रांची (RANCHI): झारखंड पुलिस को लेकर विवादों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. एक तरफ धनबाद के बरवाअड्डा थाना प्रभारी और विधायक जयराम महतो के बीच चल रहा विवाद अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ है, वहीं अब गिरिडीह के पचंबा थाना पुलिस पर भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट के आरोप ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है.
गिरिडीह के पचंबा थाना से जुड़े मामले में भाजपा नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं. भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने भी इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री और गिरिडीह पुलिस प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए थाना प्रभारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. भाजपा का आरोप है कि थाना परिसर में उनके कार्यकर्ताओं पर लाठियां बरसाई गईं और पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया. पार्टी नेताओं का कहना है कि अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में पुलिस कई बार सवालों के घेरे में रहती है, लेकिन राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम लोगों के साथ सख्ती दिखाने में पीछे नहीं रहती.
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए गिरिडीह पुलिस अधीक्षक से पचंबा थाना प्रभारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मामले में निष्पक्ष और ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो भाजपा कार्यकर्ता सड़क पर उतरकर विरोध करेंगे. यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब धनबाद के बरवाअड्डा थाना प्रभारी और विधायक जयराम महतो के बीच विवाद को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पहले से ही राजनीतिक बहस का विषय बनी हुई है. उस मामले में पुलिस अधिकारियों और विभिन्न संगठनों की प्रतिक्रियाओं ने विवाद को और अधिक चर्चा में ला दिया था.
अब पचंबा थाना प्रकरण ने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या झारखंड पुलिस अपनी कार्यशैली और जनसंपर्क को लेकर आत्ममंथन करेगी. हालांकि पुलिस का पक्ष भी महत्वपूर्ण है. थाना परिसर में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने और बल प्रयोग करने का अधिकार है. लेकिन सवाल यह है कि बल प्रयोग कितना आवश्यक था और क्या किसी व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत स्तर पर मारपीट हुई. इसका जवाब निष्पक्ष जांच, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित लोगों के बयान से ही सामने आ सकता है.
राजनीतिक दलों का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई में कई बार संवेदनशीलता और जवाबदेही की कमी दिखाई देती है. दूसरी ओर पुलिसकर्मियों का तर्क रहता है कि उन्हें बेहद तनावपूर्ण परिस्थितियों में कानून व्यवस्था संभालनी पड़ती है. लेकिन लगातार सामने आ रहे ऐसे विवाद झारखंड पुलिस की छवि पर सवाल जरूर खड़े कर रहे हैं. बरवाअड्डा हो या पचंबा, हर नए विवाद के साथ यही सवाल और मजबूत हो रहा है कि आखिर झारखंड पुलिस खुद को लेकर उठ रहे सवालों से सबक क्यों नहीं ले रही. अब नजर गिरिडीह पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं. क्या पचंबा थाना मामले की निष्पक्ष जांच होगी, या फिर यह विवाद भी राजनीतिक बयानबाजी और आरोप प्रत्यारोप के बीच दबकर रह जाएगा.
