Jharkhand

रिम्स जमीन मामले में शुभम साबू को मिली जमानत, ACB की जांच पर कोर्ट ने उठाए सवाल

Diksha Benipuri
Diksha Benipuri
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रांची (RANCHI): रिम्स से जुड़े कथित जमीन और भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार डेवलपर शुभम साबू को अदालत से राहत मिली है. कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका मंजूर कर दी. सुनवाई के दौरान अदालत ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच और अब तक की कार्रवाई को लेकर कई सवाल भी उठाए.

सुनवाई के दौरान अदालत ने ACB से पूछा कि मामले में निजी लोगों के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की गई, लेकिन कथित रूप से जुड़े सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया. कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि जिन अधिकारियों की भूमिका सरकारी जिम्मेदारियों के निर्वहन से जुड़ी बताई जा रही है, वे अब भी सेवा में हैं, जबकि निजी पक्ष के लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया.

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि मामले को लगभग आठ महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद जांच के दायरे और कार्रवाई की समानता को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

शुभम साबू की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत में जमीन से संबंधित दस्तावेजों का हवाला देते हुए अपना पक्ष रखा. बचाव पक्ष के मुताबिक, संबंधित भूमि को लेकर रजिस्टर्ड सेल डीड के आधार पर डेवलपमेंट एग्रीमेंट किया गया था. दस्तावेज पर सरकारी प्रमाणीकरण मौजूद था और उसमें जमीन को अधिग्रहण या वन भूमि के दायरे में नहीं बताया गया था.

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि संबंधित प्लॉट के लिए Non-Encumbrance Certificate (NEC) जारी किया गया था. वकील का तर्क था कि डेवलपर ने उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही जमीन से जुड़ी गतिविधियां आगे बढ़ाईं.

बचाव पक्ष ने सवाल उठाया कि जब सरकारी रिकॉर्ड में जमीन से संबंधित स्थिति स्पष्ट थी और दस्तावेज आधिकारिक स्तर पर जारी किए गए थे, तो डेवलपर को यह मानने का आधार कैसे होता कि रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी गलत है. वकील ने कहा कि यदि सरकारी दस्तावेजों में कोई गड़बड़ी थी, तो उन्हें तैयार करने, सत्यापित करने या जारी करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए.

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने यह आरोप भी लगाया कि शुभम साबू की गिरफ्तारी के जरिए उन सरकारी अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया गया, जिनकी भूमिका की पर्याप्त जांच नहीं हुई. हालांकि, यह बचाव पक्ष का आरोप है और इसका अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है.

जमानत मिलने के बाद अब मामले की आगे की जांच पर नजर है. अदालत की टिप्पणियों के बाद सरकारी अधिकारियों की संभावित भूमिका की जांच को लेकर भी सवाल उठे हैं. आरोपों की अंतिम सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी.