Jharkhand

झारखंड में छात्र आंदोलन: क्या राजनीति की जंजाल में फंस जाएगा बड़ा आंदोलन,ताबड़तोड़ अरेस्टिंग क्या कर रहे इशारे 

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

राँची:  मेघा घोटाले में अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज तिवारी की गिरफ्तारी से  परत दर परत खुल रही है.   जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष की गिरफ्तारी ने भी सबको चौंकाया  है.   गिरफ्तारी और जेपीएससी सदस्यों का इस्तीफा इस बात की ओर इंगित कर रहा है कि मामला गंभीर है.  यह  अलग बात है कि यह मामला अब राजनीतिक रूप भी ले लिया है और प्रवर्तन निदेशालय की भी इसमें एंट्री हो गई है.  सूत्रों के अनुसार ईडी  ने सोमवार को ECIR दर्ज  कर लिया है.  अब वह इस मामले में पैसे की लेनदेन की जांच करेगी।  ईडी  ने टीडीपीएल के निदेशकों सहित कुल आठ लोगों को नामजद  अभियुक्त बनाया है.  इससे जेपीएससी के अलावा जेएसएससी द्वारा आयोजित परीक्षाएं भी जांच के दायरे में आ गई हैं. 

ईडी भी पैसे की लेनदेन को खंगालेगी 
 
परीक्षाओं में घोटाले को लेकर कथित लेनदेन के मामले की अब परत खुलेगी।  कुल मिलाकर यह मामला बड़ा होता जा रहा है.  छात्र अभी भी आंदोलन पर डटे हैं.  दूसरी ओर राजनीतिक दल का भी इसमें प्रवेश हो गया है.  भाजपा छात्र आंदोलन की क्रेडिट लेने के लिए आज बंद  का आह्वान किया है, तो जेएलकेएम भी छात्र आंदोलन में सक्रिय है ही. जैसे जैसे आंदोलन आगे बढ़ रहा है ,राजनीति में फंसता दिख रहा है.  आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो विधायक  जय राम महतो की पार्टी से जुड़े हैं.  झारखंड के युवाओं में जेएलकेएम का प्रभाव हैं.  सरकार यह कभी नहीं चाहेगी कि इस आंदोलन का पूरा श्रेय जेएलकेएम को मिले।  इसका राजनीतिक नुकसान भी हो सकता है. भाजपा भी कूद गई है. सीबीआई जाँच की वह समर्थन कर रही है. इधर ,मुख्यमंत्री ने साफ़ कर दिया है कि छात्रों की बात सिर्फ छात्रों से होगी।  

आखिर यह आंदोलन इतना बड़ा और तेज कैसे हुआ?

आखिर यह आंदोलन इतना बड़ा और तेज कैसे हुआ? 19 अप्रैल को झारखंड लोक सेवा आयोग ने 103 वरिष्ठ प्रशासनिक पदों के लिए 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा कराई थी.  इसके बाद परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लगे.  2 जुलाई को जारी रिजल्ट में 2204 उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए चुना गया.  मुख्य परीक्षा की तारीख घोषित हुई.  हालांकि छात्रों का आरोप  गड़बड़ी का रहा.  छात्रों का आरोप  था कि कुछ उम्मीदवारों को नेपाल, बिहार और पश्चिम बंगाल में ले जाकर जवाब याद कराए गए.  अन्य भी कई तरह के आरोप लगाए गए.    31 जुलाई को एफआईआर  दर्ज हुई.  सीआईडी ने जेपीएससी की परीक्षा उप नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और परीक्षा एजेंसी टीडी पीएल  के कर्मचारियों समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया।   विवाद बढ़ने पर 22 जुलाई को जेपीएससी के अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया।  अगले दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी.  इस बीच आगे होने वाली परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया.  छात्र अब आंदोलित  होने लगे थे. 

25 जुलाई से ही शुरू हो गई थी आंदोलन की रूप रेखा 
 
25 जुलाई को छात्रों ने रांची के मोहराबादी  स्थित बाबू वाटिका में प्रदर्शन शुरू किया ।  28 जुलाई को आंदोलन रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंच गया.  फिर 2 अगस्त से देवेंद्र महतो ने छात्रों के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू कर दिया।  उनके साथ दो छात्राओं समेत चार अन्य छात्र भी आमरण अनशन पर बैठे।  छात्रों की मांग है कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा को रद्द कर सीबीआई से  जांच कराई जाए.  टीडीपीएल से कराई गई सभी परीक्षा रद्द की जाए.  इसके अलावा जेपीएससी और जेएसएससी के अधिकारियों को हटाया जाए और सजा  के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाया जाए.  इसके बाद 5 अगस्त को सरकार ने छात्रों से बातचीत के लिए चार मंत्रियों की हाई पावर समिति बनाई।  7 अगस्त को छात्रों और सरकार के बीच पहले दौर की बात हुई.  

आठ और नौ अगस्त को टूटा गतिरोध ,फिर तो उग्र हो गया आंदोलन 

8 अगस्त को भी छात्रों के प्रतिनिधि मंडल से बातचीत हुई.  सरकार की ओर से छात्रों से सुझाव मांगे गए और उन्हें ईमेल आईडी भी उपलब्ध कराया गया.  छात्रों का कहना था कि उनकी मांगे पहले से स्पष्ट है, वह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के फैसले के बाद ही भूख हड़ताल खत्म करेंगे।  इसके बाद 9 अगस्त को 4 घंटे तक तीसरे दौर की बातचीत हुई.  सरकार ने जेपीएससी परीक्षा रद्द करने पर सहमति जाता दी.  लेकिन छात्र आंदोलन पर अड़े रहे. कह रहे  जब तक उनकी सभी मांगे नहीं मान ली जाती, आंदोलन जारी रहेगा।  इसके बाद 10 अगस्त को छात्रों ने झारखंड विधानसभा के घेराव के लिए मार्च शुरू कर दिया।  बताया जाता है कि सरकार के लिए सभी मांगों को तुरंत मान लेना आसान नहीं है, इसके पीछे कई कानूनी और राजनीतिक कारण हो सकते है. इधर ,सोमवार को विधानसभा घेराव पर लाठी चार्ज हुआ. आंसू गैस छोड़े गए, जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष गिरफ्तार कर लिए गए. इसके पहले सरकार के साथ छात्रों की बातचीत टूट गई थी.

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