले चारा घोटाले की तर्ज पर देखा जा रहा है. रेपोर्ट्स की माने तो चारा घोटाला जिसे लगभग 950 करोड़ रुपये का घोटाला माना जाता है, उसी तरह CGL घोटाला भी कितने हजार करोड़ का हो सकता है इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है.
दरअसल हालही में मामले में नए नाम सामने आ रहे हैं. सीआईडी की एसआईटी ने कोडरमा से दो लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें राजेश प्रसाद यादव नाम का एक यूट्यूबर और संदीप कुमार नामक सामाजिक ट्रस्ट का संचालक शामिल है. दोनों पर अभ्यर्थियों से पैसे लेकर परीक्षा में कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाने और सेटिंग कराने के आरोप हैं. दोनों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि परीक्षा में कथित फर्जीवाड़े का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे. हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी.
सीआईडी की जांच में पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के दौरान राजेश यादव और संदीप कुमार के कथित कनेक्शन से संबंधित जानकारी मिलने की बात सामने आई. इसके बाद एसआईटी ने कोडरमा में अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई की. जांच टीम ने डोमचांच थाना क्षेत्र के गोलवाढाब से राजेश यादव को पकड़ा, जबकि संदीप कुमार को कोडरमा थाना क्षेत्र के पूर्णानगर से हिरासत में लिया गया. दोनों को पूछताछ के लिए रांची स्थित सीआईडी मुख्यालय लाया गया. सूत्रों के मुताबिक, कई दिनों तक पूछताछ और उपलब्ध जानकारी के आधार पर मंगलवार को दोनों की औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज की गई.
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि JSSC CGL परीक्षा से जुड़े कथित फर्जीवाड़े में दोनों की वास्तविक भूमिका क्या थी. सीआईडी उनके अभ्यर्थियों से संपर्क, कथित पैसों के लेन-देन और परीक्षा में अनुचित फायदा पहुंचाने के आरोपों से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है. जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि अगर अभ्यर्थियों से पैसे लिए गए थे, तो रकम किस माध्यम से ली गई और किन लोगों तक पहुंची. इसके अलावा दोनों आरोपियों के मोबाइल संपर्क और अन्य संभावित कनेक्शन भी जांच के दायरे में हैं.
सीआईडी के अनुसार, पूछताछ के दौरान दोनों से वित्तीय लेन-देन और अभ्यर्थियों से जुड़े कई सवाल किए गए. एजेंसी का आरोप है कि कुछ सवालों के जवाब में दोनों ने अपेक्षित सहयोग नहीं किया और जांच को दूसरी दिशा में ले जाने की कोशिश की. इसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की गई. अब एसआईटी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों का कथित नेटवर्क किन लोगों तक फैला हुआ है और परीक्षा से जुड़े अन्य आरोपियों या संदिग्धों के साथ उनका किस तरह का संपर्क था.
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. सीआईडी की एसआईटी अब कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है. जांच एजेंसी वित्तीय लेन-देन, मोबाइल संपर्क और अभ्यर्थियों से जुड़े इनपुट को आपस में जोड़कर पूरे मामले की कड़ियां तलाश रही है. अधिकारियों के अनुसार, जांच आगे बढ़ने पर मामले में और नाम सामने आ सकते हैं और अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई संभव है. JSSC CGL परीक्षा की कथित धांधली में पहले से चल रही जांच के बीच कोडरमा से हुई इन दो गिरफ्तारियों ने मामले के दायरे को और विस्तृत कर दिया है. अब जांच का केंद्र सिर्फ परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं तक सीमित नहीं, बल्कि उससे जुड़े संभावित नेटवर्क और आर्थिक लेन-देन तक भी पहुंच गया है.
