Jharkhand

JSSC-CGL रद्द होने के बाद भी नहीं थमा छात्र आंदोलन, देवेंद्रनाथ महतो बोले- अब परीक्षा व्यवस्था में सुधार तक जारी रहेगा संघर्ष

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

रांची (RANCHI): झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सरकार के JSSC-CGL समेत TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के बाद आंदोलन को नया मोड़ मिल गया है. छात्र नेता और जेएलकेएम नेता देवेंद्रनाथ महतो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे आंदोलन के पहले चरण की बड़ी सफलता बताया. हालांकि, उन्होंने साफ कर दिया कि छात्रों की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. अब आंदोलन का दूसरा चरण परीक्षा और भर्ती व्यवस्था में स्थायी सुधार को लेकर होगा.

देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि छात्रों की सबसे बड़ी मांगों में से एक थी कि जिन परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं, उन्हें रद्द कर निष्पक्ष तरीके से आगे की प्रक्रिया शुरू की जाए. सरकार के फैसले से यह मांग पूरी हुई है. लेकिन उनके मुताबिक सिर्फ परीक्षा रद्द कर देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा. उन्होंने कहा कि अब सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जिसमें भविष्य में पेपर लीक, धांधली या भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश न रहे. इसी उद्देश्य से आंदोलन का दूसरा चरण शुरू किया जा रहा है.

छात्र नेता के अनुसार, आंदोलन की शुरुआत 2 जुलाई से हुई थी. इसके बाद 21 जुलाई से CID जांच शुरू हुई और 25 जुलाई को बापू वाटिका से सत्याग्रह की शुरुआत की गई. बाद में आंदोलन को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम तक ले जाया गया. छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर मशाल जुलूस, विधानसभा घेराव और तिरंगा यात्रा जैसे कई कार्यक्रम किए. इसके बाद 2 अगस्त से देवेंद्रनाथ महतो ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भूख हड़ताल के दौरान उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई थी और इलाज के दौरान स्थिति गंभीर हो गई थी.

देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि भूख हड़ताल फिलहाल खत्म कर दी गई है, लेकिन आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का धरना जारी रहेगा. उनके मुताबिक अब आंदोलन का मुख्य उद्देश्य भर्ती और परीक्षा प्रणाली में सुधार कराना है. छात्रों की मांग है कि परीक्षा आयोजित करने वाली पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए. साथ ही भर्ती प्रक्रिया का प्रशासनिक और वित्तीय ऑडिट भी कराया जाए, ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की संभावना को खत्म किया जा सके.

छात्र नेता ने प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और गोपनीय बनाने की मांग रखी. उनका कहना है कि प्रश्नपत्र तैयार करने के अलग-अलग चरणों में शामिल लोगों के बीच जरूरत से ज्यादा जानकारी साझा नहीं होनी चाहिए. उनकी मांग है कि प्रक्रिया के हर चरण के बाद संबंधित अधिकारियों से लिखित क्लीयरेंस सर्टिफिकेट या एफिडेविट लिया जाए. इससे किसी भी स्तर पर गड़बड़ी सामने आने पर जिम्मेदारी तय करने में आसानी होगी.

देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि अगर मौजूदा नियम परीक्षा संस्थाओं को पूरी तरह जवाबदेह बनाने में पर्याप्त नहीं हैं, तो सरकार को जरूरत पड़ने पर कानून में बदलाव करना चाहिए. उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया किसी भी व्यक्ति या एजेंसी के लिए लाभ कमाने का माध्यम नहीं बननी चाहिए. उन्होंने कहा कि एक छात्र का मुख्य काम पढ़ाई करना और परीक्षा की तैयारी करना है. उसे परीक्षा व्यवस्था की खामियों के खिलाफ आंदोलन करने, लाठीचार्ज झेलने या भूख हड़ताल करने की स्थिति में नहीं आना चाहिए.

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देवेंद्रनाथ महतो ने सरकार, प्रशासन, मीडिया, मेडिकल टीम और आंदोलन में प्रत्यक्ष या ऑनलाइन समर्थन देने वाले लोगों का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि मीडिया ने आंदोलन की आवाज को जनता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. CBI जांच की मांग पर उन्होंने कहा कि छात्रों के हितों को लेकर वे आगे भी अपनी आवाज उठाते रहेंगे. साथ ही उन्होंने माना कि परीक्षा रद्द होने से उन अभ्यर्थियों को भी परेशानी हुई है, जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा दी थी. इसलिए सरकार को ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिससे वास्तविक और मेहनती अभ्यर्थियों के हित सुरक्षित रहें. देवेंद्रनाथ महतो ने साफ कहा कि परीक्षा रद्द होना आंदोलन की पहली मंजिल है. अब असली लक्ष्य ऐसी पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था तैयार कराना है, जिसमें छात्रों को अपने अधिकारों के लिए बार-बार सड़क पर उतरने की जरूरत न पड़े.