रांची(RANCHI): रांची के अमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर ‘रूट्स एंड रिदम्स. सेलिब्रेटिंग वर्ल्ड इंडिजिनस डे’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) सेल की ओर से छात्र कल्याण विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को आदिवासी संस्कृति, परंपरा और भारतीय ज्ञान प्रणाली से जोड़ना था.
विश्वविद्यालय के विजन और मिशन के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम में संस्थापक अध्यक्ष और कुलाधिपति का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ. अमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक के. श्रीवास्तव ने भी कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं.
पद्मश्री मधु मंसूरी हसमुख ने बढ़ाया छात्रों का उत्साह
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री सम्मानित लोक गायक मधु मंसूरी हसमुख रहे. उन्होंने अमिटी यूनिवर्सिटी की इस पहल की सराहना करते हुए छात्रों को अपनी संस्कृति और पहचान से जुड़े रहने का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़कर ही समाज और संस्कृति को आगे बढ़ाया जा सकता है.
लोक गायक मधु मंसूरी हसमुख ने बताया कि उन्होंने करीब 300 नागपुरी गीतों की रचना की है. उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके गीतों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है. कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने दो लोकप्रिय गीत भी प्रस्तुत किए, जिसमें ‘गांव छोड़ब नहीं’ ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया.
भारतीय ज्ञान परंपरा की उपयोगिता पर चर्चा
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. धरमपुरी वेदरत्न ने भारतीय ज्ञान प्रणाली के महत्व पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराओं और ज्ञान का महत्व आज भी पूरी दुनिया में बना हुआ है. उन्होंने छात्रों से अपनी संस्कृति, इतिहास और पारंपरिक ज्ञान को समझने और आगे बढ़ाने की अपील की.
पारंपरिक चिकित्सा पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन
कार्यक्रम में अमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड की IKS परियोजना के तहत तैयार की गई डॉक्यूमेंट्री ‘हीलिंग फ्रॉम रूट्स. ए स्टडी ऑफ ट्रेडिशनल मेडिसिनल प्लांट्स इन लालगुटवा, पुंदाग एंड तुसमु ब्लॉक ऑफ झारखंड’ का प्रदर्शन किया गया.
इस डॉक्यूमेंट्री में झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले औषधीय पौधों, पारंपरिक उपचार विधियों और स्थानीय समुदायों के स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान को दिखाया गया. इस परियोजना की प्रधान अन्वेषक डॉ. लीना बोस और सह-प्रधान अन्वेषक डॉ. आकांक्षा यादव हैं.
छात्रों ने दिखाई झारखंड की सांस्कृतिक विविधता
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण झारखंड की विभिन्न जनजातियों की संस्कृति पर आधारित छात्र प्रस्तुतियां रहीं. छात्रों ने पारंपरिक नृत्य और रैंप वॉक के माध्यम से राज्य की समृद्ध आदिवासी विरासत को प्रस्तुत किया. इन प्रस्तुतियों में झारखंड की लोक कला, पहनावा और परंपराओं की सुंदर झलक देखने को मिली.
नवाचार और आदिवासी विकास पर भी दिया गया जोर
कार्यक्रम के दौरान झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग तथा झारखंड काउंसिल ऑन साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन की ओर से संचालित झारखंड ग्रासरूट्स इनोवेशन इंटर्नशिप स्कीम (JGIIS) की जानकारी भी दी गई.
‘Innovation with Roots, Learn with Purpose, JGIIS for Smarter Jharkhand’ थीम के माध्यम से छात्रों को नवाचार और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए प्रेरित किया गया.
कार्यक्रम के समापन के बाद अतिथियों ने अमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ट्राइबल रिसर्च एंड एंटरप्रेन्योरशिप का दौरा किया. यहां उन्होंने आदिवासी समुदायों से जुड़े शोध, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली.